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खतरनाक ढंग से बसे लोग:पहाड़ काट कर जगह बनाई, फिर बसा दी लेबर कॉलोनियां, हो सकता है हादसा

अलवर/भिवाड़ी7 दिन पहलेलेखक: देवेंद्रपाल सिंह
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घटाल में पहाड़ की जड़ से चोटी तक मकान बने हैं। - Dainik Bhaskar
घटाल में पहाड़ की जड़ से चोटी तक मकान बने हैं।
  • कहरानी, घटाल सहित 5 गांवों में वन और राजस्व भूमि के पहाड़ों के ऊपर तक खतरनाक ढंग से बसे लोग

प्रशासन और वन विभाग के जिम्मेदार अफसरों ने आंखे मूंदी तो भिवाड़ी के 5 गांवों की आबादी पहाड़ों जड़ों तक जा बसी। हालात ये है कि पहाड़ के ऊपर तक मकान बना लिए गए हैं। ज्यादातर मकानों के पीछे पहाड हैं, जिनमें अंदर ही अंदर अवैध खनन भी चलता रहता है। पहाड़ में चट्टानें गिरी तो बड़ा हादसा हो सकता है। ये पहाड़ राजस्व और वन विभाग की भूमि पर हैं लेकिन जिम्मेदार अफसर आंख मूंदे बैठे हैं।

भास्कर ने पड़ताल की तो सामने आया कि लोगों ने जमीनों पर कब्जे कर कमाई करने के लिए पहाड़ को काट जगह बना ली। फिर वहां लेबर कॉलोनियां खड़ी की और फिर इन्हें किराये पर चला दिया। उद्योग क्षेत्र होने से भिवाड़ी में बाहर से आकर रह रहे श्रमिकों को इनमें बसा दिया गया है। अवैध कब्जे की संपत्ति होने से किराया कम होता है। इसलिए बड़े पैमाने पर कम आय वाले श्रमिक इनमें रहने लगते हैं।

घटाल गांव तो पूरा ही पहाड़ के चारों ओर बसा दिया है। पहाड़ से सटाकर मकान- कमरे बनाए गए हैं। ज्यादातर में किरायेदार और कई जगह मकान मालिक भी रह रहे हैं। एक बस्ती तो पहाड़ के ऊपर तक बसा दी गई है। ग्रामीणों ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र बनने के समय रीको ने गांव की अधिकांश जमीन अधिग्रहण कर ली थी।

दो-तीन बीघा जमीन ही बसने के लिए दी गई थी। अब ज्यादातर सरकारी जमीनों पर कब्जे कर कॉलोनिया बसा दी गई हैं। पहले अस्थाई सामान पटका जाता है। फिर पहाड़ को काट कर पत्थर बेचते हैं। जमीन समतल हो जाने पर मकान या लेबर कॉलोनी बना किराये पर चला दी जाती है।

मामले की एक बार जांच करा लेते हैं। किन-किन गांवों में किस तरह से लोगों ने अतिक्रमण किए हैं। वन विभाग इस मामले में हम से कोई मदद चाहेगा तो हम नियमानुसार कार्रवाई के लिए तैयार हैं।-मुकेश शर्मा, आयुक्त नप भिवाड़ी।

अवैध खनन वाले पहाड़ों के नीचे भी आशियाने

रामपुरा व मुंडाना गांव की पहाड़ी में पहले जबरदस्त अवैध खनन हुआ। अब भी चल रहा है। पहाड़ खत्म होने के बाद समतल हुई जमीनों पर मकान बना लिए गए हैं। बाबा मोहनराम मंदिर की पहाड़ी के पीछे दो गांव पहाड़ की जड़ में बसा लिए हैं। इनमें गोधान व खिदरपुर के क्षेत्र शामिल हैं। यह वन विभाग के अधिकार क्षेत्र का पहाड़ है। मंदिर के आसपास भी वन विभाग की जमीन पर अतिक्रमण कर जगह कब्जा ली गई हैं।

जिम्मेदारों की बेपरवाही से लोगों को मिली छूट
ज्यादातर पहाड़ विस्फोट से तोड़े जाते हैं। ऐसे में दो दिन पहले रामगढ़ में पहाड़ गिरने जैसी घटनाएं होने की हमेशा आशंका रहती है, लेकिन पहले अवैध खनन पर बेपरवाह रहे अफसर अब अतिक्रमणों पर भी कार्रवाई नहीं कर रहे।

हम पहाड़ों का लैंड रिकार्ड नए सिरे से तैयार करा रहे हैं। यह जैसे ही तैयार हो जाता है, उसके बाद सर्वे का काम शुरु कराएंगे। ताकि यह चिन्हित हो सके कि विभाग की जमीन पर कहां-कहां अतिक्रमण हैं। जिन लोगों ने अतिक्रमण किए हैं, उनके खिलाफ मामला दर्ज कर प्रशासन की मदद से बेदखली की कार्रवाई करेंगे।-अपूर्व कृष्ण श्रीवास्तव, डीएफओ, अलवर

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