भाइयों का मर्डर देखने वाला बच्चा पहली बार कैमरे पर:कहा- भाई को ईंट मारी, पिता बोले- पुलिस चाहती तो जिंदा होते बच्चे

भिवाड़ी (अलवर)3 महीने पहले

अलवर जिले के भिवाड़ी शहर से तीन बच्चों को किडनैप कर दिल्ली में यमुना के जंगलों में ले जाकर 2 बच्चों का मर्डर कर दिया गया। इस घटना के बाद पूरा परिवार सदमे में है। तीन भाइयों में एक 8 साल का शिवा मौत के मुंह से बचकर आ गया था।

शिवा उस हत्याकांड का चश्मदीद और भुक्तभोगी है। आज भी उसके चेहरे पर खौफ है। उसने बताया कि भाइयों का मर्डर महावीर ने किया। दूसरे आरोपी मंजा कुमार को वह नहीं पहचानता। महावीर लेबर कॉलोनी में ही रहता है। उसकी बेटी रिया इन बच्चों के साथ ही खेलती थी।
तारीख -15 अक्टूबर 2022
समय - सुबह 10 बजे
जगह- मुकुट लेबर कॉलोनी, भिवाड़ी

15 अक्टूबर की सुबह सब्जी विक्रेता ज्ञान सिंह व उर्मिला के 6 बच्चों में से 3 बेटों को पड़ोस में रहने वाले महावीर और मंजा कुमार ने समोसा खिलाने का लालच दिया। 12 साल का विपिन, 10 साल का अमन और 8 साल का शिवा दोनों को पहचानते थे। माता-पिता सब्जी के ठेले पर गए हुए थे। घर में एक छोटी बहन थी। तीनों बच्चे महावीर और मंजा के साथ समोसा खाने चल पड़े।

महावीर और मंजा कुमार बिहार के रहने वाले हैं। दोनों पर 8 लाख का कर्ज था। दोनों की नीयत बच्चों को अगवा कर फिरौती मांगने की थी। इसलिए वे बच्चों को लेकर ट्रेन से भिवाड़ी से दिल्ली के धारूहेड़ा पहुंच गए। वहां से बच्चों को यमुना पार महरौली के जंगल में ले गए। 15 अक्टूबर के दिन ही आरोपियों ने विपिन और अमन की गला दबाकर हत्या कर दी, जबकि शिवा को मरा समझ कर जंगल में ही छोड़ गए।

दैनिक भास्कर ने इस हत्याकांड में जिंदा बचे तीसरे बच्चे शिवा से बात की तो उसने मासूमियत से खौफ के उस मंजर को बयान किया...

हमलोग घर के बाहर खेल रहे थे...इस दौरान कॉलोनी में रहने वाले अंकल, रिया के पापा महावीर आए...समोसे खिलाने की कहकर तीनों भाइयों को कॉलोनी से बाहर ले गए...कहीं दूर ले जाकर समोसे खिलाए...फिर बस में बैठा कर कहीं दूर ले गए...उनके साथ एक आदमी और था जिसे पहचानता नहीं..बस से उतर कर ऊंची सी ट्रेन पर बैठाया...ट्रेन से उतर कर जंगल में ले गए...

जंगल में महावीर अंकल ने भाई अमन को ईंटिया (ईंट) से मारा...उसके बाद अंकल मेरा गला दबाकर वहीं पटक दिया..इसके बाद बड़े भाई विपिन का क्या हुआ, मुझे पता नहीं...होश आया तो चारों ओर अंधेरा था...आसपास कोई नहीं था...दोनों भाई वहीं पड़े थे...मेरे रोने की आवाज सुनकर तीन आदमी मेरे पास आए और उठाकर ले गए..

पिता ने भिवाड़ी पुलिस पर लगाए आरोप
बच्चों के पिता ज्ञान सिंह ने भिवाड़ी पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। ज्ञान सिंह ने कहा- 15 अक्टूबर को सुबह 11 बजे जब बच्चों के गायब होने की सूचना लगी तो दोपहर 12 बजे भिवाड़ी के यूआईटी फेज थर्ड थाना पुलिस के पास पहुंचे। लिखित में रिपोर्ट दी। पुलिस ने शिकायत दर्ज नहीं की और कहा कि पहले तुम ढूंढो। उसके बाद फिर हम ढूंढेंगे। पुलिस ने बच्चों के फोटो तक नहीं लिए। रिपोर्ट को लेकर रख लिया।

ज्ञान सिंह के अनुसार- दूसरे दिन रविवार 16 अक्टूबर को फिर पुलिस थाने जाकर गिड़गिड़ाया, रोया। पुलिस ने फिर यही कहा कि अपने स्तर पर बच्चों को ढूंढो। मैं और पत्नी दोपहर तक थाने के सामने बैठे रोते-गिड़गिड़ाते रहे। उस दिन यानी 16 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे FIR दर्ज की गई। लेकिन कोई खास एक्शन नहीं लिया।

तीसरे दिन सोमवार 17 अक्टूबर को भी जब पुलिस ने केस में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई तो मैंने, पत्नी उर्मिला, बच्चों, भाई राधाकृष्ण व अन्य लोगों के साथ एसपी ऑफिस भिवाड़ी के सामने धरना दिया। उसी दोपहर 12 बजे के बाद राधाकृष्ण के मोबाइल पर कॉल आया। किडनैपर्स ने 8 लाख रुपए की फिरौती मांगी। इसकी लिखित सूचना तुरंत एसपी को दी। इसके बाद पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने किडनैपर के मोबाइल नंबर को ट्रेस पर डाला। शाम को दोबारा कॉल आया तो लोकेशन ट्रेस हो गई। नंबर की लोकेशन भिवाड़ी में सांतलका गांव की आ रही थी।

लोकेशन के आधार पर भिवाड़ी पुलिस की डीएसटी टीम ने महावीर और मंजा कुमार को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने 17 अक्टूबर की रात आरोपियों से सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

18 अक्टूबर को पुलिस दोनों आरोपियों महावीर और मंजा कुमार, बच्चों के माता-पिता ज्ञान सिंह व उर्मिला को लेकर दिल्ली पहुंची। आरोपियों की निशानदेही पर महरौली के जंगल में बच्चों की डेड बॉडी मिल गई। जिंदा बचे 8 वर्षीय शिवा को भिवाड़ी पुलिस महरौली थाने से लिया।

19 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने विपिन व अमन के पोस्टमॉर्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिए। परिजन शवों को यूपी बॉर्डर स्थित एक श्मशान घाट में लेकर गए। 20 अक्टूबर की दोपहर बच्चों का अंतिम संस्कार दिल्ली में ही कर दिया गया।

पुलिस कार्रवाई करती तो बच्चे जिंदा होते
दिल्ली में ज्ञान सिंह बच्चों के शव देख बिलख पड़े। उन्होंने कहा कि शक है कि न्याय मिलेगा या नहीं। अब भिवाड़ी लौटते डर लग रहा है। बच्चों की तरह उन्हें भी मारा जा सकता है। 15 अक्टूबर को अगर पुलिस कार्रवाई करती तो बच्चे जिंदा होते। पुलिस की लापरवाही का नतीजा ये है कि आज दो बच्चे इस दुनिया में नहीं हैं।

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