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आंधी और बारिश में उड़े किसानों के तंबू:राशन सहित अन्य सामान भी बिखर गया, बोले- अब और मजबूती से अस्थाई रूप से पक्के निर्माण करने की तैयारी

अलवर24 दिन पहले
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बॉर्डर पर इस तरह बिखरे तम्बू। - Dainik Bhaskar
बॉर्डर पर इस तरह बिखरे तम्बू।

कृषि कानूनों के विरोध में अलवर के शाहजहांपुर हरियाणा बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों के 10वीं बार अंधड़ बारिश में तम्बू उड़ गए। शनिवार देर शाम को बारिश आंधी में तंबुओं के साथ राशन सहित अन्य सामान भी बिखर गया। इससे पहले भी करीब 9 बार किसानों के सामने यह चुनौती आई है। सर्दी के दिनों में भी किसान भीग गए थे और बीमार हुए थे। उसके बाद कई बार ओलावृष्टि और आंधी ने किसानों के तंबुओं को उड़ा दिए। राशन भी भीग जाने से अतिरिक्त इंतजाम करने पड़े हैं।

इस बार दो-तीन किसानों को चोट भी आई
शनिवार शाम को अंदर में बारिश के दौरान तंबू टूटे तो दो किसानों को चोट भी आई। उनके घायल होने के बाद प्राथमिक उपचार कराया गया। बार-बार प्राकृतिक परेशानियों को लेकर किसानों का कहना है कि अब और मजबूती से तंबू व अस्थाई रूप से पक्के निर्माण करने की तैयारी है। ताकि बारिश में किसानों को परेशानी नहीं हो।

कई बार तंबू बनाए कई बार उड़े
किसान नेता बलबीर छिल्लर व राजाराम मील का कहना है कि किसान अपनी मांगों को लेकर ओले, बारिश में भी किसान कष्ट झेलने को मजबूर हैं लेकिन पीछे हटने को तैयार नहीं। उनका कहना है कि किसानों के हक में लड़ाई लड़ रहे हैं जान भी गई तो देखा जाएगा। अलवर के शाहजहांपुर हरियाणा बॉर्डर पर 12 दिसंबर से लगातार नेशनल हाईवे पर किसानों का पड़ाव जारी है।

हाल ही में राकेश टिकैत ने कहा वापस नहीं लौटेंगे
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत हाल ही में शाहजहांपुर हरियाणा बॉर्डर पर आए तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि किसान वापस नहीं लौटेंगे जब तक कानून वापस नहीं होंगे। चाहे यह लड़ाई कितनी ही लंबी चले। इसी तरह दिल्ली सहित कई राज्यों के बॉर्डर पर भी आंदोलन चलते रहेंगे।

अब फिर से किसान तंबू खड़ा करने में जुट गए
बॉर्डर पर फिर से किसानों ने अपने तंबू खड़े कर लिए हैं। कुछ तंबू अभी टूटे हुए हैं उनको दुरुस्त करने का काम जारी है। अब गर्मी के दिनों में बार-बार आंधी से यह परेशानी और बढ़ेगी। जिसे देखते हुए किसान कुछ अतिरिक्त इंतजाम करने की योजना में लगे हैं। ताकि उनको बार-बार परेशानी नहीं हो। असल में यहां काफी बुजुर्ग किसान हैं। कोरोना महामारी के साथ अब भीषण गर्मी और लू का असर रहेगा। जिससे भी किसानों को बचने की चुनौती है।

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