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अस्पताल के बाहर बोर्ड, कोरोना मरीज भर्ती नहीं:अलवर के मित्तल हाॅस्पिटल प्रबंधन ने चस्पा कर दी सूचना, जिला प्रशासन उपलब्ध नहीं करा रहा ऑक्सीजन, मरीज नहीं लेंगे

अलवरएक महीने पहले
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मित्तल हाॅस्पिटल पर गेट पर चिपकाया नोटिस, ऑक्सीजन नहीं है, भर्ती बंद। - Dainik Bhaskar
मित्तल हाॅस्पिटल पर गेट पर चिपकाया नोटिस, ऑक्सीजन नहीं है, भर्ती बंद।

अलवर शहर में शुक्रवार को एक और निजी हाॅस्पिटल ने अस्पताल के मुख्य गेट पर बोर्ड लगा दिया कि हमारे यहां पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं है। इसलिए कोरोना के मरीज भर्ती नहीं कर पा रहे हैं। जो मरीज पहले से भर्ती हैं उनको भी डिस्चार्ज करने में लगे हैं। शहर में मित्तल हाॅस्पिटल प्रबंधन ने शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे ही यह सूचना अस्पताल के मुख्य गेट पर चस्पा कर दी कि जिला प्रशासन अलवर की ओर से अस्पताल की ऑक्सीजन सप्लाई बाधित है। जिसके कारण मित्तल हॉस्पिटल सात मई सुबह 10 बजे से अग्रिम आदेश तक कोरोना मरीजों को नहीं ले सकेगा।

54 मरीज से घटाकर 22 बेड कर दिए

मित्तल हॉस्पिटल के निदेशक डॉ एससी मित्तल ने सार्वजनिक रूप से बताया कि पहले उनके अस्पताल में कोरोना के मरीजों के लिए 54 बेड थे। जो अब घटाकर 22 कर दिए हैं। असल में अस्पताल को करीब 50 सिलेण्डर की जरूरत प्रतिदिन पड़ती है, लेकिन, प्रशासन से केवल 33 सिलेण्डर मिल पा रहे हैं।

प्रशासन की टीम भी पहुंची

यह नोटिस चस्पा करने के बाद प्रशासन की टीम भी मौके पर पहुंची है। जो अस्पताल प्रबंधन से आवश्यक जानकारी जुटा रही है। ताकि कोरोना के भर्ती मरीज प्रभावित नहीं हो। असल में प्रबंधन ने यह भी कहा है कि जो मरीज भर्ती हैं उनके लिए भी ऑक्सीजन कम पड़ने लगी है। इस कारण भर्ती मरीजों को भी डिस्चार्ज करने में लगे हैं।

दो दिन पहले सानिया में संकट

दो दिन पहले इसी के पास सानिया हाॅस्पिटल में भी ऑक्सीजन का संकट हुआ तो अस्पताल में प्रबंधन ने मुख्य गेट पर बोर्ड लगा दिया था कि मरीज भर्ती नहीं कर सकेंगे। जबकि सानिया हाॅस्पिटल में जिले भर में सबसे अधिक मरीज भर्ती हैं। उनके इलाज पर संकट आया तो प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। जिन्होंने तुरंत समस्या का समाधान किया। उसके बाद से वहां मरीजों का बराबर इलाज जारी है।

अन्य अस्पताल भी ऑक्सीजन की कमी बता रहे

असलीयत यह है कि निजी अस्पताल ज्यादातर ऑक्सीजन की कमी बताते रहे हैं। जबकि कलेक्टर नन्नूमल पहाड़िया लगातार कहते रहे हैं कि अलवर में ऑक्सीजन की कमी नहीं है। वितरण व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने में लगे हैं। ताकि हर जगह जरूरत के अनुसार ऑक्सीजन पहुंच सके।

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