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अभिभावक बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित:नर्सरी-केजी के 45 हजार बच्चाें ने नहीं देखा स्कूल, टीचर काे भी माेबाइल स्क्रीन पर देखा

अलवर18 दिन पहलेलेखक: मनोज गुप्ता
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एक्सपर्ट - डाॅ. शैलेंद्र भाटी, सह आचार्य मनाेविज्ञान - Dainik Bhaskar
एक्सपर्ट - डाॅ. शैलेंद्र भाटी, सह आचार्य मनाेविज्ञान
  • सरकारी स्कूलाें के 36 हजार बच्चे भी घरों में कैद, अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं

सूर्य नगर निवासी वीरेंद्र ने नवंबर 2019 में अपने बेटे का नर्सरी में एडमिशन करवाया। अप्रैल 2020 में बेटे को पहली बार स्कूल जाना था, लेकिन कोरोना के कारण बेटा पूरा साल स्कूल नहीं जा पाया। ऑनलाइन क्लास में बेटे की मम्मी को भी साथ बैठना पड़ा।

इस साल उम्मीद थी कि स्कूल खुलेंगे, लेकिन अभी भी लाॅकडाउन के कारण स्कूल बंद है। इसी तरह कालाकुआं निवासी पंकज शर्मा ने भी बेटे का एडमिशन कराने के बाद फीस जमा कर दी, लेकिन कोरोना के कारण बच्चा स्कूल नहीं जा पाया। अब घर में थोड़ा बहुत पढ़ा रहे हैं, ताकि गैप के बाद बच्चा स्कूल जाए तो पढ़ाई में पीछे ना रह जाए।

स्कूल संचालक बोले-ओवरऑल बच्चों का जो डवलपमेंट स्कूल में होता है, वह नहीं हो पा रहा
स्टाफ राेजाना बच्चाें काे ऑनलाइन क्लास दे रहा है। इसकी मैनेजमेंट लेवल पर माॅनिटरिंग की जा रही है। राेजाना उपस्थिति हाेती है, जाे बच्चा अनुपस्थित रहता है, उसके अभिभावकाें से बात की जाती है। कुल मिलाकर जाे हालात हैं, उसके हिसाब से बच्चाें की पढ़ाई करवा रहे हैं। अभिभावकाें का भी पूरा सपोर्ट मिल रहा है। यह ठीक है कि स्कूल में आकर क्लास में बच्चे का जो विकास होता, अभी उसमें कमी है। दूसरे बच्चों के साथ आना-जाना, खाना, बैठना, पढ़ना भी बहुत कुछ सिखाता है। - निमिषा, निदेशक, सिल्वर ओक स्कूल

पिछले साल जो एडमिशन हुए थे, उन बच्चों ने भी टीचर्स को ऑनलाइन ही देखा था। इस साल भी ऐसी ही स्थिति बन रही है। जो समझदार पेरेंट्स हैं, वे ऑनलाइन ही पढ़ा रहे हैं। टीचर्स भी इनोवेटिव तरीके से पढ़ा रहे हैं। लेकिन ओवरऑल बच्चों का जो डेवलपमेंट स्कूल में होता है, वह नहीं हो पा रहा है।
- डाॅ. संकेत यादव, निदेशक, देहली पब्लिक वर्ल्ड स्कूल
एक्सपर्ट कमेंट्स : अभी खेल-खेल में जो सिखा सकते हैं, वहीं सिखाएं। पहले ताे हमारे बड़े बुजुर्ग हमें सिखाते थे, वहीं फार्मूला अभी भी अपनाएं। माता-पिता बच्चों को चीजों को महसूस करने दें। बस नजर रखें। यह ठीक है कि अभी हम उसे फिसलपट्टी पर तो भेज नहीं सकते। गिनती, अक्षर ज्ञान, फल-सब्जी इसका ज्ञान दें। यही बहुत है उसके लिए। बच्चे की नेचुरल ग्राेथ के लिए यह जरूरी है।
- डाॅ. शैलेंद्र भाटी, सह आचार्य मनाेविज्ञान

आगे क्या? : एक्सपर्ट तीसरी लहर के लिए चेता रहे हैं कि इससे बच्चाें काे ज्यादा खतरा हाे सकता है। फिलहाल स्माइल प्राेजेक्ट के जरिए ही अधिक से अधिक बच्चाें काे शिक्षकाें व पढ़ाई से जाेड़ने का प्रयास है और इसी काे ज्यादा बूस्ट किया जा रहा है। इसके अलावा सरकार जाे भी आदेश देती है, उनकी पालना के लिए विभाग का प्रत्येक कार्मिक याेजना के साथ तैयार है।
- नेकीराम, डीईओ एलीमेंट्री

​​​​​​​सत्र 2019-20 :

  • सरकारी स्कूलाें में पहली क्लास में बच्चाें की संख्या- 36497
  • निजी स्कूलाें में प्री प्राइमरी में बच्चाें की संख्या- 45012
  • अन्य स्कूलाें में पहली क्लास में बच्चाें की संख्या- 1578

सत्र 2020-21 :

(नोट- इस सत्र का निजी स्कूलाें का डाइस अपलाेड का काम अभी चल रहा है इसलिए आकड़ाें में परिवर्तन संभव है)

  • सरकारी स्कूलाें में पहली क्लास में बच्चाें की संख्या- 30086
  • निजी स्कूलाें में प्री प्राइमरी में बच्चाें की संख्या- 24106
  • अन्य स्कूलाें में पहली क्लास में बच्चाें की संख्या- 794
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