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भिवाड़ी का जांबाज फौजी उरी में शहीद:फूफा फौज में थे तो बचपन से ही रहा झुकाव; 15 दिन पहले ही छुट्‌टी पूरी कर ड्यूटी पर लौटा था फौजी निखिल

अलवर3 महीने पहले
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शहीद हो गया देश का बेटा निखिल। - Dainik Bhaskar
शहीद हो गया देश का बेटा निखिल।
  • भिवाड़ी के सैदपुर गांव निवासी

अलवर के भिवाड़ी के सैदगांव का जांबाज फौजी निखिल की शहादत ने सबकी आंखें नम कर दीं। उन्होंने कश्मीर के उरी में सीज फायर उल्लंघन का जवाब देते हुए प्राण न्यौछावर कर दिए। उनकी पार्थिव शरीर का इंतजार गांव में हो रहा है। निखिल केवल साढ़े 18 साल की उम्र में सेना में भर्ती हो गए और सवा साल की सेवा में देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए।

गांववालों ने बताया 14 जनवरी को ही गांव से वे फिर से ड़्यूटी ज्वाइन करने के लिए गए थे और महज 15 दिन बाद ही उनकी शहादत की खबर आ गई। इससे राजस्थान के साथ हरियाणा में लोगों की आंखें नम हैं। निखिल मूलत: हरियाणा के सोना गांव के रहने वाले थे और दो साल की उम्र से बुआ के यहां रह रहे थे। निखिल के फूफा सेना में हैं। इसी के चलते बचपन से ही उसका झुकाव सेना की ओर था। यही वजह है कि पहले से तैयारी के चलते उसका सिलेक्शन महज साढ़े 18 साल की उम्र ही सेना में हो गया।

अकटूबर 2019 में ही सेना में भर्ती हुआ था
निखिल अक्टूबर 2019 में ही सेना में भर्ती हुआ था। इसके बाद करीब नौ महीने उसकी ट्रेनिंग हुई। हाल में 14 जनवरी को ही सैदपुर गांव में छुट्टी पूरी कर वापस उरी लौटा था। फिलहाल वह राजपूत रजिमेंट में था। शुक्रवार को जम्मू कश्मीर के उरी में सीजफायर के उल्लंघन का जवाब देते वह शहीद हुआ। निखिल के शहीद होने के बाद पूरे प्रदेश के लोगों की आंखें नम हो गई हैं।

गांव में शहीद का शव पहुंचने का इंतजार
शनिवार शाम तक भी शहीद का शव गांव नहीं पहुंचा था। अब रविवार को ही निखिल का पार्थिव शरीर गांव लाया जाएगा। यहां पूरे सैनिक सम्मान से उनका अंतिम संस्कार होगा। शनिवार को भी दिन भर प्रशासन के लोग शहीद परिवार से मिलने पहुंचे।

निखिल के पिता की बाइपास सर्जरी हो चुकी

निखिल के पिता हार्ट के मरीज हैं। जिनकी दो साल पहले ही बाइपास सर्जरी हुई है। उनके पास केवल एक बीघा जमीन है। मतलब बेहद गरीब परिवार है। निखिल का छोटा भाई गांव के स्कूल में ही दसवीं कक्षा में पढ़ता है। मां गृहिणी हैं।

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