विश्व रेबीज दिवस आज:4 साल में 2.19 लाख लाेगों काे कुत्तों ने काटा, तुरंत वैक्सीन लगवाई, रेबीज के इंफेक्शन से बचाई जान

अलवर2 महीने पहलेलेखक: राजकुमार जैन
  • कॉपी लिंक

अगर आप रात में सड़क या गली मोहल्ले में निकल रहे हैं तो कुत्तों से सावधान रहें। जिले में 4 साल में 2.19 लाख लाेगाें काे कुत्ताें ने काट लिया। कुत्ताें के काटने के सर्वाधिक मरीज अलवर शहर 31 हजार और तिजारा में 34 हजार से अधिक लोग सीएचसी में पहुंचे हैं। ये वे लाेग हैं जाे समय पर अस्पताल पहुंचे और एंटी रेबीज वैक्सीन लगवा कर रेबीज के बैक्टीरिया इंफेक्शन से सुरक्षित हाे गए।

लेकिन गांवों में ऐसे भी लोगों की संख्या काफी होती है, जो वैक्सीन न लगवाकर अपने स्तर पर ही इलाज कर जिंदगी को खतरे में डाल लेते हैं। क्योंकि कुत्ते के काटने पर लापरवाही जिंदगी के लिए खतरा बन सकती है। इस साल विश्व रेबीज दिवस रेबीज-वन हेल्‍थ, जीरो डेथ्‍स की थीम पर मनाया जा रहा है।

डब्‍ल्‍यूएचओ के अनुसार रेबीज लासा वायरस से इंफेक्‍टेड जानवरों के काटने की वजह से इंसानों में फैलता है। चिकित्सा विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो अलवर शहर में 31 हजार 476 लोग कुत्ते काटने पर एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने जिला अस्पताल पहुंचे हैं,

क्योंकि रात 10 बजे बार शहर की सड़कों पर कुत्तों का कब्जा रहा है। रेलवे स्टेशन, स्टेशन रोड, रोड नंबर 2, ट्रांसपोर्ट नगर, एनईबी, होप सर्कस, बस स्टैंड, दाउदपुर फाटक आदि जगहाें पर कुत्तों से लोगों में दहशत है। इन मार्गों से राहगीर या दुपहिया वाहन चालक का निकलना दूभर है।

इसके बावजूद नगर परिषद ने पीपुल्स फॉर एनिमल्स के विरोध के कारण दो साल पहले कदम पीछे खींच लिए और अब तक हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 में 57 हजार 992, 2020 में 58 हजार 417, वर्ष 2021 में 55 हजार 558 और वर्ष 2022 में 47 हजार 762 लोगों ने कुत्तों ने काट लिया।

कुत्ते, बिल्ली व बंदर के काटने से हाेता है रेबीज
कुत्ते, बिल्ली व बंदर के काटने से होने वाली बीमारी। रेबीज़ एक विषाणु जनित बीमारी है। मरीज को शुरू के एक-दो दिन में बुखार, भूख न लगना, कमजोरी, चिड़चिड़ापन आदि की समस्या होने लगती है। जानवर के काटने से हुए जख्म में तेज दर्द, जलन और खिचाव रहता है और 2-3 दिनों बाद न्यूरोलॉजिकल सिम्टम शुरू होते हैं।

जिले में कुत्ते के काटने के केस अधिक हैं और लगातार बढ़ रहे हैं। ये स्ट्रीट डॉग की बहुतायत के कारण हो रहा है। इन पर अंकुश बेहद जरूरी है, जिसके लिए अभियान चलाकर इन्हें स्टरलाइजेशन की जरूरत है। इन्हें पकड़ें और स्टरलाइज कर उसी स्थान पर छोड़ दें। क्योंकि स्थान बदलने पर ये और आक्रामक हो जाते हैं और कुत्तों में आपस में भी संघर्ष बढ़ जाता है।
-डॉ. महेश बैरवा, डिप्टी सीएमएचओ

एक्सपर्ट व्यू : कुत्ते के काटने वाली जगह को साबुन से रगड़कर धोएं
अगर किसी को कुत्ते, बंदर या बिल्ली ने काट लिया है तो उस स्थान को साफ पानी और साबुन से रगड़कर धोएं, जिससे उस स्थान से वैक्टीरिया साफ हो जाए। तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में ले जाकर एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाएं, जो हर सरकारी अस्पताल में निशुल्क उपलब्ध है।

इसमें लापरवाही जानलेवा हो सकती है। हालांकि जो पालतू कुत्ते वेक्सीनेटेड होते हैं, उनसे रेबीज का खतरा कम होता है। लेकिन स्ट्रीट डॉग के काटने से रेबीज हो सकता है। अगर रेबीज का वायरस शरीर में चला गया तो जानलेवा हो सकता है। इसलिए रिस्क नहीं लेना चाहिए। लोगों को इसके लिए जागरूक होने की जरूरत है।
-डॉ. याेगेश उपाध्याय, सर्जन जिला अस्पताल

खबरें और भी हैं...