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पहाड़ बन गए तालाब, मछली पकड़ रहे लोग:अरावली की पहाड़ियों को निगल गए माफिया, इतना खनन हुआ कि लाखों टन पत्थर खोद डाला

अलवर2 महीने पहले

10 साल पहले कोई कल्पना नहीं कर सकता था कि अरावली के 200 से 400 फीट ऊंचे पहाड़ पूरे खत्म हो जाएंगे। जमीन में 50 से 70 फीट तक गहरे खोद दिए जाएंगे। फिर इन पहाड़ों की जगह तालाब ले लेंगे और यहां मछली पकड़ने के लिए जाल बिछने लगेंगे। अब इन तालाबों में लोग नहाने जाते हैं। डूबने से मौत की कई घटनाएं भी चुकी हैंं। यह सब हो रहा है अलवर के भिवाड़ी, चौपानकी, टपूकड़ा सहित आसपास की अरावली की पहाड़ियों में। प्राचीनतम पर्वत श्रृंखलाओं में से एक अरावली पर्वत माला जो अपना अस्तित्व खोती जा रही है। यहां 2004 से पहले पहाड़ थे, आज 60 से 70 फीट गहरे तालाब हैं। विश्वास नहीं होता, लेकिन ये सच्चाई आपके सामने है।

2004 से माफिया सक्रिय रहा, 6 हजार करोड़ के पत्थर ले गए
यहां साल 2004 से लेकर 2014 तक 10 साल में अलवर के भिवाड़ी, टपूकड़ा व चौपानकी के आसपास के गांवों में करीब 5 से 7 हजार करोड़ रुपए का पत्थर अवैध खनन माफिया ले गया। 200 से 400 फीट ऊंचे पहाड़ों के अब केवल अवशेष ही बचे हैं। कुछ पहाड़ तो जमीन से भी 50 से 70 फीट नीचे खोद डाले। इस बार मानसून की बारिश अच्छी हुई तो यहां आसपास के खोहरी, मायापुरी की तरह करीब एक दर्जन जगहों पर खोदे गए पहाड़ तालाब में तब्दील हो गए। कई साल पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को सौंपी गई रिपोर्ट में ये माना गया था कि इस क्षेत्र में कई हजार करोड़ के पहाड़ अवैध खनन माफिया की भेंट चढ़ गए। सरकार के जरिए लीज से पहाड़ों का पत्थर बिकता तो सरकार को भी रेवेन्यू मिलता, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

ये चौपानकी के खोहरी गांव का पहाड़ है। 20 फीट गहरा पानी है।
ये चौपानकी के खोहरी गांव का पहाड़ है। 20 फीट गहरा पानी है।

इमरान मछली पकड़ता मिला
दैनिक भास्कर की टीम जब पहुंची तो चौपानकी के पास मायापुरी के पहाड़ में इमरान मछली के लिए जाल फेंकता मिला। पूछने पर बताया कि यहां 50 फीट पानी भरा हुआ है। मछली का बीज डाल दिया था। अब मछली काफी हैं। इसलिए पकड़ने के लिए आ जाते हैं। इमरान बताते हैं 2004 के बाद से पहाड़ में अवैध खनन जमकर हुआ। माफियाओं ने पूरा पत्थर हरियाणा में बेच दिया। अब यहां तालाब हैं। बगल में जितना ऊंचा पहाड़ दिख रहा है। पहले इस पानी की जगह भी वैसा ही पहाड़ था।

रईस बोला- ले गए पत्थर
खानपुर के रईस ने कहा कि यहां दो किलोमीटर तक लम्बा एक ही पहाड़ दिखता था। अब कहीं-कहीं झलकी सी नजर आती है। बाकी पूरा पहाड़ बड़े लोगों ने खनन कर बेच दिया। दिन रात डंपर चलते थे। ब्लास्ट होते थे। उस समय प्रशासन ने सख्ती की होती तो पहाड़ अपनी जगह नजर आते। ये तालाब नहीं। हां, अब कुछ सालों से सख्ती है। रईस बताते हैं अब इन जगहों पर अवैध खनन नहीं होता है। खनन लायक पहाड़ बचे ही कहां हैं।

ये खोहरी गांव का पहाड़ है। जिसके सामने वाले पहाड़ में 60 फीट गहरा पानी है।
ये खोहरी गांव का पहाड़ है। जिसके सामने वाले पहाड़ में 60 फीट गहरा पानी है।

NGT की सख्ती
लगातार NGT की सख्ती के बाद राज्य सरकार की सख्ती बढ़ी है। वरना 2008 से 2013 तक इतना अवैध खनन हुआ कि पूछो मत। पहाड़ों के पहाड़ उठा दिए गए। इसके बाद NGT की सख्ती हुई तो सरकार पर दबाव बढ़ा। तब खनन एवं वन विभाग ने सख्ती की है।

अवैध खनन रोकने को खाई
वन विभाग ने अवैध खनन रोकने के लिए पूरे क्षेत्र में खाई खोदी है, ताकि वाहन पहाड़ों तक नहीं जा सकें। इसका असर भी पड़ा है। इसके अलावा अवैध खनन के खिलाफ कड़े नियम बनाए। वाहनों को सीज करने के अलावा पेनल्टी कई गुना बढ़ा दी गई। अब कोई वाहन अवैध खनन ले जाते मिलता है तो 2 लाख रुपए तक जुर्माना लगता है। इस डर से भी खनन कम हुआ है।

डूबने से कई मौत
चौपानकी के खानपुर व मायापुरी में इतना गहरा पानी है कि कई युवकों की पानी में डूबने से मौत हो चुकी है। इसके बाद प्रशासन ने पानी वाली जगहों के चारों तरफ खाई खुदवाई। ताकि वहां तक लोग नहीं जा सकें। कई हादसों के बाद लोगों का ऐसी जगहों पर जाना बंद हो सका है।

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