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  • Death Statistics Show That The System Of Treatment Of Corona Patients In Hospitals Has Failed, The Ashes Of The Pyre In The Crematoriums Are Not Being Pacified.

अब अलवर में मौत पर मौत:मौत के आंकड़े बता रहे कि अस्पतालों में कोरोना मरीजों के इलाज का सिस्टम फेल हो चुका, श्मशानों में चिता की राख शांत नहीं हो पा रही

अलवर6 महीने पहले
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ये तीजकी श्मशान घाट है। यहां स� - Dainik Bhaskar
ये तीजकी श्मशान घाट है। यहां स�

गुरुवार रात 11 बजे लॉडर्स हॉस्पिटल के आइसीयू में ऑक्सीजन सप्लाई ठप होने से एक मरीज की मौत हुई थी। कुछ घण्टे बाद सुबह होते ही थानागाजी के किशाेरी गांव में एक शिक्षक की मौत की खबर आ गई। सुबह-सुबह ही अलावड़ा में कोरोना पॉजिटिव की मौत हो गई। इधर, अलवर जिला अस्पताल में एंबुलेंस चालकों के जरिए पता लगा कि बीती रात को जिल अस्पताल में 5 से अधिक लोगों की मौत हुई है। कई अन्य निजी अस्पतालों में भी मरीजों ने दम तोड़ा है। मौत के बाद परिवारों की चीख पुकार शांत नहीं हो पा रही हैं।

अकेले शहर में 15 से 20 की मौत
अलवर शहर में नगर परिषद को कोरोना मरीजों की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार का जिम्मा सौपा हुआ है। परिषद के अधकारियों के अनुसार अकेले अलवर शहर में मौत का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। कई बार तो अस्पतालों से सीधे परिजन मृतक का शव ले जाते हैं। अकेले शहर में 10 से 15 लोगों की मौत होने लगी है। हालांकि प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ा कम होता है। कई बार मौत के बाद मरीज की कोरोना जांच होती है। तब रिपोर्ट आने पर उसे पॉजिटिव घोषित किया जाता है। कुछ मरीजों की शहर से बाहर के अस्पतालों में मौत होती है।

सिस्टम मजबूत नहीं है, सावधानी ही बचाव
अलवर जिले में अस्पतालों का सिस्टम मजबूत नहीं है। डेडिकेटेड कोविड हाॅस्पिटल में ऑक्सीजन सप्लाई बाधित हो सकती है तो अन्य जगहों के हालात का अनुमान लगा सकते हैं। यहां निजी अस्पतालों में तो आमजन को बैड नहीं मिल पाते हैं। अब तो सरकारी अस्पतालों में भी वेंटिलेटर व बैड नहीं है। ऐसे में कोरोना से बचे रहना ही बचाव है। लापरवाही नहीं बरतें। खुद चिकित्सक यह मानते हैं कि परिवार का एक व्यक्ति लापरवाही बरतता है तो सब कोरोना पॉजिटिव हो सकते हैं। इसलिए बिना मास्क कतई घर से नहीं निकलें।

ऑक्सीजन की कमी सब जगह

अलवर के भिवाड़ी में ऑक्सीजन के बड़े प्लांट होने के बावजूद यहां भी ऑकसीजन की कमी है। प्रशासन के अनुसाार रोजाना 1600 से अधिक सिलेण्डर की जगह 1000 सिलेण्डर ही ऑक्सीजन मिल पा रही है। जबकि जिले में संक्रमितों की संख्या तेजी से बढने लगी है। उसके हिसाब से आगे ऑक्सीजन की और ज्यादा जरूर पड़ सकती है। यही नहीं जिले में वेंटिलेटर व आइसीयू बैड की बड़ी कमी है।