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जनता के पैसाें की बर्बादी:46 लाख रुपए के 2 वाहन बिना चले ही कबाड़, अब 33 लाख रु. का एक और वाहन आ गया

अलवर14 दिन पहलेलेखक: बृजमोहन शर्मा
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  • नए काॅम्पेक्टर वाहन के उपयाेग की संभावना भी नहीं, क्याेंकि नप ने सफाई का ठेका दे रखा है

करीब बारह साल पहले शहर में कचरा उठाने के लिए आए दाे काॅम्पेक्टर वाहन एक भी दिन नहीं चले और कबाड़ हाे गए। इन वाहनाें की कीमत 46 लाख रुपए थी। डीजल के वाहन हाेने के कारण अब ये वाहन उस श्रेणी में आ गए हैं, जाे सड़क पर चलाए नहीं जा सकते। इस बीच, जयपुर से स्वायत्त शासन विभाग ने एक और काॅम्पेक्टर वाहन अलवर नगर परिषद काे भेज दिया है।

इसकी कीमत 33 लाख रुपए से ज्यादा है। खास बात यह है कि अब जाे नया काॅम्पेक्टर वाहन आया है, उसका उपयाेग भी निकट भविष्य में हाेता नजर नहीं आ रहा है। इसके दाे कारण हैं। पहला कारण-नगर परिषद ने शहर में सफाई का ठेका दे रखा है। इसलिए परिषद काे अपने वाहन से कचरा उठाने की जरूरत नहीं है। दूसरा कारण-इस वाहन के लिए जिस तरह के कचरा पात्र चाहिए, वे नगर परिषद के पास हैं ही नहीं। इन हालाताें में नया काॅम्पेक्टर वाहन भी बिना उपयाेग के कबाड़ बन सकता है।

इससे पहले दाे काॅम्पेक्टर वाहन 2009 में आरयूआईडीपी के माध्यम से अलवर भेजे गए थे। ये दाेनाें वाहन शहर की सड़काें पर कभी कचरा उठाते नजर नहीं अाए। दाेनाें वाहन खड़े खड़े ही कंडम हाे गए। इसी महीने डीएलबी ने एक और काॅम्पेक्टर खरीदकर अलवर नगर परिषद काे भेजा है। नगर परिषद ने इसकी डिमांड भी नहीं की थी।

12 साल पहले कचरा उठाने के लिए नगर परिषद में आए थे दाे काॅम्पेक्टर वाहन

दिसंबर 2009 में शहर में अच्छी सफाई व्यवस्था के लिए आरयूआईडीपी के जरिए दाे काॅम्पेक्टर वाहन इसलिए खरीदकर दिए गए थे कि शहर का कचरा उठाकर ये वाहन डंपिंग यार्ड तक ले जा सकें। इसके लिए कचरा पात्र भी दिए गए थे। नगर परिषद ने इन वाहनाें का कभी उपयाेग ही नहीं किया, क्याेंकि कचरा उठाने की व्यवस्था नगर परिषद के पास नहीं रही थी। ठेके पर कचरा उठाने की व्यवस्था चलती रही। खरीद के बाद से ही ये वाहन खड़े खड़े खराब हाे गए। इनके शीशे टूट गए। ड्राइवर का केबिन बदहाल हाे गया। अब ये वाहन कबाड़ बन चुके हैं। उस समय अाए एक काॅम्पेक्टर वाहन की कीमत 23.17 लाख रु. थी।

काॅम्पेक्टर वाहनाें से हाेता यह लाभ : काॅम्पेक्टर वाहन शहर में चलते ताे कचरा बिना बिखरे ही डंपिंग यार्ड तक पहुंचता। ठेकेदाराें के ट्रैक्टराें व नगर परिषद के अाॅटाे टिपराें में जिस प्रकार से बिना ढके कचरा ले जाया जाता है, वह हवा में उड़ता हुअा सड़काें पर बिखरता रहता है। इससे प्रदूषण फैलता है। काॅम्पेक्टर कचरा उठाकर ले जाने वाला एेसा वाहन है जिससें कचरा दबा-दबाकर अधिक मात्रा में भरा जा सकता है। इसमें कचरा पूरी तरह ढका रहता है।

बुधविहार फायर स्टेशन में खड़े हैं दाेनाें कबाड़ काॅम्पेक्टर वाहन : 2009 मे आए काॅम्पेक्टर वाहनाें ने कंपनी से नप के पुराना सूचना केंद्र व इसके बाद पुराना सूचना केंद्र से अंबेडकर नगर फायर स्टेशन और वहां से बुध विहार फायर स्टेशन तक की दूरी ही तय की है। ये बुध विहार फायर स्टेशन में खड़े हैं।

अब सवा कराेड़ रुपए के 4 वाहन आए : इसी 20 मार्च काे नगर परिषद के पास एक काॅम्पेक्टर सहित 4 वाहन जयपुर से आए हैं। इनमें एक सीवर साफ करने की बड़ी जेटिंग मशीन व दाे छाेटी मशीन शामिल हैं। इनमें कांम्पेक्टर की कीमत 33.39 लाख रुपए है। बडी जेटिंग मशीन की 51.21 लाख रुपए तथा दाे छाेटी जेटिंग मशीन की कुल कीमत 39.16 लाख रुपए है।

नगर परिषद ने किसी भी प्रकार से डीएलबी से काॅम्पेक्टर वाहन की डिमांड नहीं की थी। जयपुर से ये वाहन भेजा गया है। पहले दाे काॅम्पेक्टर वाहन खड़े खड़े ही खराब हाे गए हैं। -प्रभुदयाल, एईएन एवं प्रभारी माेटर गैराज शाखा, नप

दाे काॅम्पेक्टर वाहन हमारे पास पहले थे। इनका उपयाेग उस समय क्याें नहीं हाे सका, इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता। मैंने आकर इन्हें चलाने के बारे में जानकारी ली ताे पता लगा कि इन वाहनाें की स्थिति अब चलाने लायक नहीं है। साथ ही शहर में 10 साल से पुराने डीजल के वाहन चलाने पर पाबंदी है। इसलिए नहीं चलाए गए। अब नए वाहन का उपयाेग हाेगा। इससे शहर का कचरा उठाया जाएगा। -साेहन सिंह नरूका आयुक्त, नगर परिषद

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