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  • In 33 Districts, 14891 E Mitra Plus Machines Worth 3.72 Billion Were Installed, The Public Is Not Getting The Services Of Three Thousand Machines.

भास्कर विशेष:33 जिलाें में 3.72 अरब की 14891 ई-मित्र प्लस मशीनें लगा भूली सरकार, जनता काे तीन हजार मशीनों की सेवाएं भी नहीं मिल रही

अलवर2 महीने पहलेलेखक: राजकुमार जैन
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धूल में अटी बस स्टैंड पर लगी मशीन, ऑफिसाें में शुरू ही नहीं - Dainik Bhaskar
धूल में अटी बस स्टैंड पर लगी मशीन, ऑफिसाें में शुरू ही नहीं

प्रदेश में डिजिटल सेवाओं काे सुगम बनाने के लिए 3 साल पहले शुरू किया ईमित्र प्लस प्राेजेक्ट नाकारा साबित हुआ है। सरकार ने करीब 3.72 अरब खर्च कर 33 जिलाें में 14 हजार 891 ईमित्र प्लस मशीनें ताे लगा दी, लेकिन फिर उनकी सुध ही नहीं ली। इसलिए राेजाना एक चाैथाई मशीनें भी नहीं चल पा रही हैं। भाजपा की वसुंधरा राजे सरकार में लगाई इन मशीनों को लेकर सरकारी सिस्टम की लापरवाही का नतीजा ये रहा कि सरकारी कार्यालयाें और बस स्टैंड पर रखी मशीनाें पर धूल जम रही है। सरकार ने वाहवाही लूटने के चक्कर में सभी मशीनाें काे इंस्टाॅल ताे करा दिया, लेकिन फिर इनकी ओर पलटकर नहीं देखा।

इसी कारण लाेग जमाबंदी की नकल, मूल निवास, बिजली, पानी के बिल, माेबाइल बिल, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, अटेंडेंस, बस टिकट आदि सेवाओं के लिए इन मशीनाें का उपयाेग नहीं कर रहे हैं। प्रदेश में लगी इन मशीनाें के ट्रांजेक्शन की एक साल की दैनिक रिपाेर्ट की दैनिक भास्कर ने पड़ताल की ताे सरकारी सिस्टम की पाेल खुल गई, जिसमें आधी भी मशीनें भी राेजाना संचालित नहीं मिली। हालात ये हैं कि 14891 में से एक दिन में 3 से साढ़े 3 हजार मशीनें ही मुश्किल से चल पा रही हैं। किसी दिन ताे ये मशीनें डेढ़ से दाे हजार का आंकड़ा भी नहीं छू पा रही हैं।

मशीनाें का संचालन हाे, इसलिए ऑपरेटर के रूप में इन्हें आसपास के ईमित्राें से मैप किया गया, लेकिन मशीन के बिजली खर्च के आगे ज्यादातर ईमित्राें से हाथ खड़े कर दिए। हालांत ये है कि 70 फीसदी मशीनों को ई-मित्र संचालक चालू ही नहीं कर पा रहे है। जिससे मशीने भी खराब हो रही है। उल्लेखनीय है कि ईमित्र प्लस मशीनें जून 2018 से सरकारी कार्यालयाें में पहुंचने वाले लाेगाें काे मल्टीपल सेवाओं की एक छत के नीचे सुविधा देने के लिए सरकार की ओर से लगाई गई थी।

  • सितंबर में काेराेना भी नहीं, फिर भी एक दिन में सर्वाधिक 3364 मशीनें ही चली, सरकारी कार्यालयाें में बंद
  • भाजपा की वसुंधरा राजे सरकार ने आमजन को डिजिटल सेवाएं देने के लिए लगाई थीं मशीनें
  • हकीकत- धूल में अटी बस स्टैंड पर लगी मशीन, ऑफिसाें में शुरू ही नहीं

केन्द्रीय बस स्टैंड

अलवर आगार और मत्स्य नगर आगार बस स्टैंड पर एक-एक मशीन हैं। 2018 में लगी मशीनाें पर इतनी धूल है कि इन पर लगे निर्देश भी दब गए हैं। मशीनाें पर मकड़ी के जाले लगे हुए हैं।

पीआरओ कार्यालय

पीआरओ कार्यालय में वर्ष 2019 में ईमित्र प्लस मशीन लगाई गई। मशीन काे इंस्टाॅल ताे कर दिया, लेकिन अभी तक शुरू नहीं हाे सकी है।

सीएमएचओ कार्यालय

सीएमएचओ कार्यालय में एक मशीन लगाई गई। दाे साल तक मशीन बंद पड़ी रही। मशीन काे चलाने पर स्क्रीन से सब कुछ गायब है। इसलिए इसका उपयाेग नहीं हाे रहा है।

सच सरकारी आंकड़े
सच सरकारी आंकड़े

इन मशीनाें का मल्टीपल उपयाेग है। काेराेना के कारण गडबडाई सेवाओं काे अब इंप्रूव किया जा रहा है। हमारे विभाग के कर्मचारी अटेंडेंस भी मशीन से कर रहे हैं। वेब कास्टिंग और ब्राॅडकास्टिंग मशीनाें के जरिए ही हाे रहा है। जिन विभागाें में मशीनें लगी हैं उनकी भी जिम्मेदारी है कि उनका जनहित में उपयाेग हाे। बस स्टैंड पर लगी इन मशीनाें में टिकट की सुविधा थी, परिवहन निगम अधिकारियाें ने ध्यान ही नहीं दिया।-आरके शर्मा, अतिरिक्त निदेशक, सूचना एवं प्राैद्याेगिकी विभाग जयपुर

मशीनों को ई-मित्रों से मैपिंग किया हुआ है। जिसकी जिम्मेदारी ई-मित्र संचालकों की है। अगर मशीने नहीं चल रही है तो ई-मित्र संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जो मशीनें खराब है उनका निरीक्षण कर सही कराया जाएगा।-वीरेंद्र त्यागी, उपनिदेशक, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग, अलवर