REET के आंसर देख युवक ने किया सुसाइड:जहर खाने से पहले युवक ने वॉट्सऐप पर लगाया सॉरी का स्टेटस; जवाब सही नहीं निकलने से तनाव में था

अलवर2 महीने पहले
REET के सवालों के जवाब मिलाने के बाद अलवर के विष्णु यादव ने जहर खाकर सुसाइड कर लिया। उसको सिलेक्शन की उम्मीद नहीं थी।

अलवर के बानसूर कस्बे के पास के सांथलपुर रोड चंदवाली निवासी 27 वर्षीय विष्णु यादव ने मंगलवार देर रात जहर खाकर आत्महत्या कर ली। विष्णु ने सुसाइड से पहले वॉट्सऐप पर लिखा कि वाह रे नौकरी-रीट। इसमें किसी की कोई गलती नहीं है। गलती है तो मेरी और जिम्मेदार हूं तो मैं। सॉरी। रात को करीब डेढ़ बजे बाद परिवार को विष्णु के जहर खाने का पता चला। सुबह पोस्टमॉर्टम कर शव परिजनों को सौंपा गया। गांव के लोगों ने बताया कि विष्णु रीट के आंसर देखने के बाद से ही निराश था। उसको सिलेक्शन की उम्मीद नहीं थी।

विष्णु के भाई ने बताया कि विष्णु चौमू में 26 सितंबर को रीट का पेपर देकर आया था। उसने रीट लेवल 2 की परीक्षा दी थी। बानूसर कस्बे में रूम किराए पर लेकर पढ़ाई कर रहा था। पेपर देकर आने के बाद पहले कमरे पर गया। इसके बाद घर आ गया। घर में देर रात करीब 12 बजकर 19 मिनट पर उसने खुद के मोबाइल के वॉट्सऐप स्टेटस लगा लिया। इसमें लिखा- वाह रे नौकरी-रीट। इसमें किसी की कोई गलती नहीं है। गलती है तो मेरी और जिम्मेदार हूं तो मैं। सॉरी।

रात को कमरे में नहीं दिखा
परिवार के लोगों को विष्णु रात को कमरे में नहीं दिखा। इसके बाद वे उसे आसपास तलाशते रहे। परिवार के लोगों ने पहले सोचा रूम पर गया होगा। बाद में रूम पर नहीं होने का पता लगा। परिवार के लोगों ने इधर-उधर ढूंढ़ा। इसके बाद वह रात को डेढ़ बजे बाजरे के खेत में पड़ा मिला। विष्णु ने वहीं पर जहर खा लिया था, जिससे उसकी मौत हो गई।

परिवार का बुरा हाल
ग्रामीणों ने बताया कि 2011 से विष्णु कॉम्पिटिशन एग्जाम की तैयारी में लगा था। वह पहले भी रीट सहित कई परीक्षा दे चुका था। इस बार उसकी तैयारी अच्छी थी। वह घर से अलग रह रहा था। ताकि पूरी तैयारी हो जाए। अब उसका एग्जाम हो चुका। इसके बाद उसने घर आकर सही सवाल मिलान किए। दूसरे लोगों से पता लगा कि उसके करीब 150 में से 100 के आसपास सवाल सही निकले। इस आधार पर रीट में पास की उम्मीद कम हो गई, जिससे निराश होकर उसने जहर खा लिया।

ये कदम सही नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कायरतापूर्ण कदम है। 71 हजार ने अलवर में एग्जाम दिया है। 24 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी पूरे प्रदेश में थे। उनमें से केवल 31 हजार अभ्यर्थी ही उत्तीर्ण होंगे। बाकी पौने 24 लाख के आसपास फेल होंगे। फेल होने के बाद सफल होने की चुनौती रहती है। उसे पाने के लिए और मेहनत करनी होती है। जीवन में सरकारी नौकरी के अलावा भी अनेक विकल्प व बड़े मुकाम हैं। हमें उनको समझने की जरूरत है। ताकि इस तरह का कदम उठाने की दिमाग में भी नहीं आए।

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