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रिश्वतखोरी:अलवर व जयपुर तक बंटता है कमीशन, ‌10 करोड़ रु. के बिल 2 साल से पेंडिंग, ठेकेदारों ने काम छोड़े, बोले-सुसाइड की नौबत

बहरोड़2 महीने पहले
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  • ठेकेदारों का कहना सब कुछ नियमानुसार होने पर भी 5% कमीशन देना मजबूरी था
  • अब 8 फीसदी किया तो बढ़ा गुस्सा, काम में कमी मिलने की रिश्वत अलग से देनी पड़ती है

(महेंद्र शर्मा) बहरोड़ नगर पालिका में भ्रष्टाचार की बेल जितनी लंबी है, जड़ें उससे कई गुना गहरी हैं। छोटी से छोटी खरीद से लेकर करोड़ों रुपए के निर्माण कार्यों में सब-कुछ ठीक होने पर भी 5 प्रतिशत कमीशन तो देना ही पड़ता है। काम में गड़बड़ी छिपाने की कीमत अलग है। कमीशनखोर अफसर बहरोड़ नपा तक सीमित नहीं है, बल्कि हिस्सा अलवर और जयपुर तक बंटता है।

कमीशन नहीं दो तो काम और पेमेंट दोनों नहीं मिलते। बहरोड़ नपा में 2 साल से करीब 10 करोड़ रुपए के बिलों के पेमेंट अधिकारियों ने रोक रखे हैं। काम यहीं करना है, इसलिए कोई ठेकेदार बोलता नहीं। भास्कर की पड़ताल में छिपे कैमरे पर ये सच ठेकेदारों ने बयां किया। एक ने तो यहां तक कहा कि 2 करोड़ रुपए का काम कर चुका, लेकिन दो साल से एक रुपया नहीं मिला तो नौबत सुसाइड की आ चुकी है।

लोकायुक्त के यहां भी हुई शिकायतें, जांच पेंडिंग
पार्षद डॉ ऋषि देव यादव, निधि ओम यादव ने बताया कि नगर पालिका द्वारा घटिया सड़क निर्माण, एलईडी लाइट, सीसीटीवी कैमरे खरीद में भ्रष्टाचार हुआ। उन्होंने आरटीआई भी लगाई। जवाब नहीं मिला। इस पर लोकायुक्त को शिकायत भेजी गई।

बहरोड़ नपा में गहरी है भ्रष्टाचार की दलदल, ये मामले भी आए सामने

  • कोरोना महामारी लॉकडाउन में बहरोड़ नपा में खरीद-भुगतान की शक्तियां एसडीएम की ओर से ईओ को दी गई थी। इस दौरान हुई सोडियम हाइपोक्लोराइट आदि ऊंची दरों पर खरीदे गए। इसकी शिकायत लोकायुक्त को हो चुकी है।
  • नपा के सफाई ठेकेदार जितेंद्र भारती ने बताया कि मार्च में सफाई का ठेका निरस्त हो गया था। कोरोना महामारी के कारण नया टेंडर नहीं होने से अप्रैल से 15 मई तक 50 अस्थाई कर्मियों से सफाई कराई गई। इसका 7.50 लाख रुपए का बिल बना। मगर डीएलबी से लिखित में आदेश आने के बावजूद 3 माह से पेमेंट रुका है।
  • नगरपालिका ठेकेदार सहेंद्र यादव ने बताया कि अलवर रोड पर नाला निर्माण व टाइल्स लगाने का करीब दो करोड़ रुपए का काम लिया था। 22 माह पहले काम पूरा कर दिया। कमीशन नहीं दिया तो पार्षदों से डीएलबी में शिकायत करा अधिकारियों ने भुगतान रोक दिया। जयपुर व अलवर तक फाइल लेकर गए। कोई सुनवाई नहीं हुई। एक रुपया नहीं मिला। उधारी से सुसाइड की नौबत आ गई। काम छोड़ हरियाणा में काम कर रहे हैं।
  • ठेकेदार रामकरण कुमावत ने बताया कि पुलिस थाने के सामने 30 लाख रुपए में सुलभ शौचालय का ठेका लिया। यह काम करीब 20 लाख रुपए में पूरा कर दिया, तो उसके 5 लाख रुपए का भुगतान रोक दिया। ये पैसा डेढ़ साल से बकाया है। सबलपुरा मोहल्ले में सामुदायिक भवन की चार दिवारी व मिट्टी भराई का कार्य 20 लाख रुपए की लागत से लिया। पैसा नही मिल रहा इसलिए डेढ़ साल से कोई काम नहीं लिया।
  • नगरपालिका ठेकेदार सुंदरलाल ने बाबा भर्तृहरि रोड पर 1.25 करोड़ में सीसी सड़क निर्माण किया। इसमें 25 लाख रुपए का भुगतान 2 साल से और बस स्टैंड तक नाला निर्माण के 48 लाख रुपए के कार्य में 12 लाख का भुगतान डेढ़ साल से रोका हुआ है। इसलिए काम ही छोड़ दिया है।

^मैं लॉकडाउन के बाद नगरपालिका नहीं गई हूं। नपा अधिकारियों द्वारा ठेकेदारों से 8% कमीशन लेने की शिकायत मिली थी। अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि बकाया भुगतान तत्काल किए जाएं।
-नीलम यादव, अध्यक्ष, बहरोड़ नगर पालिका

5% को रिश्वत ही नहीं मानते, यह तो ‘मिठाई’
अधिकांश ठेकेदारो ने कहा कि पूर्ण गुणवत्ता का काम तो हो ही नहीं सकता है। क्योंकि बिलों को पास कराने का 5 प्रतिशत कमीशन हर हाल देना होता है। ठेकेदार झंझट और पैसा अटकने के डर से ये मांग पूरी करते हैं। मगर बहरोड़ में नई ईओ आने के बाद कमीशन 5 से बढ़ाकर 8 फीसदी कर दिया गया।

ज्यादा सुविधा शुल्क नहीं दिया तो बिल रोक दिए गए। शिकायतों से कुछ नहीं होता, पैसा ठेकेदार का ही रुकता है। इसमें अफसरों की पूरी चेन काम करती है। अधिशासी अधिकारी, कैशियर, आरआई, जेईएन एवं बाबू के अलावा अलवर में एक्सईएन और जयपुर के अधिकारियों का हिस्सा अलग से वसूला जाता है। कमीशन का खर्च निकालने से काम की गुणवत्ता घट जाती है। ठेकेदार जाल में फंस जाता है।

हर स्तर पर वसूली, तब मिलता है भुगतान
करीब 20-25 सालों से काम करते आ रहे एक ठेकेदार ने बताया कि अधिकारियों को टेंडर प्रक्रिया से लेकर कार्य पूरा होने तक पैसा देना पड़ता है। अब डिमांड बढ़ाने से ठेकेदारों ने विरोध किया, तो नपा ईओ ने बिलों को पास करने में रोक लगा दी। गत 2 साल से करीब 10 करोड़ रुपए ठेकेदारों का रुका पड़ा है। नपा में करीब 10 ठेकेदार काम करते हैं। हाल ही जयपुर व दौसा की फर्म भी आई हैं। चुनिंदा कर्मचारी ही ईओ एवं अधिकारियों का कमीशन लेकर बिल पास करवाते हैं।

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