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RAS से पहले संजय ने छोड़ी थानेदारी:दिल्ली में SI रह चुके, एयरफोर्ट और SSC में भी हो गया था सेलेक्शन, अब इनकम टैक्स की नौकरी छोड़ RAS जॉइन करेंगें

अलवर2 महीने पहले
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संजय यादव। - Dainik Bhaskar
संजय यादव।

अलवर जिले के बानसूर के मल्लूवास गांव निवासी संजय यादव का आरएएस में चयन हुआ है। उनको 258वीं रैंक मिली है। फिलहाल संजय इनकम टैक्स में इंस्पेक्टर हैं। इससे पहले दिल्ली में एसआई रह चुके हैं। एयरफॉर्स व एसएसएसी में भी चयनित होने के बाद सीढ़ी दर सीढ़ी बड़े पदों की ओर बढ़ते गए हैं। अब इनकम टैक्स की नौकरी को छोड़ आरएएस की नौकरी करेंगे।

माता-पिता किसान
संजय के माता-पिता पूरी तरह किसान हैं। खेती-बाड़ी की आजीविका से ही संजय की अच्छी पढ़ाई लिखाई कराई। 12वीं के बाद जयपुर में पढ़नेे भेजा। राजस्थान यूनिवर्सिटी से गेजुएशन किया। फिर इसी दौरान उनको एयरफोर्स में चयन हुआ। गेजुएशन के तीसर साल में दिल्ली पुलिस में एसआई बन गए। एक साल ट्रेनिंग करके आ गए। जब उनका इनकम टैक्स में बतौर इंस्पेक्टर चयन हो गया। इसी बीच उनका एसएससी में भी सलेक्शन हो गया था। 2015 से संजय इनकम टैक्स में नौकरी साथ पढ़ाई करते रहे। आरएएस के पहले चांस में रैंक अच्छी नहीं मिली तो दूसरा प्रयास जारी रखा। अब 258वीं रैंक हासिल कर ली है। जल्दी वे इनकम टैक्स की नौकरी छोड़ आरएएस की तरफ बढ़ जाएंगे।

हितेश यादव। पहले से एसआई बन चुके। अब आरएएस में 473वीं रैंक।
हितेश यादव। पहले से एसआई बन चुके। अब आरएएस में 473वीं रैंक।

राजस्थान में एसआई बन चुके हितेश
अलवर जिले के मुण्डावर के भुनगड़ा अहीर गांव के निवासी हितेश यादव की आरएएस के एग्जाम में 473वीं रैंक आई है। लेकिन इस रैंक से वे संतुष्ट नहीं है। इस कारण आरएएस का अगला चांस लेने के इच्छुक हैं। हितेश के पिता टीचर के पद से रिटायर हैं। माता गृहिणी हैं।

एसआई के पद पर 17वीं रैंक
हितेश का राजस्थान पुलिस में एसआई के पद पर चयन हो चुका है। जिनकी पूरे अलवर में पहली रैंक रही है। प्रदेश में 17वें नम्बर पर आए हैं। जिसकी ज्वाइनिंग भी चल रही है। हितेश का कहना है कि अभी उसने एसआई के पद पर ज्वाइन नहीं किया है। आरएएस की रैंक के आधार पर कुछ अच्छी कैडर मिलता है तो वे ज्वाइन करेंगे। अन्यथा जल्दी एसआई के पद पर ज्वाइनिंग की तैयारी है।

बीटेक के बाद दूसरा चांस
हितेश ने बताया कि उसने बीटेक किया है। उसके बाद आरएएस का दूसरा चांस है। वे नियमित रूप से पढ़ाई करते हैं। कुछ कोचिंग में भी अध्ययन किया है। खुद की सफलता का श्रेय माता-पिता के अलावा अपने चाचाय गार्गी कॉलेज शाहजहांपुर के संचालक भीम सिंह यादव को देते हैं। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन के लिए स्मार्ट स्टेटजी होना जरूरी है। तभी स्मार्ट अप्रॉर्च से पढ़ाई कर अच्छे से रिवीजन करने की जरूरत है। रेगुलर स्टडी ही सफलता दिला सकती है।