लोगों की गंदगी उठाने वाली बेटी दुनिया में बढ़ाया मान:22 बच्चों को दिलाई आजादी, बोलीं- हमारे वोट नहीं, इसलिए कद्र नहीं

अलवर6 महीने पहले

बंजारा समुदाय की वो लड़की जो अपने और अपने परिवार के लिए लड़ी। पढ़ने की उम्र में सफाई की, लोगों का मैला ढोया। कन्स्ट्रक्शन साइट पर काम किया। जब स्कूल पहुंची तो यहां ऐसी परिस्थितियां बनीं कि स्कूल छोड़ने का भी दबाव आया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। अब यह बेटी साउथ अफ्रीका में बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराने का मंत्र दे रही है।

यह कहानी है अलवर जिले के थानागाजी के नीमड़ी बंजारा बस्ती में रहने वाली 17 साल की तारा बंजारा की। परिवार के हालात की वजह से तारा ने महज 8 साल की उम्र में माता-पिता के साथ सड़कों पर सफाई का काम किया। कंस्ट्रक्शन साइट्स पर ईंट उठाई। सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी लड़ती रही। वह चाहती थी कि जो हालात उसने देखे, वो कोई और बच्चा न देखे।

कहा- वोट नहीं तो आजादी नहीं
तारा ने कहा कि दुनियाभर में सरकारें बच्चों को अपने वोट का हिस्सा नहीं मानती हैं। इस कारण बच्चों को सुरक्षा मुहैया कराने का कोई प्रयास नहीं होता है। दुनिया बच्चों को अपनी जागीर समझती है, यह दुनिया वालों कि सबसे बड़ी भूल है। हर बच्चा जन्म से ही आजाद पैदा हुआ है। उसकी आजादी को उनसे कोई नहीं छीन सकता है। इसके लिए हम सब जिम्मेदार लोगों को आगे आकर प्रत्येक बच्चे को अपनी आजादी एवं खुले आसमान में सपने देखने के अवसर पैदा करने होंगे।

डरबन में अपने संबोधन में तारा ने कहा- हमें बाल श्रम खत्म करने की दिशा में विशेष काम करने की जरूरत है।
डरबन में अपने संबोधन में तारा ने कहा- हमें बाल श्रम खत्म करने की दिशा में विशेष काम करने की जरूरत है।

मैं जिस समुदाय से आती हूं, उसमें पहली स्टूडेंट
डरबन सम्मेलन में तारा ने दुनियाभर से आए प्रतिनिधियों से कहा कि हमें बाल श्रम खत्म करने की दिशा में विशेष काम करने की जरूरत है। बच्चों को पढ़ने का अधिकार है, बच्चों से संबंधित अधिकारों के लिए जमीनी स्तर पर काम करना होगा। दुनिया के शक्तिशाली लोगों से मेरा निवेदन है कि हर देश के बच्चों को मजदूरी से मुक्त कराए।

उनको पढ़ने दे और आगे बढ़ने का मौका दे। मैं जिस समुदाय से आती हूं, उसमें 12वीं पास करने वाली मैं पहली स्टूडेंट हूं। मेरे आसपास के गांवों में कोई भी लड़की बंजारा परिवार में 12वीं पास नहीं है। तारा बंजारा ने दुनियाभर से आए प्रतिनिधियों को सम्मेलन में बाल मजदूरी, बाल विवाह और बाल तस्करी रोकने के प्रयास की शपथ दिलाई। बता दें कि तारा ने अपनी बहन का बाल विवाह रुकवाया था।

तारा और उसका परिवार अब भी कच्चे मकान में रहता है। तारा के पांच भाई-बहन हैं। तारा सभी को पढ़ा भी रही हैं।
तारा और उसका परिवार अब भी कच्चे मकान में रहता है। तारा के पांच भाई-बहन हैं। तारा सभी को पढ़ा भी रही हैं।

तारा अब बीए फर्स्ट ईयर में पढ़ती हैं। बाल मजदूरी से बाहर लाने में बाल आश्रम ट्रस्ट संस्थापिका सुमेधा कैलाश की ओर से खोले गए बंजारा शिक्षा केंद्र की सबसे बड़ी भूमिका है। कैलाश सत्यार्थी ने सम्मेलन में तारा के लिए कहा- हमें हमारी बेटी तारा पर गर्व है. उन्होंने हमारा सर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

22 बच्चों को दिलाई मुक्ति
तारा ने बंजारा समाज के 22 बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कर मुख्यधारा में लाने का न केवल प्रयास किया बल्कि उन्हें स्कूल में दाखिला भी दिलाया। तारा अलवर में अपने समुदाय की पहली लड़की थी, जो स्कूल और कॉलेज गई। वह बाल आश्रम संस्थापिका सुमेधा कैलाश के मार्गदर्शन में बाल विवाह और अशिक्षा का कलंक मिटाने के लिए संघर्ष कर रही है। अब तारा अपने समुदाय और बच्चियों के लिए एक मिसाल बन गई। वह भविष्य में पुलिस सेवा में जाना चाहती है।

दक्षिण अफ्रीका के डरबन में अंतरराष्‍ट्रीय श्रम संगठन का 5वां सम्मेलन 15 से 20 मई तक चला। इस सम्मेलन में 2025 तक बालश्रम को खत्म करने का लक्ष्य रखा गया। तारा नोबल पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के साथ वहां पहुंचीं।