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लापरवाही या हत्या:प्रशासन ने अस्पताल की कोविड मान्यता रद्द कर ऑक्सीजन सप्लाई बंद कर दी, दो मरीजों की मौत

अलवर13 दिन पहले
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  • जिम्मेदारों ने कागजों में आदेश जारी कर दिए, सख्ती कर मरीजों को कहीं दूसरी जगह नहीं भेजा, अब कोई जवाब देने को तैयार नहीं

प्रशासनिक लापरवाही के चलते टपूकड़ा के एक हॉस्पिटल में दाे मरीजों काे जान गंवानी पड़ गई। मामला अंजुमन हॉस्पिटल का है। इस हॉस्पिटल काे जैसे ही प्रशासन ने ऑक्सीजन की सप्लाई राेकी ताे दाे मरीजों की सांसें रुक गई। अस्पताल में मौजूद कोविड मरीजों सहित अन्य मरीजों को अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किया गया।

इस दौरान एक मरीज की ऑक्सीजन की कमी के चलते और दूसरे की अन्य अस्पताल में शिफ्टिंग के दौरान मौत हो गई। इसकी अस्पताल प्रशासन ने पुष्टि की है, अधिकारी देर रात तक मौत की सूचना से बचते रहे। टपूकड़ा बिजलीघर के पास अंजुमन अस्पताल में चल रहे कोविड सेंटर में दोपहर को ऑक्सीजन गैस खत्म हो गई जिसके बाद करीब 29 मरीजों में से कुछ को अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

इसी दौरान एक मरीज पंकज पुत्र राजेंद्र को तिजारा से लाए थे जिसकी मौत हो गई जबकि शिफ्टिंग के दौरान अफसाना पत्नी ताहिर निवासी मायापुर की मौत हो गई। सूचना मिलने पर पहुंचे तहसीलदार ने 8 गैस सिलेंडरों की व्यवस्था की जिसके बाद मरीजों को ऑक्सीजन गैस पर रखा। मैंने कलेक्टर सहित सभी अधिकारियों से बात की : अंजुमन अस्पताल व्यवस्थापक दीन मोहम्मद ने बताया कि अचानक गैस का प्रेशर कम होने पर कलेक्टर को सूचना दी थी। व्यस्त होने के कारण उनसे बात नहीं हो पाई। अन्य अधिकारियों को सूचना दी गई कि गैस खत्म होने वाली है लेकिन गैस की व्यवस्था नहीं होने के कारण 29 मरीजों में से कुछ को अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया।

कुछ मरीजों को एम्बुलेंस में मौजूद ऑक्सीजन पर रखा गया। इसी दौरान ऑक्सीजन की कमी से एक मरीज की मौत हो गई और एक मरीज की मौत शिफ्टिंग के दौरान हो गई। संचालक का कहना है कि उनके अस्पताल को 30 अप्रैल को परमिशन मिली थी जिसके बाद कोविड सेंटर शुरू कर मरीजों को भर्ती किया था।

2 मई को उनका कोविड सेंटर ब्लॉक कर दिया गया लेकिन जब तक मरीज भर्ती कर लिए थे। तिजारा एसडीएम ने जब तक इन मरीजों के इलाज ना हो जाए तब तक कोविड सेंटर चलाने की अनुमति दी थी, लेकिन अलवर से परमिशन नहीं होने के कारण गैस सप्लाई बंद कर दी गई।

टपूकड़ा सीएससी प्रभारी विनोद विजय ने बताया कि अंजुमन अस्पताल में गैस खत्म होने के कारण 3 मरीजों को सीएससी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, दो को अलवर रैफर कर दिया गया। ऑक्सीजन की कमी सेे 2 लोगों की मौत की जानकारी नहीं है।

अधिकारी अनजान क्यों, बिना परमिशन कैसे भर्ती हा़े रहे थे मरीज

अंजुमन अस्पताल को 30 अप्रैल काे कोविड सेंटर चलाने की परमिशन मिली थी, लेकिन शिकायतों और व्यवस्थाओं की हालत देखते हुए 2 मई को सेंटर को ब्लॉक कर दिया गया था। इसके बाद अस्पताल संचालक अलवर जाकर सीएमएचओ से मिले जिन्होंने कुछ डाक्यूमेंट्स देने को कहा।

इस पर अस्पताल संचालकों ने उन्हें डाक्यूमेंट्स मुहैया कराया, लेकिन उन्हें दोबारा कोविड़ सेंटर चलाने की परमिशन नहीं मिली और यही वजह रही कि हॉस्पिटल काे ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं कराई गई और 2 लोगों को अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ा। मामले में साफतौर पर प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है।

यही नहीं जिन अधिकारियों की ड्यूटी इनकी मॉनिटरिंग थी उनके हाथ में भी कुछ नहीं है। वह पूरी तरह से लापरवाह बने हुए हैं। बिना परमिशन के चल रहे इस हॉस्पिटल में काेविड-19 के 29 मरीज भर्ती थे, इसके बावजूद प्रशासन के पास ना तो मौत की सूचना है और ना ही गैस खत्म होने की।
अंजुमन अस्पताल में गैस खत्म होने की सूचना के बाद मौके पर पहुंचा था और मौजूद मरीजों को शिफ्ट कराते हुए तुरंत 8 सिलेंडरों की व्यवस्था कराई। -द्वारका प्रसाद, तहसीलदार

जिम्मेदार अधिकारी को रात नौ बजे तक नहीं पता था अस्पताल में क्या हुआ
तिजारा एसडीएम ने कहा कि दो मई को इसकी मान्यता रद्द कर दी थी, तीन को मैं गया था और कहकर आया था कि जो मरीज भर्ती है उनका इलाज कर दो नए भर्ती मत करना। आज की घटना का मुझे नहीं पता। नौ बजे मेरे पास लिस्ट आएगी तो पता लगेगा। जब उनसे पूछा कि इन मौतों का जिम्मेदार कौन है तो कुछ साफ नहीं बोले- बस इतना कहा कल देखते है।

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