• Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Alwar
  • Lodgers Hospital's Oxygen Control Panel Meter Malfunctioned, Ventilator Patients Had To Install Cylinders, Reduce Pressure Of Other Patients

ICU में ऑक्सीजन बंद, 1 मरीज की मौत:ऑक्सीजन का कंट्रोल मीटर खराब हुआ, परिजन 4 घंटे चिल्लाते रहे, उनकी नहीं सुनी; बाद में आईसीयू के मरीजों को दूसरी जगह शिफ्ट किया

अलवर6 महीने पहले
लॉडर्स अस्पताल का आइसीयू, जहां

अलवर में गुरुवार रात लॉडर्स डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल में तकनीकी खामी के चलते आईसीयू में सीधे ऑक्सीजन की सप्लायी बंद हो गई। आईसीयू में 5 मरीज भर्ती थे। शिफ्टिंग के दौरान एक मरीज की मौत हो गई। इस बीच, अस्पताल के बाहर परिजनों की चीख-पुकार मच गई। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से मरीजों को दूसरी जगह शिफ्ट करने की मांग की। लेकिन 4 घंटे तक अस्पताल प्रशासन ना-नुकुर करता रहा। बाद में हालात बिगड़े तो आईसीयू के मरीजों को जिला अस्पताल में शिफ्ट किया गया। इसी दौरान एंबुलेंस में एक मरीज की मौत हो गई।

मरीजों को मिली आधी अधूरी सांस
हॉस्पिटल में गुरुवार शाम सात बजे ऑक्सीजन कंट्रोल पैनल का मीटर खराब होने का पता चला। दरअसल, यहां ऑक्सीजन की खपत अचानक बढ़ गई थी। काफी ऑक्सीजन सिलेण्डर में ही बची रह जाती थी। इससे सिलेंडर जल्दी-जल्दी खत्म हो रहे थे। मरीजों को ऑक्सीजन का प्रेशर भी कम मिलने लगा था। जिसकी जांच की गई तो कंट्रोल पैनल का मीटर की खराबी का पता चला।

आईसीयू में सिलेंडर से दी मरीजों को ऑक्सीजन
हॉस्पिटल में अचानक आईसूयी में ऑक्सीजन का मीटर खराब होने के बाद मरीजों को तुरंत दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट करने में देरी की गई। जबकि इस बीच मरीजों के परिजन प्रशासन के आला अधिकारियों से गुहार करते रहे। लेकिन, देर रात तक उनको यही कहा जाता रहा कि मीटर सही होने वाला है। कोई दिक्कत नहीं होगी। ऑक्सीजन की भी कमी नहीं बताई। हालांकि, एक मरीज की मौत के बाद परिजनों ने सीधे आरोप लगाए कि प्रशासन की लापरवाही रही। वे कई घंटे से अवगत कराते रहे। लेकिन, उनकी नहीं सुनी। कई घंटे बाद जब शिफ्टिंग की गई तो एंबुलेंस में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलने से एक ने दम तोड़ दिया। जिसके परिजनों की रात भर चीख पुकार नहीं थमी।

कलेक्टर भी पहुंचे अस्पताल
रात को कलेक्टर नन्नूमल पहाड़िया भी अस्पताल पहुंचे थे। उनको भी यह पता लगा था कि ऑक्सीजन की खपत बहुत अधिक हो रही है। इंजीनियर से जांच कराने पर पता लगा कि मीटर खराब है। इसके बाद मीटर को सही किया जाने लगा। उस बीच मरीजों को वेंटिलेटर की बजाय सीधे सिलेण्डर से ऑक्सीजन दी जाने लगी। तभी से उनकी हालत बिगड़ती गई। समय रहते उनको दूसरे अस्पतालों के आइसीयू में भर्ती किया जाता तो मरीज की जान बच सकती थी। हालांकि प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील चौहान का कहना है कि वेंटिलेटर वाले मरीजों को वेंटिलेटर युक्त एंबुलेंस से अस्पताल लेकर आया गया था।

परिजनों की चीख-पुकार नहीं थमी
करीब सात बजे बाद कई मरीजों के परिजनों को पता लगा कि अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी हो गई है। लेकिन, असल में ऑक्सीजन की कमी नहीं थी। कंट्रोल पैनल का मीटर खराब हुआ था। जिसके कारण मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी। यह सूचना मरीजों के परिजनों को पता लगी तो रात भर नहीं सोए। एक-दूसरे अस्पतालों में सम्पर्क साधते रहे। लेकिन, कहीं उनको बेड नहीं मिला।

व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं
लॉडर्स हॉस्पिटल को सरकार ने पहले भी अधिग्रहण किया था। लेकिन, यहां की व्यवस्थाओं को दुरुस्त नहीं की गई। मेडिकल उपकरण अपडेट किए जाने जरूरी है। ताकि इमरजेंसी में मरीजों की जान आफत में नहीं आए।

खबरें और भी हैं...