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कोतवाली थाना क्षेत्र में लॉकडाउन का 9वां दिन:सराफा की 175 और कपड़े की 365 दुकानें नहीं खुल रही, व्यापारी बोले- मुश्किल घड़ी में सरकार भी साथ नहीं दे रही

अलवरएक महीने पहले
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  • कई दुकानदार आर्थिक संकट का सामना कर रहे, राहत पैकेज की मांग

काेतवाली थाना क्षेत्र में शुक्रवार काे लाॅकडाउन का 9वां दिन था। शहर के प्रमुख बाजार इसी क्षेत्र में हैं। लॉकडाउन के कारण सराफा की 175 और कपड़े की करीब 365 दुकानें बंद हैं। व्यापारियों का कहना है कि मुश्किल घड़ी में सरकार भी हमारा साथ नहीं दे रही है। लाॅकडाउन काेराेना से मुक्ति का उपाय नहीं हाे सकता। यह महामारी तभी खत्म हाेगी, जब लोग गाइड-लाइन की पालना करेंगे। अभी तो कारोबार बंद होने से व्यापारियों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। व्यापारियों ने सरकार से आर्थिक पैकेज देने की मांग की है। बाजार बंद करना महामारी रोकने का उपाय नहीं: सराफा व्यापार कमेटी के अध्यक्ष सत्यनारायण खंडेलवाल का कहना है कि लाॅकडाउन के कारण सराफा व्यवसाय पूरी तरह चाैपट हाे गया है। काेराेना महामारी की राेकथाम का उपाय यदि बाजार बंद करना ही हाेता ताे अब तक अलवर में काेराेना खत्म हो जाता। पहले पूरे जिले में लाॅकडाउन हुआ था, तभी भी कारोबार ठप रहा। अब काेतवाली क्षेत्र में लॉकडाउन है।

इसके बावजूद हर दिन काेराेना के नए मामले आ रहे हैं। प्रशासन काे इस बात काे समझना हाेगा कि लाॅकडाउन के कारण आर्थिक नुकसान हाे रहा है। आने वाले दिनाें में दिवाली समेत अन्य त्योहार हैं। देव उठनी एकादशी से शुरू हाेने वाले सावाें पर भी असर पड़ेगा। उन्हाेंने बताया कि लाॅकडाउन वाले एरिया में 175 सराफा और ज्वैलर्स की दुकानें हैं। इस व्यवसाय से जुड़े करीब 355 परिवार प्रभावित हैं।

छूट के बावजूद पुलिस फल की ठेली नहीं लगाने देती
ठेली पटरी यूनियन के अध्यक्ष रमेश नारवानी का कहना है कि लाॅकडाउन के कारण सबसे अधिक प्रभावित ठेली पटरी वाले हुए हैं। करीब 1175 परिवार प्रभावित हैं। आर्थिक तंगी के कारण परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हाे रहा है। जिला प्रशासन द्वारा छूट दिए जाने के बाद भी पुलिस वाले फल की ठेली नहीं लगाते देते। ठेली पटरी वाले गरीब तबके लाेग हैं। सरकार काे हमारी आर्थिक मदद करनी चाहिए।

दुकानाें का किराया व बिजली का बिल हाे माफ
थाेक वस्त्र व्यापार कमेटी के अध्यक्ष महेश सेठी का कहना है कि त्याेहार और शादियाें के सीजन में अच्छा व्यापार हाेता था, जाे काेराेना की भेंट चढ़ गया। बार-बार लाॅकडाउन होने से कपड़ा व्यवसायी कंगाली की कगार पर आ गया है। आय नहीं हाेने से दिन प्रतिदिन पारिवारिक स्थिति खराब हाे रही है। जिनकी दुकानें किराए की हैं, वाे कहां से किराया चुकाएगा, बिजली के बिल कैसे भरेगा? व्यापारी तनाव में हैं।

पहले जब लाॅकडाउन के बाद दुकानें खुली ताे ग्राहक काेराेना से डर के कारण खरीदारी के लिए घर से बाहर नहीं निकला। सरकार से मांग है कि दुकानाें का किराया और बिजली के बिल माफ हाें और बैलेंस शीट के आधार पर बिना ब्याज के लाेन दिया जाए, जिससे व्यापारी काे संभलने का माैका मिले। सेठी का कहना है कि लाॅकडाउन वाले एरिया में कपड़े की करीब 365 दुकानें हैं। इस व्यवसाय से जुड़े करीब 730 परिवार लाॅकडाउन के कारण आर्थिक तंगी से परेशान हैं।

मिठाई की करीब 155 दुकानें बंद, परिवार चलाना मुश्किल
हलवाई विकास समिति के अध्यक्ष अशाेक तनेजा का कहना है कि लाॅकडाउन के कारण व्यापार चाैपट हाे गया है, बेराेजगारी बढ़ी है। ऑनलाइन व्यापार भी नहीं हाे रहा है। मिठाई की दुकान करने वालाें काे परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हाे रहा है। लाॅकडाउन वाले एरिया में मिठाई की करीब 155 दुकानें हैं।

नाइयों की मांग-हर महीने मिले 20-20 हजार आर्थिक मदद
जिला बारबर केश कला केंद्र के जिला महामंत्री सीताराम सैन का कहना है कि लाॅकडाउन के कारण दुकानें बंद हैं। लाॅकडाउन वाले एरिया में फुटपाथ पर कुर्सी लगाकर बाल कटिंग व शेविंग करने पर राेक है। बाल कटिंग के व्यवसाय से जुड़े प्रत्येक परिवार काे हर महीने 20-20 हजार रुपए की आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए।

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