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लक्ष्मी पूजन से पहली श्मशान में सती माता की पूजा:सुबह गांव की महिला व बच्चे जाते हैं श्मशान, शाम को होती घर-घर लक्ष्मी की पूजा

अलवर3 महीने पहले
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श्मशान में पूजन करने जाती महिलाएं। - Dainik Bhaskar
श्मशान में पूजन करने जाती महिलाएं।

अलवर जिले के बानसूर के गांव गूंता में अनूठी परम्परा है। दीपावली के त्यौहार के दिन गांव की महिला व बच्चे श्मशान घाट जाकर सती माता की पूजा करते हैं। वहीं शाम को घर-घर लक्ष्मी की पूजा होती। सती माता की पूजा कर लोग परिवार के सदस्यों की लम्बी उम्र व खुशहाली की कामना करते हैं। यह रिवाज पिछले करीब 1 दशक से ज्यादा हुआ है।
नई शादी हो या नवजात का जन्म
गांव में खासकर किसी के घर में नई शादी हुई हो या नवजात का जन्म। ऐसे अधिकतर परिवार दिवाली के दिन श्मशान घाट पर सती माता की पूजा करने जाते हैं। खासकर महिलाओं के साथ ही छोटे बच्चे पहुंचते हैं। वहां पूजा अर्चना करते हैं। परिवार के सदस्यों की लम्बी उम्र की कामना की जाती है। ऐसी भी मान्यता है कि बीमार सदस्य के ठीक होने की मनोकामना करने से काम हो जाता है।

सती माता के पूजन करती गांव की महिलाएं। साथ में छोटे बच्चे।
सती माता के पूजन करती गांव की महिलाएं। साथ में छोटे बच्चे।

वापस आते समय दिवाली की शुभकामनांए
महिलाएं एक दूसरे को दीपावली की शुभकामनाएं भी देती है। बच्चों व बड़ों के नाम से भी पूजा होती है। गांव की महिलाएं समूह में जाती है। कुछ अपने-अपने वाहनों से जाते है तो काफी पैदल निकलती है। वहां पहुंचने वाली नव विवाहित गांव की बुजुर्ग महिलाओं का विशेष सम्मान भी करती है। उनको ढोक भी देती है।

पुरुष नहीं जाते हैं
एक और खास बात यह है कि सती माता के केवल महिलाएं व बच्चे ही अधिक जाते हैं। पुरुष नहीं जाते हैं। पुरुष वही नजर आते हैं जो वाहनों से महिलाओं को लेकर जाते हैं। बाकी सब महिला व बच्चे ही होते हैं। साल दर साल यह परम्परा बढ़ने लगी है। अब तो करीब-करीब हर घर से महिला व बच्चे पहुंचते हैं।