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औद्योगिक समस्या:राजस्थान में पंजाब से 2.07, हरियाणा से 1.40 महंगी बिजली, 3000 बेरोजगार हुए

भिवाड़ी/अलवर15 दिन पहलेलेखक: प्रवीण शर्मा
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सरकार को तो राजस्व का नुकसान हुआ ही है। साथ ही तीन हजार से अधिक लोग बेरोजगार भी हो गए हैं। - Dainik Bhaskar
सरकार को तो राजस्व का नुकसान हुआ ही है। साथ ही तीन हजार से अधिक लोग बेरोजगार भी हो गए हैं।
  • भिवाड़ी में ज्यादातर स्टील उत्पाद कंपनियों ने प्लांट बंद किए, सब बिजली आधारित थे,अब तक 10 प्लांट बंद

देश में सर्वाधिक महंगी बिजली का नुकसान अब भिवाड़ी के उद्योगों को उठाना पड़ रहा है। पड़ोसी राज्यों के मुकाबले मंहगी रेट के चलते भिवाड़ी के स्टील उद्योग पलायन कर रहे हैं। करीब 10 बड़े उद्योग बंद हो चुके हैं। इससे सरकार को तो राजस्व का नुकसान हुआ ही है। साथ ही तीन हजार से अधिक लोग बेरोजगार भी हो गए हैं। स्टील में सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र पंजाब की गोविंदगढ़ में है।

पंजाब में राजस्थान की तुलना में बिजली 2.07 रुपए तक सस्ती है। करीब 1500 डिग्री से ऊपर तापमान की आवश्यकता होने के चलते ये स्टील कंपनियां 24 घंटे चलती हैं। ऐसे में इन कंपनियों में बिजली कच्चे माल के रुप में काम में ली जाती है। प्रत्येक स्टील कंपनी का औसत बिल दो से ढाई करोड़ रुपए माह तक आता है।

पंजाब के अतिरिक्त हरियाणा से 1.40 रुपए, मध्यप्रदेश से 1.27 रुपए एवं गुजरात से 55 पैसे प्रति यूनिट अधिक महंगी बिजली राजस्थान खरीद रहा है। जबकि दिल्ली, पंजाब और गोवा सहित कई राज्य हिमाचल प्रदेश जैसे बिजली उत्पादक राज्यों से काफी सस्ती बिजली खरीद रहे हैं।

20 करोड़ यूनिट उद्योगों में जाती है, इसका 20 फीसदी दिया जाता है स्टील को

हर माह करीब 24 करोड़ यूनिट खपत है। इनमें से 20 करोड़ यूनिट उद्योगों में जाती है। फिलहाल भिवाड़ी में 15 स्टील कंपनियां चल रही हैं। इस 20 करोड़ यूनिट में से चार करोड़ यूनिट से अधिक बिजली स्टील प्लांटों में जा रही है। जो उद्योगों को दी जाने वाली बिजली का 20% है।

भिवाड़ी के स्टील उद्योगों से निगम को 30% से अधिक रेवन्यू मिलता था। पिछले कुछ समय से इसमें कमी आई है। 10 से अधिक स्टील कंपनियों ने अपने कनेक्शन कटवाए हैं।
-एस.सी. महावर, अधिशासी अभियंता, बिजली निगम

पंजाब में 2 रुपए सस्ती बिजली से कंपनियों को 2 लाख प्रति टन लागत की बचत, ऐसे समझिए...

100 टन लोहे में बिजली यूनिट खपत 70000

करोड़ों का घाटा, पंजाब जा रही कंपनियां

भिवाड़ी से जगदंबा कास्टिंग एवं श्रीश्याम कृपा स्टील अब पंजाब के गोविंदगढ़ में पलायन कर रही हैं। जगदंबा कास्टिंग के निदेशक पवन बंसल एवं श्रीश्याम कृपा के निदेशक राजवीर दायमा ने बताया कि एक टन लोहा गलाने में करीब 700 यूनिट बिजली काम आती है। हमारे यहां करीब 100 टन लोहा गलाई का प्रत्येक दिन का काम था। बंसल का कहना है कि राजस्थान और पंजाब की बिजली में सीधे 2.07 रुपए प्रति यूनिट का अंतर है। कंपनी को पंजाब में रोजाना 2 लाख रुपए की बचत है।

झारखंड मेंं राजस्थान से सस्ता है उत्पादन

राठी बार्स के निदेशक उदयराज के अनुसार भिवाड़ी में कंपनी की 4 फर्नेस थी।इनमें 10 हजार टन स्टील प्रतिमाह बनता था। राजस्थान में बिजली महंगी होने से लागत बढ़ गई तो कंपनी ने झारखंड से तैयार माल मंगाना शुरू किया। यह भिवाड़ी फर्नेंस प्लांट में आ रही लागत से 2000 रुपए प्रति टन सस्ता पड़ा। ऐसे में राजस्थान में फर्नेस प्लांट बंद करना मुनाफे का सौदा था। अब यह प्लांट हमने बंद कर दिया है। राज्य सरकार को हमारे उद्योग बचाने के लिए गंभीर पहल करनी होगी।

भिवाड़ी में अब तक ये कंपनियां बंद हुईं

सांवरिया फर्नेस प्रा. लि., जय अंबे फर्नेस, तिरुपति बालाजी फर्नेस, मणिमहेश इस्पात, तरुण प्रा.लि., राठी बार, राठी इस्पात, नीलकंठ इस्पात, महामाया और रघुपति उद्योग पिछले दिनों बंद हो गए हैं।

सुझाव: श्रीबालाजी स्टील फोरजिंग प्रा. लि. के निदेशक राजाराम यादव के बताया कि प्रदेश में 1286 करोड़ यूनिट बिजली सरप्लस थी। सरकार इसे नॉन पीक हॉर में दूसरे राज्यों 4 से 5 रुपए प्रति यूनिट में बेच रही है। उसी लागत में यह उद्योगों को नोन पीक हॉर में यह बिजली दे दी जाए।

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