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अलवर में हाेली के रंग:गांव हो या शहर, होली के रंग में कोरोना की गाइडलाइन की धज्जियां उड़ते दिखी

अलवर3 महीने पहले
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ये अलवर का साइक्लिंग क्लब है। जिसने जयसमंद पर जाकर होली मनाई। - Dainik Bhaskar
ये अलवर का साइक्लिंग क्लब है। जिसने जयसमंद पर जाकर होली मनाई।

न कोरोना जुबां पर न गाइडलाइन का पालन। शहर से ज्यादा गांवाें में होली का रंग बिखरा। पहले की तरह कहीं डीजे पर नाचते गाते निकले। कहीं युवाओं के झुण्ड होली पर गुलाल बिखेरते निकले। कोरोना संक्रमण के कारण इस बार सरकार की गाइडलाइन जारी जरूर हुई लेकिन, कहीं कोई पालना नजर नहीं आई। खास बात यह रही है कि अलवर शहर के अलावा कहीं कोई प्रशासन की सख्ती नजर नहीं आई। न पहले प्रशासन की ओर से आमजन को जागरूक किया गया।

खूब रंगा जब मिले संग। हर जगह बिना मास्क के होली खेलते नजर आए।
खूब रंगा जब मिले संग। हर जगह बिना मास्क के होली खेलते नजर आए।

गांवों में न मास्क न दूरी
गांवों में होली खेलने वालों के बीच कहीं कोई मास्क नजर नहीं आया। दो गज की दूरी तो छोड़िए खूब गले लगे और जमकर गुलाल व रंग लगाया। शहरों में भी कुछेक लोगों के चेहरे पर ही मास्क दिखा। बाकी सब बिना मास्क के धुलंडी खेलते नजर आए।

पुराने दिनों जैसी होली नहीं
कोरोना के कारण इतना फर्क जरूर आया कि पहले गांवों में गोबर, कीचड़, तेल सहित मनमर्जी तरीके से होली खेलते थे। इस बार ऐसा बहुत कम देखने को मिला। दूसरा बदलाव यह जरूर देखा गया कि कोरोना के कारण होली खेलने से काफी लोग बचे हैं। कोरोना से पहले ज्यादातर लोग घरों से बाहर रहते थे। इस बार युवाओं की संख्या ही ज्यादा नजर आई।

रंग में रंगे दोस्त। कांच में खुद को देखने लगे।
रंग में रंगे दोस्त। कांच में खुद को देखने लगे।

क्लब में भी कम होली
अलवर साइक्लिंग क्लब सहित कई क्लब व संगठनों ने होली खेली लेकिन, सीमित दायरे में। पहले की तरह झुण्ड के झुण्ड नजर नहीं आए। साइकिल क्लब तो जयसमंद पर होली खेलने पहुंचा।