30 दिन की मासूम को खेत में छोड़ा:बाजरे के खेत में किसान को मिली, पुलिस को परिजनों की तलाश

नीमराना (अलवर)2 महीने पहले

महज 30 दिन की नवजात मासूम को कोई बाजरे के खेत में लावारिस छोड़ गया। गुरुवार सुबह फसल की कटाई के दौरान कुछ किसानों ने बच्ची को देखा तो तुरंत सरपंच और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद मासूम को अस्पताल लाया गया। मासूम फिलहाल स्वस्थ है। मामला अलवर के शाहजहांपुर का है। जहां बाजरे के खेत में नवजात पड़ी मिली।

जानकारी के अनुसार सानौली गांव में ईश्वरीसिंहपुरा मार्ग पर किसान वीरेन्द्र यादव अपने खेत में बाजरे की कटाई के लिए गया था। फसल कटाई के लिए उसने खेत में कुछ मजदूर भी लगा रखे थे। कटाई के दौरान इन मजदूरों को खेत में एक नवजात दिखाई दी। इसके बाद वीरेंद्र यादव ने सरपंच उषा यादव को दी। सरपंच की सूचना पर शाहजहांपुर पुलिस सानौली गांव पहुंची। पुलिस ने नवजात को शाहजहांपुर सीएचसी भर्ती कराया। जहां डॉक्टरों ने उसका चेकअप किया।

पुलिस ने नवजात को स्थानीय सीएचसी पहुंचाया, जहां प्राथमिक इलाज किया गया। डॉक्टरों ने बताया कि फिलहाल मासूम स्वस्थ है।
पुलिस ने नवजात को स्थानीय सीएचसी पहुंचाया, जहां प्राथमिक इलाज किया गया। डॉक्टरों ने बताया कि फिलहाल मासूम स्वस्थ है।

शाहजहांपुर सीएचसी प्रभारी डॉ विक्रम सिंह यादव ने बताया कि मासूम ने पानी-दूध पिया है। फिलहाल नवजात स्वस्थ है, लेकिन लावारिस हालत में छोड़ देने से बच्ची का शुगर काफी डाउन हो गया। वहीं अस्पताल की महिला कर्मचारी बबली कंवर ने लावारिस बच्ची को दूध पिलाया।

अलवर चाइल्ड केयर भेजा गया
शाहजहांपुर थाना प्रभारी विक्रम सिंह चौधरी ने बताया कि शाहजहांपुर सीएचसी से 108 एंबुलेंस के जरिए लावारिस बालिका को बहरोड़ जिला अस्पताल में ले जाया गया। इधर, पुलिस नवजात बालिका के माता-पिता की जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है। मामले को लेकर शाहजहांपुर पुलिस आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से आसपास के इलाके में डिलीवरी केस के बारे में पता कर रही है।

1 महीने की मासूम नवजात बच्ची जिसे कोई बाजरे के खेत में छोड़कर चला गया।
1 महीने की मासूम नवजात बच्ची जिसे कोई बाजरे के खेत में छोड़कर चला गया।

कपड़ों में लिपटी इधर-उधर देख रही थी मासूम
बच्ची को सबसे पहले बाजरा कटाई करने गई पुष्पा देवी पत्नी दलीप सिंह और संतोष देवी पत्नी मुकेश यादव ने देखा। दोनों ने बताया कि बालिका अच्छे तरीके से कपड़े पहनाकर कपड़े से लपेट कर लिटाया हुआ था। उसने आंखें खोल रखी थी और इधर, उधर देख रही थी। अकेली होने के बावजूद व रो नहीं रही थी। बाद में जब उसे गोद में उठाया गया तो वह रोने लगी।