पुष्कर के महात्मा गांधी स्कूल का पहला वार्षिक उत्सव:स्टूडेंट्स और भामाशाहों का किया सम्मान, निजी स्कूलों की तर्ज पर कार्यक्रम

पुष्कर10 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

राज्य सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में नवाचार करते हुए सरकारी हिंदी माध्यमिक विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम में क्रमोन्नत कर शैक्षणिक व्यवस्थाओं का संचालन किया जा रहा है। इन्हीं विद्यालयों के माध्यम से बच्चों में शैक्षणिक स्तर को सुधारने का प्रयास जारी है। दूसरे अंग्रेजी माध्यम के निजी विद्यालयों की तर्ज पर तीर्थ नगरी पुष्कर के राजकीय महात्मा गांधी केंद्रीय विद्यालय में पहला वार्षिक उत्सव और भामाशाह सम्मान समारोह पुरस्कार वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें बच्चों ने रंगारंग प्रस्तुति देकर उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया।

स्कूल में बच्चों की ओर से कई तरह की प्रस्तुति दी गई
स्कूल में बच्चों की ओर से कई तरह की प्रस्तुति दी गई

राजकीय विद्यालयों में नवाचार की बयार
तीर्थ नगरी पुष्कर सहित आस पास की राजकीय सीनियर माध्यमिक विद्यालय का वार्षिक उत्सव और पुरस्कार वितरण समारोह के आयोजन हो रहे हैं। इसी के अंतर्गत बुधवार को राजकीय महात्मा गांधी केंद्रीय विद्यालय में भव्य रंगारंग कार्यक्रम के साथ पहला वार्षिक उत्सव आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पार्षद मुकेश कुमावत, धर्मेंद्र नागोरा, समाजसेवी कांग्रेस नेता बैजनाथ पाराशर, संजय दगदी, महेश पाराशर ने मां सरस्वती के दीप प्रज्वलित करके किया।

पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित
संस्था के प्रधानाचार्य प्रदीप कुमार शर्मा ने बताया की वार्षिक उत्सव एवं पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर स्कूली बच्चों के द्वारा रंगारंग कार्यक्रमो की प्रस्तुति दी गई और बच्चों को अतिथियों के द्वारा पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर काफी संख्या में अभिभावक गण मौजूद थे। साथ ही सभी अतिथियों का स्कूल के शिक्षकों के द्वारा माला पहनाकर उनका स्वागत और सम्मान किया गया।

वार्षिकोत्सव के दौरान स्टूडेंट्स और भामाशाहों का सम्मान किया गया
वार्षिकोत्सव के दौरान स्टूडेंट्स और भामाशाहों का सम्मान किया गया

मानसिक विकास के साथ-साथ बच्चों का हो भावनात्मक विकास- प्रधानाचार्य प्रदीप कुमार
राजकीय महात्मा गांधी केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य प्रदीप कुमार शर्मा ने बताया कि स्कूल शिक्षा से बच्चों के मानसिक विकास को संबल मिलता है। इसी के साथ-साथ बच्चों में भावनात्मक और नैतिक मूल्यों का विकास होना बेहद जरूरी है। आज के तकनीकी युग में बच्चे उन्नति कर बड़े पदों पर आसीन होते हैं। दुर्भाग्यवश कालांतर में वही बच्चे जब सक्षम हो जाते हैं। तो अपने माता-पिता को वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर करते हैं। प्रदीप कुमार ने बताया कि उनकी मंशा है कि बच्चे मानसिक विकास के साथ-साथ नैतिक मूल्य को भी स्वयं में विकसित करें। इसी उद्देश्य के साथ ही विद्यालय में बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। जिससे विद्यालय से निकलने वाला बच्चा एक उत्तरदाई नागरिक के रूप में देश और समाज में अपनी जगह बनाएगा।

खबरें और भी हैं...