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140 से 780 तक लगने वाला टोल, अब फ्री:किसान आंदोलन के कारण नेशनल हाईवे 48 के शाहजहांपुर टोल से छोटे-बड़े सब वाहन बिना शुल्क के निकल रहे, टोलकर्मी भी भूख हड़ताल पर बैठे

अलवर2 महीने पहले
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शाहजहांपुर टोल पर भूख हड़ताल पर बैठे कर्मचारी। - Dainik Bhaskar
शाहजहांपुर टोल पर भूख हड़ताल पर बैठे कर्मचारी।

नेशनल हाइवे 48 के शाहजहांपुर टोल प्लाजा से छोटे-बड़े सब वाहन बिना टोल के सरपट दौड़ रहे हैं। जिन वाहनों को एक बार निकलने के 140 से 780 रुपए तक देने पड़ते थे, वे सब फ्री आ-जा रहे हैं। जिससे सरकार को टोल से रोजाना एक करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान होने लगा है। वहीं टोल पर काम करने वाले करीब 200 से अधिक कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। अब टोल प्लाजा पर एक तरफ किसान दूसरी तरफ टोलकर्मी आंदोलरत हैं। किसान कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर शाहजहांपुर-हरियाणा बॉर्डर पर 12 दिसम्बर 2020 से आंदोलनकर रहे हैं। अब 29 अगस्त से किसान बॉर्डर से टोल पर आ गए। यहां टोल फ्री कर दिया गया। जिसके कारण टोलकर्मी भी भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।
किसान आंदोलन से पहले 40 हजार वाहन रोज
किसान आंदोलन से पहले शाहजहांपुर टोल प्लाजा से 24 घंटे में करीब 40 हजार वाहन निकलते थे। किसान आंदोलन के बाद यह संख्या कम हुई है। लेकिन अब टोल फ्री होने के बाद वापस इधर से निकलने वाले वाहनों की संख्या काफी बढ़ गई है।

ये है टोल शुल्क की दरें।
ये है टोल शुल्क की दरें।

इस हाइवे से निकलने वाले छोटे से छोटे वाहन को 140 रुपए और भारी व बड़े वाहनों को 24 घंटे में एक से अधिक बार आने-जाने के 1165 रुपए चुकाने पड़ते हैं। बस व ट्रक को एक तरफ के 485 और एक से अधिक बार आने-जाने के 725 रुपए देने होते हैं। जबकि इससे बड़े वाहनों का शुल्क एक तरफ का 780 रुपए हैं।

9 माह से हाइवे पर आंदोलन
कृषि कानूनों के विरोध में पिछले करीब 9 महीने से हाईवे पर आंदोलनरत किसान 29 अगस्त से शाहजहांपुर टोल प्लाजा पर तम्बू तान कर बैठे हुए हैं। करनाल लाठी चार्ज मे किसान सुशील‌ काजल की मौत के बाद से किसान गुस्साए हैं। उसी दिन से किसानों ने विरोध जताते हुए शाहजहांपुर टोल प्लाजा को टोल शुल्क से फ्री करा रखा है। तभी से यहां से बिना शुल्क दिए वाहनों की आवाजाही जारी है। उसके बाद अब दो दिन से टोलकर्मियों का आंदोलन भी तेज हो गया है। उनका कहना है कि टोल बंद होने से उनकी रोजी-रोटी खत्म हो जाएगी। टोल प्रबंधक जावेद का कहना है कि कर्मचारी व किसान नेताओं के बीच कई बार बातचीत हो चुकी है। इसके बावजूद भी कोई हल निकला है। मजबूरन टोलकर्मियों को धरने पर बैठना पड़ा है।

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