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  • If A Person Of Any Religion Dies In The Epidemic, Only A 15 member Team Of Alwar City Council Reaches The Cemetery And Crematorium

अब सिर्फ इंसानियत से अंतिम संस्कार:महामारी में किसी भी धर्म के व्यक्ति की मौत हो, अलवर नगर परिषद की 15 सदस्यों की टीम ही पहुंचती है कब्रिस्तान और श्मशान घाट

3 महीने पहले
गुरुवार को कब्रिस्तान में मृतकों का दाह संस्कार करने पहुंची टीम।

कोरोना महामारी ने इतना बिखेर दिया है कि अब धर्म से बड़ी इंसानियत की तस्वीर सामने आने लगी है। अलवर शहर के शांतिकुंज स्थित कब्रिस्तान में शुक्रवार को इसका सबसे बड़ा उदाहरण देखने को मिला। यहां इसाई धर्म के व्यक्ति की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार करने नगर परिषद की टीम पहुंची। इस टीम में अधिकारी से लेकर सफाईकर्मी सभी हिन्दू थे। जिन्होंने पहले इसाई धर्म के जानकारों से उनकी अंतिम संस्कार की प्रक्रिया का समझा। इसके बाद उसी के अनुरूप केरल के निवासी मृतक पुष्पराज काे दफनाया। जिसकी कोरोना संक्रमण से घर पर ही मौत हो गई थी। परिवार से उसका बेटा ही आ सका था। यह परिवार फिलहाल अलवर के अम्बेडकर नगर में है।

मौत के बाद घर पहुंची टीम
पुष्पराज का बेटा सेंट एन्सलम्स स्कूल में शिक्षक है। व्यक्ति पहले से होम आइसोलेशन में था। जिसकी शुक्रवार को मौत हो गई। सूचना के बाद मेडिकल टीम घर पहुंची। वहां से नगर परिषद की टीम शव का अंतिम संस्कार करने के लिए कोरोना प्रोटोकॉल के तहत शांतिकुंज कब्रिस्तान लेकर आई। नगर परिषद के एईएन राजकुमार सैनी ने बताया कि इस महामारी में हर धर्म के लोगों का अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। पहली बार इसाई धर्म के व्यक्ति का अंतिम संस्कार करना पड़ा तो इससे पहले आवश्यक जानकारी ली गई। ताकि धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार हो सकें।

दो एंबुलेंस और 15 जनों की टीम
नगर परिषद में कोरोना संक्रमण से मौत होने पर प्रत्येक शव का अंतिम संस्कार करने का जिम्मा ले रखा है। उनकाे सूचना मिलते ही वे मृतक का शव लेने पहुंचते हैं। इसके बाद सम्बंधित श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया जाता है। जिसके लिए दो एंबुलेंस और 15 कर्मचारियों की टीम लगा रखी है। हर दिन अकेले अलवर शहर में उनकी टीम आठ से 9 लोगों का अंतिम संस्कार कर रही है। कई बार यह संख्या घट-बढ़ जाती है।

सबसे अधिक तीजकी में हो रहे अंतिम संस्कार
अलवर शहर में सबसे अधिक तीजकी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार हो रहे हैं। यहां औसतन सात से आठ व्यक्तियों के शव पहुंचते हैं। कई बार यह संख्या बढ़ जाती है। इसी तरह शहर के अन्य श्मशान घाटों पर भी अंतिम संस्कार जारी है। कोरोना संक्रमण से मौत का सिलसिला कम नहीं हो सका है। अस्पतालों में भी बुरा हाल है। मरीजों को ऑक्सीजन बेड नहीं मिल पा रहे। वहीं वेंटिलेटर के बिना मरीज दम तोड़ रहे हैं।

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