अभी श्रमिकाें की समस्या / एमआईए भी लौट रहा पटरी पर, 600 में से 200 उद्याेग शुरू

MIA is also back on track, 200 out of 600 industries begin
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MIA is also back on track, 200 out of 600 industries begin

  • परिवहन साधनों के बिना श्रमिक अटके
  • कच्चा माल व तैयार सामान बिकने में परेशानी

दैनिक भास्कर

May 10, 2020, 07:22 AM IST

अलवर. मत्स्य औद्योगिक क्षेत्र में करीब 600 में से 200 उद्याेगाें में काम शुरू हाे गया है। राज्य सरकार की ओर से काेराेना से बचाव के निर्देशाें की पालना करते हुए औद्याेगिक इकाइयाें काे शुरू करने की छूट 15 अप्रैल से दे दी गई थी।

इस छूट के बाद धीरे-धीरे एमआईए में औद्याेगिक माहाैल पटरी पर अाने लगा है। बड़ी इकाइयाें में काम शुरू कर दिया गया है। हालांकि अभी श्रमिकों काे लेकर परेशानी आ रही है, क्याेंकि बाहर की लेबर बिलकुल नहीं है। जिले से आने वाले श्रमिक भी परिवहन सेवाएं शुरू नहीं हाेने से  उद्याेगाें में नहीं पहुंच पा रहे है। शुरू हुए उद्याेगाें में अभी 30 प्रतिशत श्रमिक ही पहुंच पा रहे हैं।

राज्य सरकार के निर्देशाें का पालन करते हुए औद्याेगिक इकाइयाें में काेराेना से बचाव के आवश्यक प्रबंध किए गए हैं ताकि श्रमिकों काे किसी तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़े। इसके बावजूद एमआईए में अभी करीब 70 प्रतिशत श्रमिक नहीं आ पा रहे हैं।

हैवेल्स इंडिया लिमिटेड के यूनिट हैड आरके काजला ने बताया कि हमने अपने प्लांट शुरू कर दिए हैं। समस्या यह अा रही है कि 30 प्रतिशत ही लेबर अभी हमारे प्लांट में आ पा रही है। हमारे पास कच्चा माल भी है और हमारे उत्पादाें की डिमांड भी है। लेबर नहीं हाेने के कारण हम पूरी क्षमता से उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं। हमने पूरी तरह बचाव के उपाय अपनाए हुए हैं।

कठूमर, लक्ष्मणगढ़ व रामगढ़ क्षेत्र की लेबर हम तक पहुंच नहीं पा रही है। तेल उत्पादक यूनिट अलवर मैन्यूफैक्चरर्स के एमडी वीरेंद्र कुमार अग्रवाल का कहना है कि एमआईए में 10 से अधिक तेल उत्पादक इकाइयां हैं, ये सभी चल रही हैं। इस समय सरसाें आने से कच्चे माल की कमी नहीं है। लेबर संबंधी कुछ समस्या है। हमने अपने यहां लेबर के ठहरने की व्यवस्था की हुई है।

मत्स्य उद्योग संघ के अध्यक्ष मोहन निहलानी का कहना है यह सही है कि औद्याेगिक इकाइयाें के समक्ष लेबर की समस्या आ रही है। लीली से आने वाले श्रमिक अब नहीं आ पा रहे हैं। अन्य स्थानाें से भी लाेग नहीं अा पा रहे है। एमआईए में बाहर के रुके हुए श्रमिक घर जाना चाहते हैं। ऐसे में सभी फैक्ट्रियाें के समक्ष लेबर की समस्या है। कई इकाइयाें के समक्ष कच्चे माल की समस्या आ रही है।

कई उद्याेग इसलिए नहीं चल पा रहे हैं कि देश के महानगराें में कर्फ्यू लगे हाेने के कारण उनके उत्पादित माल काे बेचने में दिक्कत आ रही है। यही कारण है कि एमआईए की अधिकांश औद्याेगिक इकाइयाें में काम शुरू नहीं हाे पा रहा है। संघ के सचिव सुनील अग्रवाल का कहना है कि मार्बल उद्याेग ताे बिलकुल बंद है। इसकी 25 से 30 इकाइयाें में काम नहीं हाे रहा है क्याेंकि डिमांड ही नहीं आ रही है।

रीको के सीनियर रीजनल मैनेजर आदित्य शर्मा ने बताया कि फैक्ट्रियों में काम शुरू हुआ है पर लाॅकडाउन से पहले जिस तरह सभी फैक्ट्रियां चल रही थी, उस तरह नहीं हो पाया है। एक ताे लेबर नहीं मिल रही है। दूसरा-उद्योगपतियों में डर है कि कभी भी कुछ हाे सकता है। इसी कारण अभी वे अपना काम शुरू नहीं कर पा रहे हैं। कुछ मिनरल इकाइयां शुरू हुई हैं। बड़ी फैक्ट्रियाें में काम शुरू हाे गया है। 

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