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भाजपा-कांग्रेस के सीधे सिम्बल जमा होंगे:पंचायत चुनाव में कल नामांकन जमा कराने की अंतिम तारीख, पार्टियों की आरे से सिम्बल सीधे जमा कराने की तैयारी

अलवर19 दिन पहले
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कलेक्ट्रेट में नामांकन भरने की तैयारी। - Dainik Bhaskar
कलेक्ट्रेट में नामांकन भरने की तैयारी।

पंचायत चुनाव के लिए नामांकन जमा कराने की 8 अक्टूबर शुक्रवार को अंतिम तिथि है। नवरात्र की शुरूआत के साथ नामांकन जमा कराने वाले संभावति प्रत्याशियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। भाजपा व कांग्रेस पार्टी अपने प्रत्याशियों के नाम पहले घोषित करने की बजाय सीधे सिम्बल जमा कराएंगी। ताकि पार्टियों के अन्य दावेदारों की लड़ाई को नामांकन के बाद सुलझाने का प्रयास किया जा सके। पहले टिकट घोषित करने से बगावत करने वाले ज्यादा खेल बिगाड़ सकते हैं। यह बड़ा डर है। इस कारण लग रहा है कि दोनों ही पार्टियों सीधे सिम्बल जमा कराने की तैयारी में हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष संजय नरूका ने भी पहले टिकट घोषित करने के बारे में मना कर दिया।

जिला मुख्यालय पर जिला पार्षद के नामांकन
जिला मुख्यालय पर जिला पार्षद के नामांकन जमा हो रहे हैं। सबसे अधिक नामांकन 8 अक्टूबर को जमा होने की संभावना है। असल में दावेदारों को टिकट मिलने की संभावना है। इस कारण पहले वे टिकट के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। टिकट नहीं मिलने पर काफी दावेदार बागी होकर मैदान में उतर आंएगे।

नामांकन जमा कराने के बाद।
नामांकन जमा कराने के बाद।

जिला प्रमुख के चुनावों पर नजर
अलवर जिले में जिला प्रमुख के चुनावों पर सभी बड़े नेताओं की नजर है। असल में पिछली बार अलवर जिले में प्रमुख के चुनाव के बड़ी संख्या में क्रॉस वोटिंग हो गई थी। जिसके कारण ज्यादा पार्षद होते हुए भी भाजपा चुनाव हार गई थी। कांग्रेस से रेखा राजू यादव जिला प्रमुख बनी थी। उसके बाद भाजपा के नेताओं में आपसी खींचतान बढ़ी है। इस बार नेता पुरानी खसक मिटाने के लिए क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। इस कारण दोनों पार्टियों के लिए प्रमुख का चुनाव अहम हो चुका है।

गांव में प्रधान की दौड़ तेज
गांवों में डेलीगेट चुनाव के टिकटों के लिए पूरी भागदौड़ जारी है। प्रधान की कुर्सी हथियाने के लिए वहां नेताओं की भागदौड़ जारी है। कुछ विधायक अपने समर्थित प्रत्याशी को आगे लाने के जोड़-तोड़ में लगे हैं। कुछ पुराने खेल का बदला लेने की फिराक में है। पंचायत सिमिति सदस्य की संख्या के आधार पर पंचायत समिति क्षेत्रों में प्रधान की कुर्सी का खेल बनेगा और बिगड़ेगा। उसी गणित के आधार पर नेता राजनीतिक समीकरण बनाने में लग गए हैं।

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