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थैलीसीमिया के मरीजों को देख मंत्री का दिल पसीजा:बोले- अलवर में जल्दी 25 से 30 लाख रुपए की ब्लड सैपरेशन मशीन लगाई जाएगी, विधायक कोष से दूंगा राशि

अलवर3 महीने पहले
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थैलेसीमिया से पीड़ित मरीज बच्चों के साथ श्रम मंत्री टीकाराम जूली। - Dainik Bhaskar
थैलेसीमिया से पीड़ित मरीज बच्चों के साथ श्रम मंत्री टीकाराम जूली।

अलवर में ब्लड सैपरेशन की मशीन नहीं होने से जिले के थैलेसीमिया के मरीजों को जयपुर व गुड़गांव जाना पड़ता है। ज्यादातर बच्चों को तो महीने में 2 बार ब्लड की जरूरत पड़ती है। छोटे-छोटे बच्चों को थैलेसीमिया के मरीज के रूप में देखकर रविवार को श्रम राज्य मंत्री टीकाराम जूली का दिल पसीज गया। उन्होंने रविवार को दक्ष वैलफेयर सोसायटी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में घोषणा कर दी कि वे अपने विधायक कोष से 25 से 30 लाख रुपए की लागत से लगने वाली ब्लड सैपरेशन मशीन लगवाएंगे। अलवर शहर में रविवार को नंगली सर्किल पर दक्ष वेलफेयर सोसाइटी की तरफ से थैलेसीमिया का नि:शुल्क जांच शिविर लगाया गया था। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रम राज्य मंत्री टीकाराम जूली थे।

कार्यक्रम के दौरान थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों ने श्रम मंत्री टीकाराम जूली को ज्ञापन सौंपकर थैलेसीमिया की जांच के लिए सैफरेशन मशीन उपलब्ध कराने की मांग की। इसके बाद मंत्री ने अपने उद्बोधन में मशीन लगाने की घोषणा कर दी। श्रम मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना का आमजन को अधिक से अधिक लाभ लेना चाहिए। जिसमें 5 लाख रुपए तक इलाज निशुल्क कराया जा सकता है। जिसके लिए केवल 850 रुपए एक ही बार प्रीमियम देने की जरूरत है।

शिवर में 13 हजार रुपए की जांच नि:शुल्क
दक्ष वेलफेयर सोसाइटी की तरफ से लगाए गए थैलेसीमिया शिविर में करीब 13 हजार रुपए की जांच नि:शुल्क की गई। दिल्ली एवं गुड़गांव से थैलेसीमिया के स्पेशलिस्ट डॉक्टरों ने बच्चों की जांच की। गुड़गावं वेदांता हॉस्पिटल से आए डॉ विकास दुआ ने कहा कि भारत में थैलेसीमिया की जानकारी का भाव है। तभी तो थैलेसीमिया के मामले में हिंदुस्तान को कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड कहा जाता है।

10 लाख रुपए तक मदद

उन्होंने बताया कि अलवर की दक्ष एवं फरीदाबाद की गिफ्ट सोसायटी आफ प्रीवेंशन पर काम कर रही हैं। भारत सरकार के कॉल इंडिया प्रोजेक्ट के तहत बोन मैरो ट्रांसप्लांट के तहत 10 लाख रुपए तक की मदद भी मिल जाती है। यह बड़ी मदद है। इसके अलावा कुछ खर्च परिवार को भी करना पड़ता है। अलवर में भी काफी संख्या में थैलेसीमिया के मरीज हैं। जिनको हर माह ब्लड की जरूरत पड़ती है। जिसके लिए दिल्ली व जयपुर की तरफ जाना पड़ता है। ब्ल्ड सैपरेशन मशीन लगने के बाद इन मरीजों को यहीं पर इलाज मिल सकेगा।

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