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प्रशासन की लापरवाही:ढाई कराेड़ की लागत से शहर में बनने थे पांच आधुनिक शौचालय, बने सिर्फ दो, शुरू एक भी नहीं हो सका

अलवर8 महीने पहले
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  • ढाई कराेड़ की लागत से बनने थे, जो दाे बनकर तैयार वे भी डेढ़ साल से बंद हैं

सरकार बदलते ही विकास कार्य रुक गए। इसकी वजह से जनता को जो सुविधा मिलनी थी, वह नहीं मिल सकी। राज्य की पिछली वसुंधरा सरकार के समय बजट में अलवर शहर में 2.50 कराेड़ की लागत से पांच एसी शाैचालय बनाने की घोषणा की गई थी। प्रत्येक आधुनिक सार्वजनिक शौचालय के निर्माण के लिए 50 लाख रुपए की स्वीकृति जारी हुई थी, लेकिन दाे शाैचालय बनने के करीब डेढ़ साल बाद भी शुरू नहीं हाे पाए हैं, जबकि तीन शाैचालय अभी तक बने ही नहीं हैं।

घोषणा के समय कहा गया कि पांच वर्ष तक इन शौचालयों के संचालन व रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की होगी। शौचालयों में एसी, एयर कर्टन, सेनेटरी नेपकिन पैड, वेंडर मशीन, टिश्यू पेपर वेंडर मशीन आदि आधुनिक सुविधाएं हाेंगी। शौचालयों में एक शीट दिव्यांगों के लिए भी रहेगी। शाैचालय बनाने के लिए नगर परिषद की ओर से भगत सिंह सर्किल से अग्रसेन चाैराहा की ओर से जाने वाले ओवरब्रिज के नीचे, दशहरा मैदान, कालीमाेरी फाटक, परशुराम सर्किल के पास व इंदिरा गांधी स्टेडियम में जगह चिन्हित की गई थी।

भगत सिंह सर्किल से अग्रसेन चाैराहा की ओर जाने वाले ओवरब्रिज के नीचे और परशुराम सर्किल के पास के पास एसी शाैचालय बनकर तैयार हाे गए हैं, लेकिन डेढ़ साल बाद भी बाेरिंग नहीं हाेने से पानी कनेक्शन नहीं हाे सका और ना ही सीवरेज कनेक्शन हुए हैं। इंदिरा गांधी स्टेडियम में आधे से ज्यादा निर्माण पूरा होने के बाद काफी समय से शाैचालय का निर्माण कार्य बंद है। दशहरा मैदान में शाैचालय निर्माण काे लेकर पुरुषार्थी समाज और मुस्लिम समुदाय के लोगाें काे आपत्ति है।

पुरुषार्थी समाज का कहना है कि वहां दशहरा के दिन रावण के पुतले का दहन हाेता है। वहीं मुस्लिम समुदाय का कहना है कि कर्बला मैदान के पास शाैचालय नहीं बनना चाहिए। कालीमाेरी रेलवे फाटक के पास शाैचालय बनाने के लिए नींव भराई के बाद निर्माण कार्य बंद है। यहां शाैचालय वाले स्थान काे लेकर आपत्ति है। नगर परिषद की ओर से अभी तक दूसरी जगह तलाश नहीं की गई है।
जिन शाैचालयों का निर्माण पूरा हाे चुका है, उन्हें चालू करने की जल्द प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जहां शाैचालय निर्माण की जगह काे लेकर विवाद है, उसके स्थान पर नई जगह तलाश की जाएगी।
- बीना गुप्ता, सभापति नगर परिषद
जनहित में एसी शाैचालय बनाने का निर्णय लिया गया था। सरकार बदलने के बाद इच्छा शक्ति के अभाव में पांच में से तीन शाैचालयाें का निर्माण कार्य नहीं हाे पाया है, जाे दाे शाैचालय बने हैं, वे भी शुरू नहीं किए गए हैं। जनहित के कार्याें काे लेकर राजनीति नहीं हाेनी चाहिए।
- अशाेक खन्ना, पूर्व सभापति नगर परिषद

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