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14 महीने में नहीं आई दूध की कमी:काेराेनाकाल में 2 हजार 957 बच्चाें काे मदर मिल्क बैंक से नसीब हुआ मां का दूध

अलवर6 दिन पहले
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मदर मिल्क बैंक में दूध का रखरखाव करती कर्मचारी। - Dainik Bhaskar
मदर मिल्क बैंक में दूध का रखरखाव करती कर्मचारी।
  • महामारी के 14 महीने के दाैरान 1914 माताओं ने 5636 बार में 698 लीटर दूध किया दान

मां ने बच्चाें के प्रति अपनी ममता काे काेराेनाकाल में भी साबित कर दिया है। महामारी की दूसरी लहर में अलवर शहर के सभी ब्लड बैंकाें में खून की कमी आ गई और समाज व संस्थाओं काे शिविर लगाकर स्थिति सुधारनी पड़ी, लेकिन महिला अस्पताल के आंचल मदर मिल्क बैंक में माताओं ने नवजात बच्चाें काे दूध की कमी नहीं आने दी, अपितु काेराेनाकाल के 14 महीनाें में प्रतिदिन औसतन अधिक दूध दानकर 2957 बच्चाें की जान बचाई है।

ये वे बच्चे हैं, जिन्हें बीमार हाेने, मां की माैत, प्री मैच्याेर जन्म या मां के स्तनपान कराने में सक्षम नहीं हाेने पर मां का दूध नसीब नहीं हाे पाया। 9 सितंबर 2016 काे शुरू हुए मदर मिल्क बैंक में अब तक औसतन प्रतिदिन 1617 एमएल दूध दान हुआ है। अगर सिर्फ काेराेनाकाल पर नजर डालें ताे माताओं ने प्रतिदिन औसतन 1639 एमएल दूध दान किया है। काेराेना संक्रमण के ये वे हालात थे, जब महिला अस्पताल में प्रसूताओं की संख्या कम थी और लाेग घराें से अस्पताल जाने में डर रहे थे।

लेकिन दूध दान करने वाली माताओं की कमी नहीं आई। इस बैंक में 9 सितंबर 2016 से 31 मई 2021 तक 9489 माताओं ने 2803 लीटर दूध दान किया, जबकि काेराेनाकाल के 14 महीने में 1914 माताओं ने 698.45 लीटर दूध दान किया है। काेराेनाकाल में बच्चाें के लिए दूध की खपत भी अधिक थी, क्याेंकि संक्रमण के कारण माताएं अस्पताल की एफबीएनसी में भर्ती बच्चाें काे दूध नहीं पिला पा रही थी।

प्रदेश के जिला अस्पतालाें में पहला मदर मिल्क बैंक
अलवर का मदर मिल्क बैंक प्रदेश के जिला अस्पतालाें का पहला बैंक है, जिसे प्रदेश में माॅडल के रूप में पहचाना गया। दूसरे जिलाें में शुरू हुए मदर मिल्क बैंक के स्टाफ काे ट्रेनिंग भी अलवर में ही दी गई। इस मदर मिल्क बैंक से अजमेर के लिए कई बार 500-500 यूनिट दूध की आपूर्ति की गई है और अपने अस्पतालाें में भर्ती बच्चाें की भी पूर्ति की गई है। इस बैंक की करीब एक हजार यूनिट दूध की क्षमता है।​​​​​​​

9 सितंबर 2016 से 31 मई 2021 तक 2803 लीटर दूध दान

  • 9489 माताओं ने 23409 बार में आकर 2803 लीटर (2803070 एलएल) दूध दान किया है।
  • 12235 नवजात बच्चाें काे 88269 यूनिट (प्रति यूनिट 30 एमएल) दूध देकर लाभान्वित किया है।
  • 11535 बच्चे गीतानंद शिशु अस्पताल, 547 बच्चे निजी अस्पताल और 153 समुदाय के बच्चाें काे लाभान्वित किया।
  • 18293 माताओं काे 45918 बार मिल्क बैंक में सर्विस सिटिंग देकर स्तनपान में सक्षम बनाया।
  • 73620 माताओं काे स्तनपान के लिए काउंसलिंग कर प्रेरित किया।

काेराेनाकाल के 14 महीने में यह रही स्थिति

  • 1914 माताओं ने 5636 बार में आकर 698.45 लीटर (698450 एमएल) दूध दान किया।
  • 2957 नवजात शिशुओं काे 23258 यूनिट (प्रति यूनिट 30 एमएल) दूध देकर लाभान्वित किया।
  • 2804 बच्चे गीतानंद शिशु अस्पताल, 130 बच्चे निजी अस्पताल और 27 बच्चाें काे समुदाय में दूध देकर लाभान्वित किया।
  • 3897 माताओं काे 11511 बार मिल्क बैंक में सर्विस सिटिंग देकर स्तनपान में सक्षम बनाया।
  • काेराेना महामारी में 20733 माताओं काे काउंसलिंग कर स्तनपान के लिए प्रेरित किया।

समुदाय से सक्षम माताएं दूध दान करने आएं
जागरूक महिलाओँ ने काेराेना संक्रमण के बावजूद बच्चाें के लिए दूध की कमी नहीं आने दी और मदर मिल्क बैंक पहुंचकर दूध दान किया लेकिन समुदाय से भी दूध दान करने में सक्षम माताएं मदर मिल्क बैंक में दूध दान करने जरूर आएं, जिससे अस्पतालाें में भर्ती बीमार बच्चाें काे दूध की आपूर्ति बरकरार रखी जा सके और अधिकाधिक बच्चे लाभान्वित हाे सकें।
-डाॅ. अमनदीन, मदर मिल्क बैंक प्रभारी, अलवर

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