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नर्सिंग भर्ती में घूसखोरी:मेडिकल काॅलेज की डीन सहित सात अफसरों के चैंबर सीज, रिकॉर्ड भी जब्त

अलवरएक महीने पहले
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  • चारों आरोपी 3 दिन के रिमांड पर
  • एसीबी की टीम ईएसआईसी मेडिकल काॅलेज में जांच के लिए पहुंची

ईएसआईसी मेडिकल काॅलेज एवं हॉस्पिटल में नर्सिंग व अन्य स्टाफ की भर्ती के लिए घूसखोरी का मामला उजागर होने व इस मामले में चार लोगाें की गिरफ्तारी के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने शुक्रवार को मेडिकल काॅलेज की डीन डाॅ. हरनाम काैर सहित सात अधिकारियों के चैंबर सीज कर दिए। भर्ती संबंधित रिकॉर्ड व अभ्यर्थियों के आवेदनाें काे भी जब्त कर लिया। इसके अलावा एसीबी ने भर्ती के लिए रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार चाराें आराेपियाें काे दाेपहर 3.30 बजे अलवर में एसीबी काेर्ट की न्यायाधीश शिवानी सिंह के रेलवे स्टेशन राेड स्थित आवास पर पेश कर तीन दिन के रिमांड पर लिया है। इससे पूर्व सुबह 10.30 बजे एसीबी की टीम चारों आरोपियों को मेडिकल जांच के लिए सामान्य अस्पताल लेकर पहुंची।

एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बजरंग सिंह ने बताया कि भर्ती का ठेका लेने वाली प्लेसमेंट एजेंसी गुजरात के राजकोट की एमजे साेलंकी कंपनी के हिस्सेदार व मालिक मंजल पटेल उर्फ मिनेश पटेल पुत्र नटवर लाल निवासी ए-302 उमीया तीर्थ विले, गायत्री मंदिर राेड कलाेल गांधी नगर गुजरात, कंपनी के फील्ड इंचार्ज भरत पुत्र कमलेश पूनिया निवासी पाल चाैहटे थाना बाेरानाड़ा जाेधपुर, कंपनी के सुपरवाइजर काना राम पुत्र रामाराम चाैधरी निवासी धायलाें की ढाणी गंगाणा जिला जाेधपुर तथा एम्स जाेधपुर के सीनियर नर्सिंग ऑफिसर महिपाल पुत्र सूबेसिंह यादव निवासी गुलहेडा मुंडावर अलवर को रिमांड पर लिया है।

इनसे पूछताछ की जाएगी। एएसपी ने बताया कि एसीबी को एक सूत्र से सूचना मिली थी कि प्लेसमेंट कंपनी के मालिक व कर्मचारी गिरोह बनाकर बेरोजगार युवाओं काे स्थाई नियुक्ति का झांसा देकर वसूली कर रहे हैं, जबकि हकीकत में भर्ती संविदा पर हो रही है।

अब तक 82 अभ्यर्थियों की भर्ती, मूल दस्तावेज 12 के मिले

एसीबी की प्रथमदृष्ट्या जांच में सामने आया है कि कंपनी की ओर से नर्सिंग सहित विभिन्न पदों पर फिलहाल 108 लोगों की भर्ती की जानी थी। कंपनी के कर्मचारियों ने खुली भर्ती प्रक्रिया काे दरकिनार कर अब तक 82 अभ्यर्थियों की फर्जी तरीके से भर्ती कर ली। हालांकि सर्च के दाैरान एसीबी को सिर्फ 12 अभ्यर्थियों के ही मूल दस्तावेज मिले हैं। एसीबी के एएसपी विजय सिंह ने बताया कि कंपनी ने काेविड का बहाना बनाकर भर्ती संबंधित काेई विज्ञापन भी जारी नहीं किया। सरकार की शर्तों के आधार पर यह भर्ती 15 दिन के अंदर होनी थी।

कंपनी मालिक गुरुवार काे अलवर से वापस लाैट गया : एसीबी ने बताया कि कंपनी मालिक मंजल उर्फ मिनेश पटेल गुरुवार काे अलवर आया था। वह यहां से वसूले 15 लाख रुपए लेकर रवाना हाे गया था। वह फील्ड इंचार्ज भरत पूनिया के पास करीब 4.50 लाख रुपए छाेड़ गया था। एसीबी ने भरत पूनिया के कब्जे से उक्त राशि बरामद कर ली है। आरोपियों की दाे गाड़ियां भी बरामद की हैं।
कंपनी मालिक की बिगड़ी तबीयत : शुक्रवार सुबह जब एसीबी की टीम नर्सिंग भर्ती घाेटाले में गिरफ्तार प्लेसमेंट एजेंसी के मालिक मंजल उर्फ मिनेश पटेल काे मेडिकल जांच के लिए सुबह 10.30 बजे सामान्य अस्पताल लेकर गई। मेडिकल जांच के बाद मंजल पटेल की तबीयत खराब हाे गई। इससे बाद एसीबी के पुलिस निरीक्षक रघुवीर शर्मा फिर से उसे डॉक्टर के पास ले गए।

लापरवाही : ईएसआईसी के अधिकारियाें ने कंपनी पर छोड़ा भर्ती का जिम्मा, मॉनिटरिंग तक नहीं की

