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मां को अग्नि देते वक्त पिता की भी मौत:बरेली के बूढ़े मां-बाप को अलवर के श्मशान में बेटियों ने मुखाग्नि दी, अमेरिका से नहीं आ सका बेटा

अलवर2 महीने पहले
मां की चिता को अग्नि देती बेटी। इसी दौरान खबर मिली कि अस्पताल में इलाजरत पिता की भी मौत हो गई है।

कोरोना महामारी के दौर में मौत का मंजर देखा नहीं जा रहा। मंगलवार को अलवर शहर के तीजकी श्मशान घाट पर एक बेटी अपनी मां की चिता को अग्नि दे रही थी। तभी रूह कंपा देने वाली सूचना मिली कि पिता की भी मौत हो गई। बेटियों काे मां-पिता को अग्नि देते देखा ताे सबकी आंख भर आई।

मौत भी कहां से कहां ले आई
उत्तरप्रदेश के बरेली निवासी 75 वर्षीय राजेन्द्र कुमार को कई दिन पहले अलवर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। जिनको लीवर की बीमारी थी। उसी बीच उनकी 70 वर्षीय पत्नी सुमन की भी तबीयत बिगड़ गई। जिनकी दो बेटियां हैं। वो कहीं दूर रहती थी। उन्होंने ही मां-पिता को अलवर के अस्पताल में भर्ती कराया। कई दिन से यहां इलाज चल रहा था। बेटियां ही देखरेख में लगी थी। मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे मां की मौत हो गई।

मां के बाद पिता की चिता को अग्नि देती बेटियां।
मां के बाद पिता की चिता को अग्नि देती बेटियां।

मां को अग्नि देते समय पिता की मौत
मंगलवार दोपहर बाद करीब दो बजे जब बेटी सगुन अपनी मां की चिता को अग्नि दे रही थी। उसी समय अस्पताल से उनके पास फोन आ गया कि पिता का भी निधन हो गया है। बेटी के कांपते हाथों ने मां का अंतिम संस्कार किया।

फिर पिता का अंतिम संस्कार
मां का अंतिम संस्कार चल ही रहा था कि कुछ देर बाद एंबुलेंस पिता का शव लेकर पहुंची। इसी दिन अलवर के तीजकी श्मशान घाट पर इलेक्ट्रिक शव दाह गृह शुरू हुआ था। फिर दूसरी बेटी ने पिता को मुखाग्नि दी। इलेक्ट्रिक शव दाह गृह में अंतिम संस्कार किया गया। यह सब देखकर श्मशान घाट पर कोरोना के मृतकों का अंतिम संस्कार कराने वाली नगर परिषद की टीम के सदस्यों की आंखें भी नम हो गई।

बेटा अमेरिका से नहीं आ सका
मृतक दम्पति का बेटा अमेरिका में नौकरी करता है। कोरोना महामारी के कारण माता-पिता के बीमार होने पर भी नहीं आ सका। बेटी सुगन व दूसरी बहिन ने ही माता-पिता को संभाला है। अस्पताल में भर्ती कराया। इस बीच मंगलवार को दोनों की मौत हो गई। इतने बड़े हादसे में भी बेटियों ने हिम्मत दिखाते हुए अंतिम फर्ज पूरा किया।

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