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पिचकारी से चाइना बाहर:​​​​​​​अलवर के बाजार में 100 प्रतिशत मेड इन इंडिया पिचकारी, दो साल पहले 70 प्रतिशत से ज्यादा बाजार चीन का था

अलवर3 महीने पहले
अलवर के होपसर्कस पर पिचकारी की दुकान पर खरीददारी करते लोग।

होली की पिचकारी से चाइना बॉर्डर से बाहर हो चुका है। खासकर अलवर जिले में। यहां होली पर करीब 3 से 4 करोड़ रुपए का पिचकारी का बाजार होता है। दो साल में इतना बड़ा बदलाव हो गया कि बाजार में चाइना की पिचकारी गायब हो गई है। अब ज्यादातर पिचकारी मेड इन इंडिया है। दुकानदारों के अनुसार तो 100 प्रतिशत अलवर सहित राजस्थान के बाजार में मेड इन इंडिया की पिचकारी का कब्जा हो गया है।

दो साल पहले 70 प्रतिशत पर चाइना का कब्जा
अलवर के होपसर्कस के प्रमुख व्यापारी अनिल ने बताया कि दो साल पहले अलवर के बाजार में होली पर बिकने वाली 70 प्रतिशत पिचकारी मेड इन चाइना थी। अब मेरी दुकान पर कोई आइटम चाइना का नहीं है। अधिकतर दिल्ली से बनी पिचकारी है। यह बड़ा बदलाव हुआ है।

अलवर शहर में होपसर्कस पर गुलाल बेच रहा दुकानदार।
अलवर शहर में होपसर्कस पर गुलाल बेच रहा दुकानदार।

कोरोना खा गया करोड़ों का बाजार
व्यापारी अनिल का कहना है कि यह बड़ा अच्छा हुआ कि मेड इन इंडिया का आइटम बाजार में पहुंच गया है। अब चीन का आइटम बेचने की जरूरत नहीं पड़ रही। लेकिन, दो साल में कोरोना पूरे बाजार को खा गया। 50 प्रतिशत भी बिक्री नहीं हो रही है जिससे स्टॉक भरा रह गया। इस बार जरूर कुछ बिक्री बढ़ी है। लेकिन, कोरोना से पहले की तुलना में बाजार आधा भी नहीं है। पिचकारी के आइटम में कोई फायदा नहीं हो रहा।

इंडियन पिचकारी ठोस
दुकानदारों ने यह भी कहा कि मेड इन इंडिया की पिचकारी व होली के अन्य आइटम चाइना की तुलना में अधिक मजबूत हैं। गुणवत्ता अच्छी है। धीरे-धीरे आइटम की संख्या भी बढ़ रही है। जिसके कारण ग्राहक को भी पसंद आते हैं। यह बड़ा बदलाव हुआ है, जिसे देखकर लगता है। भारत की जरूरत को भारत ही पूरा कर सकता है।

दुकानदारों का उद्योगपतियों को सुझाव
दुकानदार अनिल व विनय ने कहा कि हम होली के आइटम बेचते हैं। चीन व भारत के आइटम को समझा है, जिसके आधार पर इतना कह सकते हैं कि भारत के उद्योगपतियों को सूझबूझ से काम लेने की जरूरत है। एक उद्योगपति जिस आइटम को बनाने की फैक्ट्री लगाता है। दूसरे उद्यमी को दूसरी तरह के आइटम बनाने चाहिए। ताकि बाजार में उनकी मांग बनी रहे। अभी यह हो रहा है कि एक जैसा उत्पाद कई फैक्ट्रियों में बनने लग गया। जिसके कारण सबका माल बिकना संभव नहीं है।

चीन के आइटम अलग-अलग
दूसरी और चीन से अनेक प्रकार के अलग-अलग आइटम बाजार में आते थे। वहां एक फैक्ट्री में अलग तो दूसरी में अलग ही आइटम बनते हैं। जिससे बाजार में उनको ग्राहक आसानी से मिल जाते थे।