यूआईटी की बैठक:यूआईटी कर्मचारियों को करोड़ों के प्लॉट कोड़ियों में देने की लॉटरी निरस्त

अलवर2 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
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आईटी के कर्मचारियों व अधिकारियों काे नियम विरुद्ध तरीके से लॉटरी निकालकर भूखंड आवंटन का निर्णय बुधवार काे आखिर यूआईटी काे निरस्त करना ही पड़ा। जिला कलेक्टर और पदेन यूआईटी चेयरमैन नन्नूमल पहाड़िया ने जनवरी 2021 में जारी राज्य सरकार के आदेश को ताक में रख पांच साल पुराने आदेश से यूआईटी कर्मचारियों काे करोड़ों के भूखंडों की रियायती दर पर लॉटरी निकलवा दी थी। मामला उजागर हुआ और सवाल उठे तो हडकंप मच गया तो चेयरमैन बचाव में आए और कहने लगे कि हमने अभी सिर्फ लॉटरी निकाली है। आवंटन नहीं किया। मामला न्यास में रखा जाएगा इसके बाद राज्य सरकार काे भेजा जाएगा। न्यास या राज्य सरकार काे लगता है कि प्रक्रिया गलत है ताे वह निरस्त कर सकती है।

दरअसल मामला यह है कि यूआईटी में पूर्व सचिव आर्तिका शुक्ला के एपीओ हाेने के बाद पदस्थापित सचिव जितेंद्र नरूका ने यूआईटी कर्मचारियों काे पूर्व संचालित काॅलाेनी में प्लाटों का आवंटन करने के लिए लॉटरी निकाल दी। आवंटन भी कर डाला। यह भी आरक्षित दर की 50 प्रतिशत कम रेट पर। करीब 50 लाख कीमत के प्लॉट काैडियाें के भाव दे दिए। पोल खुली तो खुद सरकार ने संज्ञान ले लिया। पूरे मामले पर तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब भी की गई। गौरतलब है कि अलवर यूआईटी ने 2012 और 2016 में सरकार काे एक प्रस्ताव भेजा कि न्यास कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें रियायती दर पर भूखंड दिए जाएं। जबकि सच ये था कि वर्तमान सरकार ने 4 जनवरी 2021 काे पुराने आदेशों को विलोपित कर नया नोटिफिकेशन जारी किया। इस नोटिफिकेशन में सरकार ने कान ून से भू-आवंटन नियमों में रियायती दर पर आवंटन को हटा दिया। इसके स्थान पर फिक्स दर पर आवंटन का प्रावधान बना दिया। यह आवंटन भी असीमित नहीं था बल्कि सिर्फ 10 प्रतिशत भूखंड राज्य कर्मचारी व सभी स्थानीय निकायों के कर्मचारियों के लिए आरक्षित था। इस नियम को सचिव जितेंद्र नरूका और चेयरमैन पहाड़िया ने ताक में रख दिया और गुपचुप लॉटरी निकाल दी। अपने-अपने लाेगाें काे मनमर्जी से प्लाट की लॉटरी निकलवा दी। यह सब देर शाम पूरा स्टाफ जाने के बाद कलेक्टर की प्रतिनिधि एडीएम सिटी की मौजूदगी में कराया गया।

भास्कर ने पहले बताया था कि निरस्त हाे सकता है आवंटन

यूआईटी के कर्मचारी व अधिकारियों काे रियायती दर पर दिए गए भूखंडों का आवंटन निरस्त हा़े सकता है। दैनिक भास्कर ने 12 सितंबर काे ही यह बता दिया था। प्रमुखता से उठाया था मामला : भास्कर ने मसले पर कलेक्टर से विस्तृत बात की तो इसमें वे ऐसा कोई प्रावधान और आदेश नहीं बता पाए इस आवंटन की वैधानिकता साबित करे। सरकार के जनवरी 2021 के होते हुए पुरानी स्वीकृति को आधार क्यों बनाया गया।

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