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भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट:डॉक्टर काे दिखाना है ताे खाना-पानी लाना होगा, क्योंकि यहां पर्ची से लेकर जांच तक चाहिए 6 घंटे

अलवर2 महीने पहले
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बेहाल चिकित्सा व्यवस्था, अधिकतर स्थानों पर जांच की सुविधा भगवान भरोसे, स्टाफ की भी कमी। - Dainik Bhaskar
बेहाल चिकित्सा व्यवस्था, अधिकतर स्थानों पर जांच की सुविधा भगवान भरोसे, स्टाफ की भी कमी।
  • डेंगू और वायरल से अस्पतालों में लगने लगी मरीजों की कतार

जिले में डेंगू और वायरल का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है , 17 साल की एक बालिका की माैत भी हाे चुकी है परंतु सरकारी सिस्टम मरीजों काे इलाज के साथ साथ दर्द भी दे रहा है। जिले के सबसे बड़े अस्पताल में एक मरीज को दिखाने का मतलब चार से छह घंटे का समय और सरकारी मशीनों की खराबी के कारण जांच में हजारों रुपयों का खर्च ही मिल रहा है। वर्तमान में हालात यह है कि सामान्य जांच भी मरीज को बाहर से करवानी पड़ रही है।

भास्कर के दस रिपोर्टरों ने मंगलवार को जिले के दस अस्पतालों में चार घंटे रहकर स्थिति को जाना। जिम्मेदार अधिकारियों काे इस बात की काेई फिक्र नहीं है कि हॉस्पिटल में आने के बाद जब पूरा दिन खराब हाे रहा है ताे दर्द कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में मरीजों के पास सरकार का काेसने के अलावा काेई दूसरा चारा नहीं दिखता है। सामान्य चिकित्सालय में इन दिनों लगभग हर जगह पर लाइन लगी दिख जाएंगी।

लाइनों में लगने के बाद घंटों इंतजार में भले ही मरीज अपने दर्द काे कुछ समय के लिए भूल जाता हाे, लेकिन लंबे समय तक वह सिस्टम की लापरवाही और उदासीनता का दर्द नहीं भूल पाता है। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में देखा कि ओपीडी में सिर्फ दाे डाक्टर ही मरीजों काे देख रहे थे, लेकिन बाहर भीड़ 300 से ज्यादा पहुंच चुकी थी। आपको बताते हैं विस्तार से हॉस्पिटल मैनेजमेंट का मिस मैनेजमेंट मरीजों पर कैसे भारी पड़ रहा है। जिले के लगभग सभी अस्पतालाें का हाल खराब है।

सरकारी सिस्टम का सच : इतनी लापरवाही फिर भी सुनने को कोई तैयार नहीं

सेंट्रल लैब में 8 दिन से बायोकेमिस्ट्री मशीन खराब, 16 तरह की जांच निजी लैब पर करा रहे सरकारी अस्पताल के मरीज -बायाेकेमिस्ट्री मशीन का बैकअप नहीं हाेने से 4 साल से आ रही दिक्कत, लेकिन अभी तक नहीं खरीदी नई मशीन,डाॅक्टर ओपीडी से मरीजों काे शुगर, हार्ट, लीवर, किड़नी और दर्द की जांच ताे लगातार लिख रहे हैं, लेकिन लेकिन लैब में जांच ही अपनी पीड़ा काे लेकर लैब में पहुंचने वाले मरीज मायूस हाेकर लाैट रहे हैं।

हालात ये हैं कि मरीजों काे मुख्यमंत्री निशुल्क जांच योजना में मुफ्त हाेने वाली इन जांचों काे निजी लैबाें पर महंगी दराें पर कराने काे मजबूर हाेना पड़ रहा है। लैब में सिर्फ जरूरी भर्ती मरीजों की ही शुगर, यूरिया, एसजीओटी व एसजीपीटी की जांच की जा रही हैं। इस मशीन में राेजाना ओपीडी के करीब 250 से 300 मरीजों के सैंपल लगाए जाते हैं।

