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पटरी पर लौटती जिंदगी:एमआईए की 700 में से 650 इकाइयां फिर शुरू, मांग कम हाेने से 70% तक ही उत्पादन

अलवर2 महीने पहले
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  • काेराेना के कारण कई इकाइयाें के उत्पाद अभी देश में डिमांड वाले शहराें में नहीं पहुंच पा रहे

लाॅकडाउन के बाद हुए अनलाॅक में मत्स्य औद्याेगिक क्षेत्र में अधिकांश इकाइयाें में काम शुरू हाे गया है। फिर भी कई इकाइयां अभी अपनी पूरी क्षमता से उत्पादन नहीं कर पा रही हैं। ऐसी इकाइयाें काे अपने उत्पाद की मांग में कमी हाेने के कारण कम उत्पादन करना पड़ रहा है। रीकाे के अधिकारियाें के अनुसार इस समय औद्याेगिक क्षेत्र में स्थापित करीब 700 में से 650 से अधिक इकाइयाें में उत्पादन शुरू हाे गया है। बाकी कंपनियां पहले से ही बंद हैं। लाॅकडाउन से पहले जैसा काम शुरू हाे गया है। हालांकि उत्पादन अभी 60 से 70 प्रतिशत तक ही हाे रहा है। मत्स्य उद्याेग संघ के पदाधिकारियाें का कहना है कि एमआईए में कुछ ऐसी इकाइयां है, जिनके उत्पाद की पूरी मांग हाेने के कारण उनमें 100 प्रतिशत तक उत्पादन हाे रहा है। निर्माण संबंधी सामग्री, कैमिकल व मिनरल पाउडर की डिमांड कम हाेने से इनमें 50 प्रतिशत तक ही उत्पादन हाे रहा है।

इसका कारण है जिन क्षेत्राें में इनके उत्पाद की मांग है, वहां काेराेना के कारण अनेक इलाके बंद हैं। दिल्ली और मुंबई जैसे महानगराें सहित अन्य बड़े शहराें से इन कंपनियाें के उत्पाद की डिमांड नहीं आ रही है। इसलिए ऐसी इकाइयाें काे अपना काम धीमा करना पड़ा है। इसके अलावा अब एमआईए में श्रमिकाें की समस्या भी नहीं है। इकाइयाें काे जरूरत के अनुसार श्रमिक मिल रहे हैं। लाॅकडाउन हाेने पर घराें काे चले गए श्रमिक भी लाैटने लगे हैं।

^एमआईए में सभी इकाइयाें ने काम शुरू कर दिया है। काेराेना के कारण कई औद्याेगिक इकाइयाें के उत्पाद की मांग देश के विभिन्न स्थानाें से कम हाे रही है। इस कारण ये इकाइयां अपनी क्षमता के अनुसार उत्पादन नहीं कर पा रही हैं। इस बारे में कई उद्याेगाें की शिकायत भी है। वैसे औद्याेगिक क्षेत्र में धीरे धीरे गति आ रही है।
-माेहन निहालानी, अध्यक्ष, मत्स्य उद्याेग संघ

^एमआईए में लेबर भी लाैटने लगी है। हम भी इकाइयाें में काेविड संबंधी नियमाें की देखरेख कर रहे हैं, वहां पालना हाे रही है। उत्पादन अभी पूरी क्षमता से नहीं हाे रहा है।
-आदित्य शर्मा, वरिष्ठ महाप्रबंधक, रीकाे

​​​​​​​क्या कहते हैं औद्याेगिक इकाइयाें के प्रमुख
कैमिकल इकाई लार्ड्स क्लाेराे के महाप्रबंधक (वाणिज्यिक) केएन पुन्नी ने बताया कि उत्पादन से जुड़े डिपार्टमेंट में हमारा पूरा कुशल स्टाॅफ लगा हुआ है। हमारे यहां किसी प्रकार की समस्या नहीं है। उत्पाद की डिमांड हाे ताे हम तुरंत पूरा कर सकते हैं। फिलहाल जिन क्षेत्राें में हमारे उत्पाद की मांग हाेती है, वहां काेराेना का प्रभाव अधिक हाेने के कारण आने जाने का प्रतिबंध लगा है।

वहां राेक हाेने के कारण किसी प्रकार की मांग नहीं हाे रही है। इसका असर यह हाे रहा है कि हमारे उत्पाद पर जितनी लागत आ रही है, उतनी कीमत नहीं मिल रही है। इसी कारण हमें अपने उत्पादन की गति काे धीमा करना पड़ रहा है। वैसे एमआईए में अधिकांश इकाइयाें में 60 प्रतिशत तक ही काम शुरू हुआ है। हैवल्स इंडिया लि. के जीएम आपरेशन आरके काजला का कहना है कि हमारे प्लांट में 100 प्रतिशत उत्पादन शुरू हाे गया है।

स्थानीय हाेने के कारण हमारी लेबर भी पूरी आ रही है। हमें काेई समस्या नहीं है। लेकिन यह बात सही है कि एमआईए में अधिकांश इकाइयां अपनी पूरी क्षमता से उत्पादन नहीं कर पा रही हैं। अभी 50 से 60 प्रतिशत तक उत्पादन ही हाे रहा है। जैन इरिगेशन के यूनिट हैड विजय सिंघवी ने बताया कि अब उनकी इकाई में काम गति पकड़ रहा है। किसी प्रकार की समस्या नहीं आ रही है। हालांकि एमआईए में अभी काम की गति धीमी ही है।

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