दशहरा पर विशेष:लंकापति रावण ने अलवर के रावण देहरा गांव में की थी तपस्या, यहीं से सोना ले गया और बनवाई सोने की लंका

अलवर2 महीने पहलेलेखक: बृजमोहन शर्मा
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बीरबल का माेहल्ला स्थित मंदिर में स्थापित प्रतिमा। - Dainik Bhaskar
बीरबल का माेहल्ला स्थित मंदिर में स्थापित प्रतिमा।
  • रावण देहरा गांव में मिली थी पार्श्वनाथ की प्रतिमा, जिस मंदिर में यह स्थापित की, उस मंदिर का नाम पड़ा रावण पार्श्वनाथ मंदिर

राजस्थान के अलवर शहर से करीब तीन किलाेमीटर दूर प्रतापबंध के पास वह स्थान है, जहां लंकापति रावण ने तपस्या की थी। इस स्थान पर बसे गांव काे रावण देहरा कहा जाता है। कुछ लोग इस गांव को रावण डेरा या रावण देवरा के नाम से भी जानते हैं। इस गांव से जैन समाज के तीर्थंकर पार्श्वनाथ की प्रतिमा निकली थी। इस प्रतिमा काे अलवर शहर के बीरबल का माेहल्ला स्थित जैन मंदिर में स्थापित किया गया है। इस मंदिर का नाम भी रावण पार्श्वनाथ मंदिर है।

जिले में रहने वाले भाेपा जाति के लाेग एक वाद्ययंत्र बजाते हैं, इस वाद्ययंत्र का नाम भी रावण हत्था है। अलवर में बीणक नाम का एक गांव भी है, जहां के लाेग कहते हैं कि यहां के राजा ने रावण के अहंकार पर चाेट की थी। रावण देहरा के लाेगों का कहना है कि हमारे पूर्वज बताते रहे हैं कि रावण ने इस स्थान पर तपस्या की थी।

इसके साथ ही श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन समाज लाेग मानते हैं कि उनके प्राचीन ग्रंथाें में भी इसका उल्लेख मिलता है। देवराज इंद्र के कहने पर रावण ने पारस की प्राप्ति के लिए अलवर के समीप आकर तपस्या की थी। यहां पर उसने डढीकर के राजा अजयपाल के कहने पर कैलाश पर्वत से लाकर तप करने के स्थल (अब रावण देहरा) में भगवान पार्श्वनाथ की मूर्ति की स्थापना की। इसके बाद यहां रावण काे पारस पत्थर मिला और रावण यहीं से साेना बनाकर पुष्पक विमान से ले गया और साेने की लंका बनाई। इस गांव में जैन मंदिराें के अवशेष आज भी माैजूद हैं।

बीणक के राजा ने रावण के अहंकार पर चाेट की थी

सिलीसेढ़ के पास गांव बीणक के लाेगाें का कहना है कि उनके पूर्वज भी यह किस्सा सुनते रहे कि यहां रावण आया था। यहां के राजा से मिलने के लिए उसने एक किसान से पता पूछा। रावण ने किसान काे बताया कि मैं लंकापति रावण हूं और तुम्हारे राजा काे युद्ध की चुनाैती देने आया हूं। किसान ने कहा कि राजा मैं ही हूं। किसान के रूप में हल जाेत रहे राजा ने उसी समय जमीन पर ही लंका का नक्शा बनाकर दिखाते हुए कहा कि ये तुम्हारी लंका है ना।

इसके इस भाग काे मैं यहीं से क्षतिग्रस्त कर देता हूं। तुम जाकर देख आओ। इसके बाद युद्ध करने की साेचना। रावण ने लंका जाकर देखा ताे वास्तव में लंका का वह भाग पूरी तरह क्षतिग्रस्त मिला। इसके बाद रावण के अहंकार काे चाेट पहुंची। ऐसी लाेककथाएं यहां के लाेक कलाकार भी सुनाते हैं। रावण देहरा व बीणक अरावली पर्वत में ही बसे गांव हैं।

रावण पार्श्वनाथ मंदिर का इतिहास :

बीरबल का माेहल्ला स्थित रावण पार्श्वनाथ मंदिर में स्थापित पार्श्वनाथ की प्रतिमा रावण देहरा गांव से ही प्राप्त हुई थी। बीरबल का माेहल्ला स्थित पार्श्वनाथ मंदिर के अध्यक्ष जितेंद्र काेठारी दावा करते हैं कि भगवान रावण पार्श्वनाथ की प्रतिमा 11 लाख वर्ष से अधिक पुरानी है।

इस प्रतिमा काे रावण ने कैलाश पर्वत से लाकर तप करने के स्थान यानी रावण देहरा में स्थापित किया था और पूजा अर्चना की थी। इसके बाद उन्हें पारस मिला था। इस मूर्ति की स्थापना अकबर के शासन काल में रंगक्लश महाराज ने बीरबल का माेहल्ला की एक हवेली में कराई थी। इस कारण मंदिर का नाम रावण पार्श्वनाथ पड़ा। इस मंदिर के दर्शन के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से श्वेतांबर जैन समाज के लाेग आते हैं।

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