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बड़े नेताओं की पंसदीदा जगह बहरोड मिड-वे:पहले घाटे का सौदा बता बंद किया, अब वापस कांग्रेस सरकार ने चालू किया तो मौजूदा किसान आंदोलन का असर भी पड़ रहा

अलवरएक महीने पहले
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बहरोड़ मिड वे। - Dainik Bhaskar
बहरोड़ मिड वे।

नेशनल हाईवे 48 पर बहरोड़ में आरटीडीसी मिड-वे में पूर्व प्रधांनमंत्री अटल विहारी वाजपेयी सहित अनगिनत बड़े नेता अपना जन्मदिन मना चुके हैं। पहले बंद हो चुके इस मिड वे को पुन: चालू करने के बाद वापस पटरी पर लाने के प्रयास तेज हो गए हैं। अब यहां पहले की तरह जल्द ही यात्रियों को रात्रि विश्राम करने और लजीज व्यंजनों लुत्फ भी मिल सकेगा।

इसके लिए मिड-वे प्रबंधन लगा हुआ है। फिलहाल यहां प्रतिमाह करीब 3.25 लाख रुपए की बिक्री जारी है। पिछली बार भाजपा सरकार ने मिड वे को घाटे का सौदा बता बंद कर दिया था। अब बहरोड़ के विधायक बलजीत यादव के प्रयास से गहलोत सरकार ने वापस मिड वे को शुरू किया है। अब इसका नाम बहरोड़ मिड-वे से बदल कर “सावन-भादो मिड-वे रेस्टोरेंट रखा गया। यहां राजस्थान रोड़वेज की डिलक्स एवं सुपर डिलक्स बसों का ठहराव किया जा रहा है। कोरोना के बाद अब मिड-वे को हरियाणा बॉर्डर पर किसान आंदोलन का बड़ा असर पर पड़ रहा है। जीएम रामस्वरुप गुर्जर ने बताया कि किसान आंदोलन के कारण देशी-विदेशी पर्यटक नहीं आ रहे हैं। निजी वाहनों वाले पर्यटक भी कम हैं। आगामी कुछ महीने में यहां रात्रि विश्राम के लिए कमरों की बुकिंग शुरू हो जाएगी। 22 में से 13 कमरे करीब-करीब तैयार हैं।

2017 में बंद किया
बहरोड़ मिड-वे का कभी मुनाफा दो करोड़ रुपए से ज्यादा था। यहां 65 कर्मचारी काम करते थे। राजस्थान रोडवेज की दिल्ली आने-जाने वाली बसें बहरोड़ रुकती थी। 2013 के बाद राजस्थान रोडवेज की बसों का यहां ठहराव कम हो गया। इसके बाद आय लगातार कम हो गई।अगस्त 2017 में सरकार ने मिडवे को बंद कर दिया। उस समय सरकार ने मिड वे को बचने की तैयारी कर ली थी।
बड़े नेताओं की पंसदीदा जगह रही
आरटीडीसी कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष तेजसिंह राठौड़ ने बताया कि यहां पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपना जन्मदिन मना चुके हैं। उपराष्ट्रपति, केन्द्रीय मंत्री, विभिन्न राज्यों के राज्यपाल, सीएम, पूर्व सीएम, डिप्टी सीएम, विभिन्न प्रदेशों के केबिनेट मंत्री, सांसद सहित सीजेआई, न्यायापालिका प्रशासनिक एवं राजनैताओं का मिड-वे पसंदीदा रहा है।

- प्रतिदिन 30 से 35 बसों का ठहराव
आरएसआरटीसी के रूट इंचार्ज मनोज कुमार यादव ने बताया कि मिड-वे पर प्रतिदिन 21 से 22 वोल्वों बसें एवं 12 से 15 एक्सप्रेस बसों का आवागमन ठहराव होता है। यहां से दिल्ली से दूर जाने वाली सवारियां भी रोजाना से 5 से 10 मिलती है। मिड-वे के ठहरने से रोड़वजे को यात्रीभार तो मिलता ही है, वहीं सवारियों को भी सुविधाएं मिल रही है। किसान आंदोलन का असर रोड़वेज पर भी पड़ रहा है। क्योंकि आंदोलन के समय से वोल्वो एवं एक्सप्रेस बसें बहरोड़ से खैरथल होते हुए भिवाड़ी से निकलकर दिल्ली जा रही है। जिससे यात्रीभार में परेशानी आ रही है। जिससे रोड़वेज को कुछ नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। यदि वोल्वों एवं एक्सप्रेस बसों को सीधा निकालने की व्यवस्था हो तो मिडवे एवं रोड़वेज दोनों को यात्रीभार बढ़ने से मुनाफा होगा।

फोटो व कंटेंट: जितेंद्र नरूका, बहरोड़।

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