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अब सिर्फ लहरें आजाद, कैमरे कैद:कोरोना महामारी में अलवर का सिलीसेढ़ बांध और RDTC होटल एक चौकीदार के हवाले, हर तरफ हवा का सन्नाटा

अलवर2 महीने पहले
ये अलवर सिलीसेढ़ बांध।

चारों तरफ पहाड़ियों से घिरे अलवर के सिलीसेढ़ बांध की लहरें तो पूरी तरह आजाद हैं। लेकिन, यहां की धूप, छांव, पानी व हरियाली से उभरने वाली तस्वीरों को कैद करने वाले न कैमरे हैं न पर्यटक। हर तरफ सनसनाती हवा के सन्नाटे का कब्जा है। कोरोना से पहले यहां पैर रखने की जगह नहीं होती थी। मतलब आए दिन वाहनों का जाम लगता था। सैकड़ों पर्यटक एक दिन में यहां के प्राकृतिक सौंदर्य की हजारों तस्वीरें कैद करके ले जाते थे। अब इस पूरे नजारे को प्रकृति खुद ही देख पाती है। केवल एक चौकादार के जिम्मे होटल व बांध है। 10 कर्मचारी घर से काम करते हैं। मुख्य गेट पर ताला लगा हुआ है। पर्यटक को दूर आसपास के ग्रामीण भी नजर नहीं आते हैं।हां, इतना जरूर है कोरोना महामारी से मुक्ति मिले तो पर्यटक यहां आने को लालायित हैं।

ये सिलीसेढ़ बांध का नजारा। चारों तरफ पहाड़ी, हरियाली और पानी।
ये सिलीसेढ़ बांध का नजारा। चारों तरफ पहाड़ी, हरियाली और पानी।

पहले एक दिन में 500 से 600 पर्यटक
सिलीसेढ़ बांध को देखने, RTDC होटल में रुकने, बोटिंग करने व फिशिंग देखने के लिए पहले हर दिन करीब 500 से 600 पर्यटक आते थे। चहल-पहल इतनी होती थी कि बांध की पाल भी भरी मिलती थी। वाहनों से जाम लगना तो आम बात है। अब यहां वाहन तो दूर आदमी नजर नहीं आते हैं।

ग्रामीण भी नहीं
बांध से ठीक पहले ग्रामीणों के छोटे होटल ढाबे हैं। अब वहां भी सन्नाटा रहता है। असल में ये ढाबे भी सिलीसेढ़ आने वाले पर्यटकों से ही चलते थे। यहां भी सब दुकान ढाबें बंद रहते हैं। ग्रामीण भी पहले की तुलना में बहुत कम घरों से निकलते हैं।

स्टाफ घर से काम कर रहा

RTDC होटल के प्रभारी केसर सिंह ने बताया- होटल का स्टाफ घर से काम कर रहा है। गेट ही बंद है तो पर्यटक व आमजन कहां से आएंगे। बोट भी एक जगह पानी में खड़ी। पहले बड़ी संख्या में लोग बोटिंग का लुत्फ उठाने आते थे।

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