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राजस्थान के अलवर से ट्रैक्टर परेड:किसानों की शाहजहांपुर बॉर्डर पर वापसी शुरू, हाईवे पर 25 किमी लंबे जाम के कारण मानेसर तक नहीं पहुंच सके

अलवर4 महीने पहलेलेखक: धर्मेंद्र यादव
शाहजहांपुर-खेड़ा बॉर्डर पर​​​​​​ राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र के किसानों ने सुबह 11 बजे से दिल्ली की तरफ जाना शुरू किया।

अपडेट्स...
शाम 6 बजे: किसान शाहजहांपुर बॉर्डर पर लौटने लगे। हाईवे पर अपने टेंट में पहुंच गए।
शाम 4 बजे: हाईवे पर मानेसर के पास सुबह से ही 25 किमी. लंबा जाम लगा था। इस कारण ज्यादातर किसान मानेसर तक नहीं पहुंच पाए।
दोपहर 3 बजे: बॉर्डर से जल्दी निकले कुछ किसान मानेसर तक पहुंच गए। लेकिन, पुलिस ने उन्हें रोक दिया। आगे नहीं जाने दिया।
दोपहर 2 बजे: दिल्ली में किसानों के उत्पात के बाद मानेसर में बड़ी संख्या में फोर्स लगा दी। वाहनों को आगे नहीं जाने दिया गया।
दोपहर 1 बजे: RLP सांसद हनुमान बेनीवाल 60 ट्रैक्टरों के जत्थे के साथ शाहजहांपुर बॉर्डर पहुंचे। कुछ दूर गए, फिर वापस आ गए।
सुबह 11 बजे: बॉर्डर से किसानों ने दिल्ली की तरफ कूच शुरू किया। करीब 3000 वाहनों में 15 से 18 हजार किसान ट्रैक्टर परेड में शामिल हुए।
सुबह 10.50 बजे: पहला ट्रैक्टर इस आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले शहीदों के नाम का निकाला गया।

मंगलवार को सुबह से शाम तक किसान आंदोलन...

राजस्थान में अलवर जिले के शाहजहांपुर बॉर्डर से किसानों का मंगलवार को दिल्ली कूच शांतिपूर्ण रहा। सुबह 11 बजे से शाहजहांपुर से किसानों ने दिल्ली की तरफ बढ़ना शुरू किया। परेड के लिए पहला ट्रैक्टर इस आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले शहीदों के नाम का निकला। दोपहर 2 बजे तक करीब 3000 से ज्यादा वाहन, जिनमें ट्रैक्टर से ज्यादा जीप और कारें थीं, मानेसर के लिए रवाना हुईं। वाहनों पर तिरंगा और किसान यूनियन के झंडे लगे थे। साथ ही देशभक्ति के गाने बज रहे थे।

हाइवे पर 25 किमी लंबा जाम, मानेसर तक ही नहीं पहुंच पाए ज्यादातर किसान
हरियाणा सरकार ने शाहजहांपुर बॉर्डर से जाने वाले किसानों को जयपुर-दिल्ली हाईवे पर मानेसर तक जाने की अनुमति दी थी। मानेसर शाहजहांपुर बॉर्डर से 65 किमी दूर है। कार्यक्रम था कि वहां सरकारी स्कूल में किसान ध्वजारोहण करेंगे और फिर लौट आएंगे। मानेसर से दिल्ली की दूरी करीब 50 किमी है। लेकिन, हाईवे पर इतना जाम लगा था कि बहुत बड़ी संख्या में किसान मानेसर तक भी नहीं पहुंच पाए। लंबे जाम के कारण वह वापस लौट आए। वहीं, कुछ किसान वहां पहुंचे तो पुलिस ने आगे नहीं जाने दिया। ऐसे में वह वहां नारेबाजी करते हुए बैठ गए।

