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111 किलो वजन, शुगर 450... फिर भी कोरोना को हराया:टीबी के साथ फेफड़ों में 92 प्रतिशत फैल गया था संक्रमण, कोमा में जाने का खतरा था; रिकवर होकर किया चमत्कार

अलवर25 दिन पहले
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आजाद खान, जिन्होंने कोरोना को मात दी। - Dainik Bhaskar
आजाद खान, जिन्होंने कोरोना को मात दी।

टीबी होने के साथ शुगर 450 पहुंच जाए और कोरोना भी जकड़ ले, तब मरीज को बचाना मुश्किल हो जाता है। खासकर तब जब कोरोना के कारण फेफड़ों में संक्रमण 92 प्रतिशत (सिटी स्कोर 23) तक पहुंच जाए। ऊपर से मरीज का वजन 111 किलो हो तो बीमारी और परेशान करती है। ऐसे में अगर मरीज रिकवर हो जाए तो चमत्कार से कम नहीं। अलवर जिले के खैरथल के गांव नंगला डूंगर निवासी आजाद खान ने ऐसी विपरीत परिस्थितियों में कोरोना को हराया है। आजाद 1 दिन पहले शनिवार को ही अस्पताल से ठीक होकर घर लौटे हैं। आजाद ने बताया कि तमाम परेशानियों के बाद कोरोना को पस्त किया और 20 दिन बाद घर लौट आया। इस दौरान कई दिन वेंटिलेटर पर भी रहा।

अलवर शहर में हरीश हॉस्पिटल के डॉक्टर लवेश गुप्ता ने बताया कि मरीज जब हॉस्पिटल आया तो उसकी हालत नाजुक थी। संक्रमण बढ़ने से सांस लेने में भी बड़ी दिक्कत थी। जिस तरह की मरीज के साथ दिक्कत थी, ऐसे में रिकवर होना एक खास उदाहरण है।

9 मई को पहुंचे अस्पताल
आजाद खान ने बताया कि उसका करीब 111 किलो वजन है। इतना अधिक वजन होने के कारण थोड़ी बहुत ब्लड प्रेशर की शिकायत भी हो सकती है। 9 मई को आजाद को कोरोना के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। करीब 20 दिन इलाज चला। 4 रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाए गए। साथ में एक बार प्लाज्मा भी चढ़ाना पड़ा।

स्ट्रिक्ट शुगर कंट्रोल
डॉक्टर लवेश गुप्ता ने बताया कि इस मरीज के मामले में स्ट्रिक्ट शुगर कंट्रोल के आधार पर इलाज चला है। इसमें समय-समय पर वेंटिलेटर थेरेपी और स्टेरॉयड्स दिए गए। दूसरी बीमारियों को देखते हुए प्रॉपर एंटीबायोटिक सिलेक्शन से अन्य तरह के संक्रमण को रोका गया।

सबसे महत्वपूर्ण CO2 नारकोसिस
डॉक्टर ने बताया कि मोटे मरीजों में रात के समय CO2 काफी बढ़ जाता है। इसके कारण मरीजों में सांस लेने में दिक्कत आती है। यही बड़ी चुनौती थी। हमने टीबी के इलाज के साथ इनको वेंटिलेटर पर रखा। ताकि मरीज के मोटापे को देखते हुए बराबर इलाज चलता रहे। संक्रमण ज्यादा था और मोटे मरीजों में पहले ही फेफड़े पूरी तरह से काम नहीं करते हैं। इस कारण इनका वेंटिलेटर थेरेपी के आधार पर इलाज चलता रहा। जब फेफड़े रिकवर हो गए, तब इनको वेंटिलेटर से हटाया गया।

कोमा में जाने का खतरा
डॉक्टर लवेश गुप्ता ने बताया कि मोटे लोगों को डाइट कंट्रोल करने के साथ व्यायाम करते रहना चाहिए। ताकि मोटापा बढ़े नहीं। असल में मोटे लोगों में संक्रमण के कारण कोमा में जाने का डर रहता है। इसलिए कोरोना होने के बाद मरीजों को चेस्ट एक्सरसाइज कराते हैं। यह एक्सरसाइज रेस्पायरोमीटर से की जाती है। इससे फेफड़े खुले रहते हैं। खाने में हाई प्रोटीन डाइट दी जाती है। उनके संक्रमण को कम किया जा सके। संक्रमण खत्म होने के बाद मरीज को डॉक्टर की सलाह के अनुसार एक्सरसाइज करनी चाहिए। इसके अलावा जिनमें शुगर है उनको शुगर कंट्रोल रखनी चाहिए।

20 दिन से अधिक का समय
सरकारी व निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि फिलहाल अलवर जिले में संक्रमण कुछ कम हुआ है, लेकिन पहले से गंभीर मरीज भर्ती हैं। उनका इलाज अब तक अस्पताल में चल रहा है। काफी मरीज ऐसे हैं जिनमें संक्रमण का स्तर बहुत अधिक है। उनको 10 से 15 दिन अस्पताल में रुकना पड़ता है। आजाद खान जैसे गंभीर संक्रमण वाले मरीजों को 20 दिन से अधिक समय रिकवर होने में लगे हैं।

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