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  • Last Year There Was An Emphasis On Making Food And Drink In Homes, This Time The Story Of Every Household Became The Fun Of Social Media.

जीना सीखो:पिछले साल घरों में खाने-पीने की चीजें बनाने पर जोर था, इस बार सोशल मीडिया की मस्ती बन गई हर घर की कहानी

अलवर14 दिन पहले
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  • युवाओं से लेकर सौ साल की अम्मा भी इनमें शामिल, सभी से कह रहे खुश रहना है तो ऐसे जीना सीखो

जी, हां यह काेराेना की दूसरी लहर है, इस बार कष्ट भी अलग तरह के है ताे मस्ती भी। पिछली बार आपने देखा हाेगा कि लाेग घराें में बैठे थे ताे कोई पत्नी के साथ कचोरी बना रहा था तो कोई रसोई में हाथ बंटा रहा था, इस तरह की खबरें भी छपी और सोशल मीडिया पर लोगों ने हाउस हसबैंड के नाम से अपने आपको प्रचलित भी किया।

इस बार मामला बदल गया, मार ज्यादा करने लगा तो लोग तनाव में ज्यादा आने लगे पर इसके बाद आदमी समझने लगा और कुछ को छोड़ दें तो घरों पर मस्ती का जमकर आलम होने लगा। इस बार सोशल मीडिया पर जलेबी बनाता पति सामने नहीं आ रहा बल्कि मस्ती के वीडियो आ रहे है। घरों में अनेक महिलाओं ने इस बार पेड़-पौधे लगाने का अभियान भी छेड़ रखा है। घर पर ही कचरे से खाद भी बना रही है। इसी तरह के कुछ उदाहरण हम आपके सामने पेश कर रहें है-

चार पीढ़ी एक साथ मस्ती, यानी नानी की नहीं अब दादी की कहानी
वैशाली नगर का एक घर, घर में सौ साल की अम्मा और तीन माह का पड पौता। पड पौता अभी बोलता नहीं है, पर पूरा परिवार मस्ती कर उसके साथ मस्ती कर रहा है। जब घर में रहना था तो क्या करते, घर की बहू कामनी, अंग्रेजी स्कूल में बच्चों को पढ़ाती है, बस क्या था मन किया और यू ट्यूब चैनल बना डाला, चैनल बिजनेस के लिए नहीं, खुद के और आपके मनोरंजन के लिए।

घर में अब जब मन करता है कुछ भी मस्ती भरी बातें रिकार्ड करते है, कभी कभी डांस भी, कभी चुटकुले। तैयार किया और सोशल मीडिया पर जारी कर देते है। लोगों की प्रतिक्रियाओं और अपने काम से खुश होते है। सास शीला देवी, ससुर रवि शर्मा, पति नितिन, बड़ा बेटा भाग्य व तीन माह का भविष्य अब मस्ती से लॉकडाउन को पूरा करने में लगे है। कहते है यही तो जिंदगी है।

ये रहे युवाओं की जिंदगी के बदलाव को मस्ती में बदलने वाले
नाम प्रशांत खंडेलवाल, सरकारी स्कूल में प्राध्यापक है। उनके दोस्त और गांव के लोग कहते है स्कूल में बहुत अच्छा काम करते है, करना भी चाहिए सरकार जो वेतन देती है। पर, यहां उनकी खबर इसलिए कि वे युवाओं में उस बदलाव को लाने की ताकत दे रहे है जिसे लोग अभी तक या तो कर नहीं पाते थे या करते थे तो कुछ छिपछिपाकर। परिवार के साथ मस्ती के क्षणों को दूसरों की प्रेरणा बनाना। वे ऐसे फोटो और वीडियो लोगों के लिए सोशल मीडिया पर डालते है जिससे लगे कि खुश रहने के एक नहीं ढेर सारे तरीके है। कुछ दिन पहले उनकी शादी की सालगिरह थी, तो पत्नी के साथ वह वीडियो भी शेयर कर दिया जिसमें वे मस्ती के मूड में नजर आ रहे है।

इनके पूरे घर की मस्ती दो साल के अस्तित्व में
अस्तित्व यानी घर का सबसे छोटा सदस्य। ये है मुंशी बाग की उषा भार्गव का घर। लॉकडाउन चल रहा है, घर में यू तो पढ़ने लिखने का काम भी चलता है पर कब तक, एक दिन में 24 घंटे, कुछ समय सोने का, कुछ पढ़ने का और काफी समय उस अस्तित्व का जो अभी दुनिया को नहीं जानता। खास बात है पापा अंकित व मम्मी रूचि हर रोज अस्तित्व के साथ ही लॉक डाउन को पूरा कर रहे है।

कई बार उसकी चालाकी, उसका नटखटपन सोशल मीडिया पर डाल यह भी बता देते है कि आज मस्ती की कौनसी क्लास थी, यानी गीत गाया, कुछ पढ़ाने का ड्रामा, डांस की क्लास या कुछ और। मतलब लगता है ज्यादातर परिवारों ने पतियों के बारे में पिछली बार आए घर के काम करने वाले वीडियो को चुनौती दे दी है।

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