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प्रशासन की लापरवाही:जन तक नहीं पहुंचे गहलोत सरकार के 2.67 लाख जन आधार कार्ड, क्योंकि अफसरों ने ई-मित्रों को चिट्‌ठी भेज पल्ला झाड़ा

अलवर8 महीने पहले
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  • सरकार ने लाखों रुपए खर्च किए थे इन्हें बनाने में : प्रदेश में भाजपा सरकार जाने के बाद भामाशाह कार्ड से पूर्व सीएम की फोटो हटाकर मौजूदा सरकार ने बनाए थे नए कार्ड, पर सिस्टम की कमी से उलझ गए

राज्य सरकार का जन आधार कार्ड। लगभग हर सरकारी याेजना में महत्वपूर्ण माना जाने वाला यह कार्ड अब सरकारी सिस्टम में उलझकर रह गया है। गहलोत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का यह कार्ड अधिकारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ा हुआ है। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का फोटो हटाने के बाद गहलोत सरकार ने भामाशाह कार्ड को जन आधार कार्ड में तब्दील किया था।

जन आधार कार्ड के वितरण के लिए सरकार ने ई-मित्रों को चुना था, लेकिन प्राॅपर मॉनिटरिंग नहीं हो पाने के कारण वर्तमान में 2.67 लाख कार्ड जिले के विभिन्न ई मित्रों की टोकरी में पड़े हुए हैं और आमजन को आज भी अपने जन आधार कार्ड का इंतजार है। मजबूरी में लाेगाें काे ई-मित्राें पर पैसे देकर जन आधार कार्ड बनवाना पड़ रहा है। जन आधार कार्ड नहीं हाेने पर विभिन्न याेजनाओं में आवेदन में परेशानी आ रही है।

जिले के ग्रामीण क्षेत्राें में अभी तक 3 लाख 958 और शहरी क्षेत्राें में 3 लाख 23 हजार 809 जन आधार कार्ड ही बांटे गए हैं। ये कार्ड एक अप्रैल 2020 से बांटे जा रहे हैं। दरअसल, राज्य की कांग्रेस सरकार ने पूर्व में संचालित भामाशाह कार्ड को बदलकर जन आधार कार्ड कर दिया था। इसमें लगभग सभी बातें समान थी, केवल कार्ड का स्वरूप बदला गया था।

कार्ड बदलने के बाद जिन लाेगाें के भी भामाशाह कार्ड बने हुए थे, उन्हें नया जनाधार कार्ड प्रिंट कराकर देने की जिम्मेदारी सरकार की थी। सरकार ने इन कार्डों को सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग को भिजवा दिया और कार्ड धारकों को मैसेज भी कर दिए। विभाग द्वारा इन कार्डों का वितरण ई मित्रों द्वारा कराया जाना था, लेकिन अभी भी 2.67 लाख कार्डों का वितरण नहीं हुआ है। करीब 68 प्रतिशत कार्डों का ही वितरण हुआहै। इससे लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कार्ड नहीं मिलने पर लाेगाें काे खर्च करने पड़ रहे पैसे, सरकारी याेजनाअाें के अावेदन में परेशानी

यह है कार्डों के वितरण की स्थिति

ब्लॉक ई-मित्रों पर पड़े कार्ड
बानसूर 15407
बहरोड़ 6446
गोविंदगढ़ 5575
कठूमर 12395
किशनगढ़ 7026
कोटकासिम 5911
लक्ष्मणगढ़ 6816
मुंडावर 7200
मालाखेड़ा 7415
नीमराना 7101
राजगढ़ 6110
रामगढ़ 9466
रैणी 11704
थानागाजी 7979
उमरैण 6569
सरकार ने इन कार्डों के वितरण के लिए ईमित्रों को चुना था। उस समय यह तर्क था कि संबंधित गांव या वार्ड में संचालित ई-मित्रों पर इन कार्डों को रखवाया जाएगा। ई-मित्र ही ओटीपी के जरिए या अंगूठा लगवाकर आवेदक को इन कार्डों का वितरण करेंगे। इसके लिए सरकार ने ई-मित्राें काे बतौर कमीशन 5 रुपए की राशि तय की थी। इसके बावजूद अधिकारियों की कमजोर मॉनिटरिंग के चलते कार्ड नहीं बंट पाए हैं और लोगों को खुद के पैसे खर्च करके कार्ड निकलवाने पड़ रहे हैं। जिन सरकारी याेजनाओं में जनाधार कार्ड की प्रति जरूरी है, उनके आवेदन में लाेगाें काे परेशानी आ रही है।
यह अंतर था भामाशाह व जन आधार कार्ड में
पूर्व भाजपा सरकार में तत्कालीन सीएम वसुंधरा ने भामाशाह कार्ड याेजना चलाई थे। इस योजना में परिवार की मुखिया महिला को बनाया हुआ था और भामाशाह स्वास्थ्य योजना, खाद्य सुरक्षा, स्कॉलरशिप, पालनहार, राशन कार्ड, मूल निवास, जाति प्रमाणपत्र सहित सरकार के तमाम विभागों की लगभग सभी योजनाओं में आवेदन के लिए जन आधार कार्ड का होना अनिवार्य था।

गहलोत सरकार ने सत्ता में आने के बाद योजना के तमाम बिंदुओं की अनिवार्यता को ज्यों का त्यों रखा, सिर्फ कार्ड का रंग बदल दिया और अब इस कार्ड पर किसी का भी फोटो प्रिंट नहीं कराया। भामाशाह कार्ड में पहले अंग्रेजी वर्णमाला के नंबरों के जरिए काम होता था। अब जन आधार कार्ड में अंकों के अनुसार काम होता है।
शहरी क्षेत्रों में अवितरित कार्ड

अलवर 8755
भिवाड़ी 1020
खेड़ली 1133
किशनगढ़बास 516
खैरथल 990
राजगढ़ 1334
तिजारा 1069
लोगों ने पहले ई मित्र प्लस मशीनों के जरिए इन कार्डों को डाउनलोड कर प्रिंट कर लिया था। अब तो उन्हें बुला-बुलाकर कार्ड देने पड़ रहे हैं। सरकार बार-बार मैसेज भी कर रही है। पटवारी, ग्रामसेवक सहित कई माध्यमों से प्रचार करवाकर कार्डों का वितरण करवा रहे हैं।
वीरेंद्र त्यागी, उपनिदेशक, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग

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