भिवाड़ी के उद्यमियों ने कसी कमर:इस साल 15% तक लगाया इंक्रीमेंट; भीड़ कम रखने के लिए शिफ्ट भी बढ़ाई, लिफ्ट का उपयोग बंद किया

भिवाड़ी8 महीने पहले
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फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो।

कोरोना की दूसरी लहर से पार पाने के लिए भिवाड़ी के उद्यमियों ने भी कमर कस ली है। कंपनियों में अपने स्तर पर पूरे इंतजाम किए जा रहे हैं। सुबह-शाम परिसर को सेनेटाइज किया जा रहा है। मास्क पहनकर काम करना अनिवार्य कर दिया है। यह समय कंपनियों में इंक्रीमेंट का भी है।

मजदूर इस लहर से भयभीत ना हो और अधिक उत्साह से काम करें इसलिए 15% तक तनख्वाह भी बढ़ाई गई है। जबकि पहले यह आठ फीसदी तक ही बढ़ाई जाती थी। भास्कर ने इसी तैयारी को लेकर भिवाड़ी के उद्यमियों से बातचीत की-

मेगाटेक इंटरनेशन प्रा.लि.-एडवांस वापस नहीं लिया, तनख्वाह 15% बढ़ाई
सीमेंट प्लांट के लिए मशीने तैयार करने वाली मेगाटेक इंटरनेशनल प्रा.लिमिटेड में 80 कर्मचारी काम करते हैं। कंपनी में 27 से अधिक देशों के लिए काम किया जाता है। प्रबंध निदेशक प्रवीण शर्मा के अनुसार गत वर्ष कोरोनाकाल में काफी समय तक प्लांट बंद रखना पड़ा। बावजूद इसके एक भी मजदूर की तनख्वाह नहीं काटी। जिन मजदूरों को एडवांस पैसा दिया था। उनसे भी वापस नहीं लिया।

यही कारण है कि एक भी मजदूर हमारे यहां से छोड़कर नहीं गया। हम पूर्व में 10 फीसदी तक हर साल इंक्रीमेंट लगाते थे। इस बार हमने इसे 15 फीसदी तक कर दिया है।

कमल वायर : दो शिफ्टों में कर दिया काम, पर्याप्त डिस्टेंस भी जरुरी
ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनी कमल वायर में 250 मजदूर काम करते हैं। इसमें पूर्व में एक शिफ्ट में काम होता था। लेकिन पिछले दिनों कोरोना के मामले बढ़ने के बाद प्रबंधन ने काम दो शिफ्टों में बांट दिया है। कंपनी के पार्टनर प्रवीण लांबा के अनुसार दो शिफ्टों में काम बंटने से अधिक भीड़ नहीं होती। मशीनों के बीच में गैप भी बढ़ा दिया है।

लंच के समय में भी मजदूरों को एक साथ एकत्रित नहीं होने देते। कंपनी में मास्क पहन काम करने दिया जा रहा है। जिन मजदूरों की उम्र 45 साल से अधिक है, उनके लिए वैक्सीनेशन भी अनिवार्य कर दिया है। कंपनी ने 12% तक इंक्रीमेंट लगाया है।

आदिनिद मेटल : होनहार बेटियों का खर्चा उठा रहे, 10% तनख्वाह भी बढ़ाई
स्क्रेब प्रोसेसिंग का काम करने वाली आदिनिद मेटल की प्रबंधक निदेशक रितिभा के अनुसार उनकी दोनों ही कंपनियों में 25 मजदूर काम करते हैं। कंपनी मजदूरों की होनहार बेटियों की पढ़ाई का पूरा खर्चा वहन करती है। फिलहाल कंपनी के खर्चे पर पांच बेटियां पढ़ रही हैं। मजदूरों की बहन-बेटियों की शादी में भी कंपनी मदद करती है।

रितिभा का मानना है कि इन मजदूरों के दम पर ही कंपनी चल पा रही है। गत वर्ष भी कोई मजदूर कंपनी छोड़कर नहीं गया। कंपनी को दिन में दो बार सेनेटाइज किया जा रहा है। लंच का समय भी हमने सभी अलग-अलग कर दिया है।

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