ईएसआईसी के अधिकारियाें ने भर्ती का पूरा जिम्मा एक कंपनी पर छाेड़ दिया और भर्ती के दाैरान माॅनिटरिंग तक नहीं की। यह कंपनी डेढ़ महीने में सिर्फ 12 कर्मचारियाें की भर्ती ही कर पाई। भर्ती काे लेकर 15 दिन पहले जब भास्कर ने कंपनी के सुपरवाइजर भरत पूनिया से बात की थी, जब उन्होंने कहा था कि 4 से 5 महीने तक कर्मचारियाें की टुकड़ाें में भर्ती चलती रहेगी।

ईएसआईसी मेडिकल काॅलेज व हाॅस्पिटल में नर्सिंग व अन्य स्टाफ के 531 पदों पर भर्ती के लिए ईएसआईसी ने गुजरात की एमजे साेलंकी कंपनी से टेंडर के जरिए 19.50 कराेड़ का कांट्रेक्ट किया था। इसमें 1.49 कराेड़ से ज्यादा मासिक वेतन कर्मचारियाें काे भुगतान किया जाना था।

ईएसआईसी के अधिकारियाें ने भर्ती का पूरा जिम्मा एक कंपनी पर छाेड़ दिया और भर्ती के दाैरान माॅनिटरिंग तक नहीं की। यह कंपनी डेढ़ महीने में सिर्फ 12 कर्मचारियाें की भर्ती ही कर पाई। भर्ती काे लेकर 15 दिन पहले जब भास्कर ने कंपनी के सुपरवाइजर भरत पूनिया से बात की थी, जब उन्होंने कहा था कि 4 से 5 महीने तक कर्मचारियाें की टुकड़ाें में भर्ती चलती रहेगी।

ईएसआईसी मेडिकल काॅलेज व हाॅस्पिटल में नर्सिंग व अन्य स्टाफ के 531 पदों पर भर्ती के लिए ईएसआईसी ने गुजरात की एमजे साेलंकी कंपनी से टेंडर के जरिए 19.50 कराेड़ का कांट्रेक्ट किया था। इसमें 1.49 कराेड़ से ज्यादा मासिक वेतन कर्मचारियाें काे भुगतान किया जाना था।

विरोधियों के निशाने पर सांसद

बहरोड़ विधायक बलजीत यादव बोले-कुलदीप यादव सांसद का पीए नहीं...फूफा है

सर्किट हाउस में पत्रकाराें से बातचीत में बहराेड़ विधायक बलजीत यादव ने कहा- कुलदीप यादव सांसद बालकनाथ का पीए नहीं, फूफा है, जाे दलालाें के साथ मिलकर नर्सिंग भर्ती में अवैध वसूली कर रहा है। सांसद ने आपदा में भ्रष्टाचार का अवसर ढूंढ लिया है। नाैकरी के नाम पर अवैध वसूली करना शर्मनाक और लाेकतंत्र पर कलंक है। भ्रष्टाचार उजागर हाेने पर सांसद काे नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।

बलजीत ने सांसद व कुलदीप की गिरफ्तारी की मांग करते हुए आराेप लगाया कि भगवा वस्त्र पहन खुद काे साधु बताने वाला सांसद मठ की अरबाें की संपत्ति का मालिक है, उसके बावजूद भ्रष्टाचार में लिप्त है। पूर्व सांसद चांदनाथ के काले कारनामे किसी से छुपे नहीं हैं, जिनकी बाबा रामदेव से काले धन काे लेकर बातचीत रिकॉर्ड हुई थी और मीडिया में प्रकाशित हुई थी। सांसद आभाेर में गुफा बनवा रहे हैं, जिस पर 500 कराेड़ रुपए खर्च हाेंगे। सरकार बिना किसी दबाव में आए दाेषियाें के खिलाफ कार्रवाई करे और भ्रष्टाचार के पूरे रैकेट काे बेनकाब करे।

सांसद बालकनाथ का जवाब - कुलदीप यादव ने 5 लाख रुपए मांगे, ये बात गलत है

सांसद महंत बालकनाथ याेगी ने कहा-ईएसआईसी मेडिकल काॅलेज व हाॅस्पिटल में कर्मचारियाें की भर्ती में नाैकरी के लिए जाे कार्यकर्ता आए, उनकी हमने सिर्फ सिफारिश की। कंपनी ने जाे भ्रष्टाचार किया या गड़बड़ी की है ताे उसके खिलाफ कार्रवाई हाे रही है। अगर एसीबी की टीम किसी काे संदिग्ध मानती है ताे उसके खिलाफ कार्रवाई हाेगी। पीए कुलदीप यादव की ओर से पांच लाख रुपए के लेन-देन की बात सामने आने की बात जाे अखबाराें में प्रकाशित हुई है, वह गलत है। हमारा इससे काेई लेना-देना नहीं है।

नाैकरी के नाम पर लाेगाें से पैसे लेने की जाे बात सामने आई है, उसका सच कंपनी के खिलाफ एसीबी की जांच में सामने आएगा। सांसद ने कहा कि बहरोड़ विधायक बलजीत के आराेपाें का जवाब कानूनी तरीके से देंगे। संविधान ने सभी काे सुरक्षा दी है, इसलिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जाे जवाब देने लायक हाे उसे सीधे जवाब दिया जाता है और विधायक इस लायक नहीं है। हम प्रयास करेंगे कि एसीबी की कार्रवाई से मेडिकल काॅलेज का इसी सत्र से संचालन प्रभावित नहीं हाे। अगर ये कंपनी डिफाॅल्टर हाे गई है ताे सरकार दूसरी कंपनी काे भर्ती की जिम्मेदारी साैंपे।

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