दवा का टोटा:डेंगू व वायरल के प्रकाेप के बीच दवा का संकट बढ़ा, अलवर सहित 6 जिलाें में पैरासिटामाेल टेबलेट खत्म

अलवर2 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
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  • मरीज बढ़ने से दवा की खपत बढ़ी, अब अस्पतालाें काे अपने स्तर पर टेबलेट खरीद के लिए दे रहे एनओसी

काेराेना के बाद अब डेंगूऔर वायरल के प्रकाेप के बीच बुखार के मरीजाें के लिए दवा का संकट हाे गया है। प्रदेश के 6 जिलाें में एक सप्ताह से पैरासिटामाेल टेबलेट नहीं है। मरीजाें की संख्या 2 से 3 गुना बढ़ने के कारण बुखार की दवा की खपत बढ़ गई है।

दवा सप्लाई करने वाली राजस्थान मेडिकल सर्विसेज काॅर्पाेरेशन लिमिटेड (आरएमएससीएल) के पास टेबलेट का स्टाॅक नहीं है। जिन जिलाें में टेबलेट खत्म हुई, वहां कुछ दिन ताे दूसरे जिलाें से मंगवाकर पूर्ति की गई। अब घटते स्टाॅक के कारण उन्हाेंने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।

यहां भी पैरासिटामाेल खत्म हाेने के कगार पर

  • अजमेर मेडिकल काॅलेज के औषधि भंडार में 19600 टेबलेट बची हैं। यहां 4 महीने में 2.72 लाख टेबलेट की खपत हुई है।
  • जयपुर मेडिकल काॅलेज के औषधि भंडार में 22 हजार 500 टेबलेट शेष हैं। 4 महीने में 12.11 लाख टेबलेट की खपत हुई है।
  • गंगानगर के जिला औषधि भंडार में 22 हजार 100 टेबलेट का स्टाॅक है। यहां 4 महीने में 21.50 लाख टेबलेट की खपत हुई है।

अलवर के 871 चिकित्सा संस्थानाें में राेजाना 19 हजार मरीजाें की ओपीडी

डेंगू और वायरल के प्रकाेप से पहले अकेले अलवर जिले में 9 हजार की ओपीडी थी, जबकि वर्तमान में औसतन राेजाना 19 से 20 हजार की ओपीडी चल रही है। अकेले जिला अस्पताल में राेजाना करीब 1300 से 1500 माैसमी बीमारियाें के मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं और वार्ड फुल हैं। अलवर में 1 जिला अस्पताल, 2 सेटेलाइट अस्पताल, 41 सीएचसी, 122 पीएचसी, 8 शहरी पीएचसी और 697 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं। करीब 500 डेंगू मरीज जिले में अब तक मिल चुके हैं।

जिला औषधि भंडार में पैरासिटामाेल 500 एमजी टेबलेट का स्टाॅक खत्म हाे गया है। अब जिन सीएचसी व पीएचसी में पैरासिटामाेल टेबलेट नहीं है, वहां के लिए अपने स्तर पर खरीद के लिए उन्हें एनओसी दी जा रही है, जिससे मरीजाें काे परेशानी नहीं हाे। अभी जिला अस्पताल और सीएचसी व पीएचसी स्तर पर ऑनलाइन रिकाॅर्ड में करीब 6 लाख पैरासिटामाेल टेबलेट का स्टाॅक है। बुखार के मरीज बढ़ने से दवा की खपत अधिक बढ़ी है। चार महीने में ही 17.74 लाख टेबलेट की खपत हाे चुकी है।
-डाॅ. छबील कुमार, प्रभारी, जिला औषधि भंडार अलवर

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