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क्या इस साल शहर में रामलीला मंचन होगा?:रामलीला मंचन के लिए प्रशासन की अनुमति नहीं मिली तो सोशल मीडिया पर लाइव दिखाने की तैयारी

अलवर8 दिन पहले
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  • हर साल 137 परिवारों को रोजगार और 525 कलाकाराें काे अभिनय का माैका देती है रामलीला

काेराेना महामारी के कारण शहर में रामलीला मंचन को लेकर 104 साल में पहली बार असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अभी तक रिहर्सल की भी शुरुआत नहीं हुई है। शहर में हर साल मुख्य रूप से राजर्षि अभय समाज, तांगा स्टैंड व शिवाजी पार्क में रामलीला का मंचन हाेता है। रामलीला मंचन की तैयारी डेढ़ से दाे महीने पहले ही शुरू हाे जाती है।

आयोजकों का कहना है कि तीनों स्थानों पर होने वाले रामलीला मंचन में 525 कलाकाराें काे अभिनय का माैका मिलता है, इनमें हर साल 70 नए कलाकार हाेते हैं, वहीं 137 परिवाराें काे राेजगार मिलता है। इस बार रामलीला का मंचन नहीं हाेगा ताे इन परिवाराें के आगे राेजी-राेटी का संकट खड़ा हाे जाएगा। शहर के लोगों के मन में भी यह सवाल है कि इस साल रामलीला देखने को मौका मिलेगा या नहीं, इसी को लेकर भास्कर ने आयोजकों से बात की।

राजर्षि अभय समाज : अभी तक शुरू नहीं हुई रिहर्सल, हर साल डेढ़ महीने पहले शुरू जाती है, आगामी बैठक में लेंगे निर्णय
राजर्षि अभय समाज के महामंत्री महेश चंद्र शर्मा का कहना है कि अभी तक रामलीला की रिहर्सल प्रारंभ नहीं हुई है। हर साल रामलीला शुरू हाेने से डेढ़ महीने तैयारी शुरू हाे जाती है। राजर्षि अभय समाज की अगली बैठक में रामलीला काे लेकर चर्चा हाेगी।
कलाकार और रोजगार : अभय समाज रंगमंच पर हाेने वाली रामलीला से करीब 125 लाेग जुड़े हुए हैं। इनमें 100 कलाकार हैं, हर साल 10-15 नए कलाकाराें काे रामलीला में अभिनय का माैका मिलता है। अभिनय करने वाले कलाकाराें की उम्र 80 साल तक की हाेती है। करीब 25 परिवाराें काे राेजगार मिलता है।
इतिहास : 2002 से रामलीला मंचन हाे रहा है। वर्ष 1916 में जयनारायण भार्गव, मुरलीधर, रामचंद्र व रामजीदास ने स्वांग निकाला था। द्वारिका प्रसाद भार्गव काे यह स्वांग पसंद आया। उन्हाेंने नवयुवकाें के सामने रामलीला मंचन का प्रस्ताव रखा। उस साल दशहरा पर द्वारिका प्रसाद भार्गव के द्वारिका भवन के चबूतरे पर रामलीला का मंचन हुआ। यज्ञेश्वर शास्त्री ने इस संस्थान का नाम हरिकीर्तन समाज रखा। हरिकीर्तन समाज ने 1917 में पुराना कटला में रामलीला का मंचन किया। इसकी ख्याति महाराज जयसिंह तक पहुंची।

महाराज ने गुपचुप तरीके से रामलीला देखी। हरिकीर्तन समाज की प्रतिस्पर्धा में ताजमी सरदाराें ने भी महाराज काे प्रसन्न करने के लिए अभिनव समाज की स्थापना की। दाेनाें संस्थाओं में लीला व नाटक मंचन की प्रतिस्पर्धा चली। महाराज सवाई जयसिंह ने दाेनाें संस्थाओं का एकीकरण कर नया नाम दिया राजर्षि अभय समाज। इसके संस्थापकाें में जयनारायण भार्गव, ग्यासीराम शर्मा, छाेटेलाल कपूर, डाॅ. बल्लू सिंह कपूर, रामचंद्र व लाला द्वारिका प्रसाद के नाम उल्लेखनीय हैं।
युवराज प्रतापसिंह रामलीला ट्रस्ट शिवाजी पार्क : अनुमति नहीं मिली ताे साेशल मीडिया पर करेंगे प्रसारण
युवराज प्रतापसिंह रामलीला ट्रस्ट शिवाजी पार्क के अध्यक्ष श्याम शर्मा का कहना है कि 12 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी पर रामलीला के लिए कलाकाराें का ऑनलाइन ऑडिशन हुआ था। इसके अगले दिन से चयनित कलाकाराें द्वारा घराें पर रामलीला की रिहर्सल की जा रही है। जिला प्रशासन की अनुमति नहीं मिली ताे काेराेना महामारी हमारी परंपरा को लीन ना ले, इसलिए अपनी संस्कृति और लाेक कला काे जिंदा रखने के लिए साेशल मीडिया पर रामलीला का प्रसारण किया जाएगा।

कलाकार और रोजगार : 300 लाेग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रामलीला से जुड़े रहते हैं। हर साल 40 नए कलाकार व 8 से 80 साल तक की उम्र के कलाकार अभिनय करते हैं। 100 से अधिक लाेगाें काे इसके माध्यम से राेजगार मिलता है। इनमें मैकअप आर्टिस्ट, वाद्ययंत्र बजाने वाले व रंगमंच तैयार करने वाले लाेग शामिल हैं।
इतिहास : वर्ष 1986 से शिवाजी पार्क में टैंपाे स्टैंड के पास स्थित मैदान में रामलीला का मंचन हाे रहा है। छठे दिन निकाले जाने वाली राम बारात अाैर राजतिलक वाले दिन हाेने वाली महाअारती खास होती है। रामलीला काे लेकर बच्चाें से लेकर बुजुर्गाें तक में उत्साह रहता है।

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