उड़ान योजना के सैनेटरी नैपकिन का मामला:अफसरों के सामने बोली छात्राएं-15 मिनट में हो जाते हैं खराब

अलवर7 दिन पहले
महिला अधिकारी को दिखाए घटिया नैपकिन।

सरकार की उड़ान योजना के तहत घटिया सैनेटरी नैपकिन आंगनबाड़ी, स्कूल, कॉलेजों में वितरित करने का मामला अलवर कलक्टर के सामने आने के बाद टीम जांच करने पहुंची छात्राओं ने खुलकर अपनी बात रखी। जब छात्राओं ने कहा कि नैपकिन लगाने के कुछदेर बाद ही सिकुड़ने लगता है। रूई बाहर आती है।

छात्राएं बोलीं- 1 घंटे भी ढंग से काम नहीं करता। मौके पर एक महिला अधिकारी ने नैपकिन को देखकर इतनाभी कहा कि लग तो रहा है कि रूई जल्दी बाहर आती है। एक कॉलेज छात्रा बोली कि नैपकिन एक घंटे भी अच्छे से नहीं चलते हैं। उनके कपड़े खराब हो जाते हैं। नैपकिन की रूई बाहर आने के बाद रक्त स्राव से कपड़े भी खराब हो जाते हैं। ऐसा पिरीयड्स के पहले व दूसरे दिन ही होता है। जब अधिक रक्त स्राव होता है। बाकी अगले 4 दिन कम रक्त स्राव में काम का कह सकते हैं।

शर्म के कारण नहीं बताती छात्राएं

किशनगढ़बास के चोरोटी पहाड़ गांव में राइजिंग राजस्थान से जुड़ी छात्रा व किशोरियों से आंगनबाड़ी, मेडिकल विभाग व प्रशासन की टीम जांच करने पहुंची तो पता लगा कि छात्राएं शर्म के कारण नहीं बताती है। वरना उड़ान योजना के तहत मिल रहे नैपकिन इतने घटिया हैं कि पीरियड के पहले दो दिन लगा नहीं सकते।

लगाने के एक घंटे में ही कपड़े खराब होने लग जाते हैं। छात्रा बाेली की वह एक ही दिन कॉलेज में ये नैपकिन लगाकर गई तो उसके कपड़े खराब हो गए। फिर दूसरी छात्राओं सेचर्चा की तो पता लगा कि उनके साथ भी ऐसा हो चुका है। लेकिन, इससे पहले किसी को बताते शर्म करती रही।

छात्राओंने खुलकर रखी अपनी बात। अफसर भी नैपकिन घटिया लग रहे।
छात्राओंने खुलकर रखी अपनी बात। अफसर भी नैपकिन घटिया लग रहे।

अब कलक्टर के सामने रखी समस्या

अब एक दिन पहले अलवर कलक्टर की जनसुनवाई में राइजिंग राजस्थान से जुड़ी छात्रा व किशोरी अलवर पहुंची। यहां कलक्टर को सैनेटरी नैपकिन की हकीकत बताई। साथ में नैपकिन के बॉक्स भी लेकर आई। इसके बाद कलक्टर ने तुरंत जांच के आदेश दिए थे। तब अगले दिन शनिवार को दो-तीन टीमें जांच करने पहुंची। फिर छात्राओं ने गांव में भी खुलकर अपनी परेशानी को उनके सामने रखा था।

ये सैनेटरी नैपकिन के बॉक्स दिखाए। जो पैक थे। ताकि अफसरों का नहीं लगे कि कोई गड़बड़ हो सकती है।
ये सैनेटरी नैपकिन के बॉक्स दिखाए। जो पैक थे। ताकि अफसरों का नहीं लगे कि कोई गड़बड़ हो सकती है।

तब महिला अधिकारी बोली ये दिख भी रहा

जांच के दौरान जब छात्राओं ने नैपकिन दिखाते हुए कहा कि इनकी रुई निकलने लग जाती है। कुछ ही मिनट बादमें ये सिकुड़ जाता है। कई बार तो अपने आप गिर भी जाता है। कई नैपकिन की महिला अधिकारियों ने जांच की। तब उनको लगा तो एक महिला अधिकारी बोली कि ऐसा दिख भी रहा है।

ये अधिकारी गांव में जांच करने पहुंचे थे।
ये अधिकारी गांव में जांच करने पहुंचे थे।

जांच के बाद भी अफसर हकीकत छुपा रहे

जांच कर चुकी टीम हकीकत बताने से कतरा रही है। डॉ लीना ने कहा कि फोन पर नहीं बता सकते। महिला अधिकारिता विभाग के जुगल किशोर ने कहा कि हम केवल सैंपल लेने गए थे। जांच करने वाली टीम दूसरी है। एसडीओ प्यारेलाल ने कहा कि जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए 3 दिन का समय दिया गया है। हम राइजिंग राजस्थान के बारे में जानकारी करने गए थे।

डॉ छबील ने साफ कहा कि सैनेटरी नैपकिन दिखने में सही लगते हैं। जांच के बाद शिकायत है। अब इसके सैंपल की जांच होने के बाद ही पता लग सकेगा। कई बार यूज करने के तरीके पर भी रिजल्ट डिपेंड करता है। कंपनी के नैपकिन के सैंपल की पुरानी रिपोर्ट भी ठीक है।

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