खतरे में मासूम:डिप्थीरिया का संक्रमण, एक बच्चे की माैत, दूसरा जयपुर रैफर किया

अलवर2 महीने पहले
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शिशु अस्पताल में एक बेड पर भर्ती दाे बच्चे एवं उनके पास लेटे परिजन। - Dainik Bhaskar
शिशु अस्पताल में एक बेड पर भर्ती दाे बच्चे एवं उनके पास लेटे परिजन।
  • सामान्य चिकित्सालय के आइसाेलेशन वार्ड में 4 दिन में डिप्थीरिया से पीड़ित 4 बच्चे भर्ती हुए

पहले से डेंगू की मार झेल रहे नाैनिहालाें में अब जानलेवा बीमारी डिप्थीरिया (गलघाेंटूू) का संक्रमण फैल रहा है। राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय के आइसाेलेशन वार्ड में पिछले 4 दिन में डिप्थीरिया से पीड़ित 4 बच्चे भर्ती हुए। इनमें एक बच्चे की माैत हाे गई और गंभीर हालत में एक बच्चे काे जयपुर रैफर किया है। सभी बच्चे अलवर व भरतपुर जिले के मेवात के हैं। ये बच्चे 9 से 12 अक्टूबर के बीच अस्पताल में भर्ती हुए। डाॅक्टराें का कहना है कि बच्चाें में वैक्सीनेशन नहीं हाेने से संक्रमण फैला है।

भरतपुर जिले की कामां तसहील के लालपुर गांव निवासी 6 साल के रिजवान पुत्र इस्माइल काे 9 अक्टूबर काे आइसाेलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया। इसी दिन लक्ष्मणगढ़ के माैजपुर गांव के 6 साल के अरफान पुत्र आरिफ काे भी डिप्थीरिया पाॅजिटिव हाेने पर भर्ती किया। अरफान काे कुछ देर बाद परिजन किसी दूसरे अस्पताल में ले गए। इसके अगले दिन 10 अक्टूबर काे खैरथल के 5 साल के अवनेश पुत्र ताहिर काे गंभीर हालत में भर्ती किया गया। इस बच्चे की कुछ देर बाद ही मृत्यु हाे गई। 12 अक्टूबर काे तिजारा के रायपुर गांव की 7 साल की सरीना पुत्री हसमुद्दीन काे आइसाेलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर हाेने पर बच्ची काे जयपुर रैफर कर दिया है।

डेंगू का प्रकोप : 52 बेड पर 125 बच्चे भर्ती

इन दिनाें फैले डेंगू बुखार के कारण गीतानंद शिशु चिकित्सालय में एक बेड पर दाे से तीन मरीज बच्चाें काे भर्ती कर इलाज करना पड़ रहा है। यहां राेजाना 15 से 20 गंभीर बीमार बच्चे पहुंच रहे हैं। जांच में इनमें 70 प्रतिशत केस डेंगू के निकल रहे हैं। पिछले 15 दिन से ताे हालत यह हैं कि अस्पताल पहुंच रहे गंभीर बीमार बच्चाें में ज्यादातर की प्लेटलेट 20 से 25 हजार ही आ रही है।

बच्चाें के पेट में पानी, उल्टी दस्त, चक्कर आना और लीवर में सूजन की भी शिकायत है। डेंगू का वायरस किडनी पर असर कर रहा है। ऐसे गंभीर बच्चाों काे भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। गीतानंद शिशु चिकित्साल के प्रभारी डाॅ. साेमदत्त गुप्ता का कहना है कि अस्पताल में 52 बेड हैं। इन पर 125 से अधिक बच्चे भर्ती हैं। पिछले कुछ दिन से सीरियस मरीज ज्यादा आने लगे हैं।

मरीजों की संख्या इतनी अधिक है कि बेड कम पड़ गए हैं। सरकारी अस्पताल आने वाले किसी भी मरीज काे हम इलाज से मना नहीं कर सकते। ऐसे में मजबूरी में हमें एक बेड पर 2-3 मरीजाें काे भर्ती कर इलाज करना पड़ रहा है।शिशु अस्पताल के बैड ताे फुल चल ही रहे हैं। इमरजेंसी में भी सुबह से रात तक मरीजों की लाइन नहीं टूट रही है।

यहां अलवर ही नहीं आसपास के जिलाें और हरियाणा तक से मरीज आते हैं। माैसमी बीमारियों के चलते अस्पताल का आउटडाेर भी इन दिनाें राेजाना 500 से अधिक चल रहा है। शिशु चिकित्सालय में बैड कम हाेने से बच्चे ताे परेशानी झेल ही रहे हैं, उनके परिजनों का दर्द भी कम नहीं है। भर्ती बच्चे के पास परिजनाें काे बैठने के लिए बैंच भी नहीं है। ऐसे में जब परिजन खड़े खड़े थक जाते हैं, ताे बच्चाें के बैड पर बैठने और लेटने के लिए मजबूर हाेते हैं।

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