कभी विशाल मां की गाेद का सहारा लेता ताे कभी मां विशाल की गाेद में लेट जाती
मामला 60 फुट राेड निवासी विशाल और उसकी मां सुषमा, दो घंटे से बैठे है, पर्ची पर नंबर 157 है अभी 84 नंबर चल रहा है। करीब दो घंटे बाद नंबर आएगा, उसके बाद डॉक्टर ने जॉच लिख दी तो वह भी करानी है। दाेनाें बड़ी लाचारी भरी निगाहों से अपने टाेकन की आवाज का इंतजार करते-करते एक दूसरे का सहारा लेकर साे जाते हैं। कभी विशाल अपनी मां की गाेद में सिर टिका लेता ताे कभी मां विशाल की गाेद का सहारा लेकर अपनी बारी का इंतजार करती हुई दिखी।

पता नहीं कब तक नंबर आएगा, राेटी-सब्जी लेकर वहीं खाने लगी ज्ञान काैर
मामला बांबोली निवासी ज्ञान काैर का है। ज्ञान काैर का नंबर 270वां है। सुबह की आई हुई बैठी हैं और अभी तक दूर-दूर तक नंबर आने की काेई उम्मीद नहीं दिख रही है। काफी देर इंतजार के बाद जब वह थक गई ताे वहीं अपनी राेटी सब्जी निकाली व खाना शुरू कर दिया। सरकार की काेई योजना ज्ञानकाैर काे राहत नहीं दे पा रही है। ऐसे में उसने कम से कम अपना पेट भिंडी की सब्जी व राेटी से भरना ही ठीक समझा। ज्ञानकाैर काे आंखों की समस्या है।

सुबह 4 बजे गांव से चले , लेकिन 10.30 तक काेई राहत नहीं, आखिर क्या करें

बांबाेली निवासी रिंकू अपने भाई अरविंद काे लेकर गांव से सुबह 4 बजे ही चल दिया। गांव से यही साेचकर चला था कि समय से पहुंच जाएंगे ताे जल्दी नंबर आ जाएगा। अरविंद काे पेट दर्द की समस्या है। सोनोग्राफी कक्ष के बाहर करीब 20 मरीज खड़े हुए हैं, लेकिन सोनोग्राफी करने वाले डाक्टर साहब का काेई अता-पता नहीं है। जिस डाक्टर काे सोनोग्राफी करनी है उन्हें डिप्टी कंट्रोलर का चार्ज दिया हुआ है। इसलिए वहां का काम निपटाने के बाद आएंगे।

बुखार से तड़प रहा था, इलाज नहीं, इंतजार में जमीन पर ही नींद आ गई

कैमाला निवासी शेखर तेज बुखार से तड़प रहा है, और जमीन पर अपने पिता की गाेद में लेटा हुआ है। लेकिन हॉस्पिटल में संभालने वाला काेई नहीं है। हार-थककर अपने पिता अख्तर की गाेद में ही लेट गया। जमीन पर लेटे अख्तर के लिए सरकार के तमाम दावे और योजनाएं बेईमानी जैसे दिख रहे हैं। पिता अख्तर ने बताया कि उनका 94वां नंबर है और करीब सवा दाे घंटे से इंतजार में हैं। बेटे काे तेज बुखार है। हमारी किस्मत में सिर्फ इंतजार ही है।

लाेड अधिक हाेने के कारण मशीन जल्दी खराब हाे रही है। अभी बैकअप में भी मशीन उपलब्ध नहीं है। मशीन की डिमांड कर रखी है।-डाॅ. तरुण यादव, सेंट्रल लैब प्रभारी

अस्पताल में डाॅक्टराें की कमी है। यहां चार फिजीशियन की सख्त आवश्यकता है। निदेशालय और सीएमएचओ काे डिमांड की हुई है।-डाॅ. सुनील चाैहान, पीएमओ

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