15 से 18 हजार किसान जुटे, बुजुर्ग टेंट में ही रहे
शाहजहांपुर बॉर्डर पर करीब 15-18 हजार किसान मंगलवार सुबह तक जुट गए। इनमें राजस्थान के साथ ही हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र के किसान भी थे। हरियाणा पुलिस ने 1500 ट्रैक्टर और हर ट्रैक्टर पर 3 लोगों को जाने की अनुमति दी थी। सुबह ही पुलिस ने दिल्ली की तरफ जाने वाले हाईवे से बैरिकेडिंग हटा दी थी। किसी भी वाहन को पुलिस ने नहीं रोका। जिन ट्रैक्टर और जीप में 5 से 7 लोग बैठे थे, उन्हें भी नहीं रोका। वहीं, दिल्ली कूच में ज्यादातर युवा किसान ही गए। बुजुर्ग किसान बॉर्डर पर लगे टेंट में ही रहे।

2 दिसंबर से शुरू हुआ था आंदोलन
नए कृषि कानूनों के खिलाफ अलवर के शाहजहांपुर बॉर्डर पर 2 दिसंबर को आंदोलन शुरू हुआ था। 12 दिसंबर से किसानों ने जयपुर-दिल्ली हाईवे की एक लेन में अपना डेरा जमा लिया। यानी 12 दिसंबर से जयपुर से दिल्ली जाने वाली लेन बंद हो गई। फिर 25 दिसंबर से हाईवे की दोनों लेन पूरी तरह बंद हो गई। तभी से दिल्ली-जयपुर हाईवे पूरी तरह से बंद है। करीब 55 दिनों से चल रहे इस आंदोलन की खास बात इसका शांतिपूर्ण रहना है। मंगलवार को भी दिल्ली कूच के दौरान किसी तरह की हिंसा नहीं हुई।

फोटो में किसान आंदोलन....

दिल्ली की तरफ कूच: शाजहांपुर बॉर्डर में हरियाणा पुलिस ने जयपुर-दिल्ली हाईवे पर लगा रखा बैरिकेडिंग हटा दिया। हटाते ही किसान परेड दिल्ली की तरफ बढ़ चली।
दिल्ली की तरफ कूच: शाजहांपुर बॉर्डर में हरियाणा पुलिस ने जयपुर-दिल्ली हाईवे पर लगा रखा बैरिकेडिंग हटा दिया। हटाते ही किसान परेड दिल्ली की तरफ बढ़ चली।
आंदोलन में भी संभाला मोर्चा: किसानों के दिल्ली कूच में महिलाएं भी शामिल हुईं। कुछ महिलाएं ट्रैक्टर लेकर आई थीं। आखिर रोटी का मामला था। पीछे कैसे रह जातीं।
आंदोलन में भी संभाला मोर्चा: किसानों के दिल्ली कूच में महिलाएं भी शामिल हुईं। कुछ महिलाएं ट्रैक्टर लेकर आई थीं। आखिर रोटी का मामला था। पीछे कैसे रह जातीं।
आंदोलन भी अनुशासन भी: यह फोटो दिल्ली-जयुपर हाईवे पर ड्रोन से ली गई है। इसमें किसान आंदोलन का अनुशासन साफ नजर आया।
आंदोलन भी अनुशासन भी: यह फोटो दिल्ली-जयुपर हाईवे पर ड्रोन से ली गई है। इसमें किसान आंदोलन का अनुशासन साफ नजर आया।
ट्रैक्टर, जीप, एसयूवी सब: किसानों ने दिल्ली कूच को ट्रैक्टर परेड का नाम दिया था। लेकिन इसमें ट्रैक्टर से ज्यादा जीप और एसयूवी नजर आई।
ट्रैक्टर, जीप, एसयूवी सब: किसानों ने दिल्ली कूच को ट्रैक्टर परेड का नाम दिया था। लेकिन इसमें ट्रैक्टर से ज्यादा जीप और एसयूवी नजर आई।
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