नवरात्र का पहला दिन:मंदिराें और घराें में हुई घट स्थापना

अलवर12 दिन पहले
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बस स्टैंड स्थित देवी मंदिर में शाम काे आरती में शामिल श्रद्धालु। - Dainik Bhaskar
बस स्टैंड स्थित देवी मंदिर में शाम काे आरती में शामिल श्रद्धालु।
  • कई श्रद्धालु पर्यटक बन पहुंचे करणी माता मंदिर

गुरुवार से शारदीय नवरात्र प्रारंभ हाे गए। मंदिराें और घराें में अभिजित मुहूर्त में घट स्थापना की गई। कई लाेगाें ने उपवास भी रखा। देवी मंदिराें में अनुष्ठान प्रारंभ हुए। पूर्वांचल विकास सेवा समिति की ओर से बख्तल की चाैकी पर 6 दिवसीय दुर्गा पूजनाेत्सव का शुभारंभ हुआ। इस साल दूसरी बार भी करणी माता का मेला स्थगित कर दिया गया है। नवरात्र के दूसरे दिन शुक्रवार को ब्रह्मचारिणी माता की पूजा की जाएगी। भगवान शंकर को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए ब्रह्मचारिणी ने घोर तपस्या की थी।

कहते हैं मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्वसिद्धि प्राप्त होती है। इस देवी की कथा का सार यह है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए। करणी माता का मेला स्थगित होने के बावजूद काफी लाेग नवरात्र के पहले दिन बाला किला स्थित करणी माता मंदिर पहुंचे। कई लाेग पर्यटक बनकर अपने चाैपहिया वाहन व वन विभाग की जिप्सी से वहां तक गए। श्रद्धालुओं ने करणी माता मंदिर में मत्था टेक पूजा अर्चना कर प्रसाद चढ़ाया और मन्नत का डाेरा बांधा।

मंदिर के महंत घनश्याम शर्मा ने बताया कि सुबह अभिजित मुहूर्त में घट स्थापना की गई। दुर्गा सप्तशती का पाठ हुआ। प्रतिदिन सुबह हवन और दुर्गा सप्तशती का पाठ हाेगा। 14 अक्टूबर काे हवन की पूर्णाहुति हाेगी। मेला नहीं हाेने के बावजूद राेजगार की उम्मीद से कुछ थड़ी वाले करणी माता जाने के लिए आए लेकिन वन विभाग के कर्मचारियाें ने उन्हें वहां जाने से मना कर दिया। इसके बाद थड़ी वाले गेट के पास ही बैठ गए।

बाला किला से जब लाेग लाैटे ताे किसी ने थड़ी लगाने वालाें से हाथ पर नाम लिखाया ताे किसी ने टेटू गुदवाया, किसी ने चावल के दाने पर अपना नाम लिखवाया। महिलाओं और युवतियाें ने हाथाें में मेहंदी लगवाई। मनुमार्ग स्थित लक्ष्मीनारायण मंदिर के महंत पं. राजेंद्र शर्मा ने बताया कि अभिजित मुहूर्त में घट स्थापना की गई। इसके बाद रामचरित मानस पाठ और दुर्गा सप्तशती पाठ प्रारंभ हुए। 14 अक्टूबर काे इनका समापन हाेगा।

कलश स्थापना हुई:

पूर्वांचल विकास सेवा समिति के अध्यक्ष लक्षमेश सिंह ने बताया कि 6 दिवसीय मां दुर्गा पूजनाेत्सव के तहत गुरुवार काे बख्तल की चाैकी पर विधि विधान के साथ कलश स्थापना की गई। 11 अक्टूबर काे बेल ताेरण का कार्यक्रम हाेगा, 13 अक्टूबर काे निशा पूजा, 14 अक्टूबर काे हवन और कन्या पूजन हाेगा। 15 अक्टूबर काे मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया हाेगा।

इन मंदिराें में भी हुए कार्यक्रम:

मालाखेड़ा बाजार स्थित वैष्णाे देवी मंदिर के महंत पं. नरेश पाराशर ने बताया कि गुरुवार काे रामचरित मानस पाठ प्रारंभ हुआ। प्रतिदिन दाेपहर काे मंदिर में कीर्तन व संध्या आरती के बाद भक्ति संगीत का कार्यक्रम हाेगा। 13 अक्टूबर अष्ठमी काे हवन हाेगा। 14 अक्टूबर नवमी काे रामचरित मानस पाठ संपन्न हाेगा। सागर ऊपर स्थित मंसा माता मंदिर के महंत ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि प्रतिदिन शाम काे आरती के बाद कीर्तन हाेगा।

13 अक्टूबर को अष्टमी की रात काे हवन हाेगा। बस स्टैंड स्थित चिंतपूर्णी दुर्गा धाम मंदिर के महंत पं. दिनेश शर्मा ने बताया कि प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ, हवन व संध्या आरती के बाद शाम काे भक्ति संगीत का कार्यक्रम हाेगा। जवाहर नगर स्थित रानी सती मंदिर के महंत पं. अजय शर्मा ने बताया कि प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ हाेगा। नवमी काे कन्या पूजन व हवन हाेगा।

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