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महिला शक्ति को नमन:100 साल पहले सुगनाबाई बनीं जिले की पहली सर्जन; सेवा के साथ ही बालिका शिक्षा को बढ़ाने की प्रेरणा दी

अलवर9 महीने पहले
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सुगनाबाई - Dainik Bhaskar
सुगनाबाई
  • मरीजाें के परिजन परेशान नहीं हाें, इसलिए बनवाई धर्मशाला

रियासत काल के उस दौर में जब महिलाओं की शिक्षा किसी सपने से कम नहीं थी। उस समय सुगनाबाई अलवर जिले की पहली महिला डॉक्टर बनी। उन्होंने मरीजों की सेवा के साथ जिले में बालिका शिक्षा को बढ़ाने की प्रेरणा दी। तत्कालीन अलवर महाराज जयसिंह के शासनकाल में इंग्लैंड से डॉक्टरी की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने अलवर के लेडी डफरिन अस्पताल में सेवाएं दी।

बाद में इसी अस्पताल से अधीक्षक पद से सेवा निवृत होने के बाद अपने जीवनकाल में 1937 में ही ट्रस्ट बनाया और रामगंज में डाॅ. सुगनाबाई के नाम से धर्मशाला का निर्माण कराया। उस समय लेडी डफरिन अस्पताल मालाखेड़ा गेट के पास था। जो बाद में अप्रैल 1934 में बजाजा बाजार में बग्गीखाना में स्थानांतरित हो गया। वे राजपूत थी और बचपन में नाम सुगना बाला था, जो बाद में सुगनाबाई हुआ।

प्रशासनिक रपट अलवर राज्य 1927-28 के अनुसार उस समय महिला शिक्षा की स्थित ठीक नहीं थी। 1903 से 1937 तक अलवर के तत्कालीन महाराज जयसिंह का शासन काल रहा। उसी दौर में लेडी डफरिन अस्पताल में बतौर नर्स काम शुरू किया। बाद में महाराज ने इंग्लैंड भेज डॉक्टरी की पढ़ाई कराई।

जीवित रहते हुए ट्रस्ट व मरीजों के लिए बनाई धर्मशाला

डॉ. सुगनाबाई धर्मशाला ट्रस्ट के अध्यक्ष बृजभूषण गुप्ता व सचिव एसके पांडे बताते है कि डॉ.सुगनाबाई ने 1937 में अपने जीवन काल में ही धर्मशाला और कल्याण महाराज के मंदिर का निर्माण कराया। उस समय बिजलीघर के पास अलेक्जेंडर नाम से अस्पताल संचालित था। वर्तमान में इसका नाम राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय हैै।

अलेक्जेंडर व लेडी डफरिन अस्पताल आने वाले मरीजों को लिए ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में डॉ. सुगनाबाई ने अपने पैसे से ट्रस्ट बनाया व धर्मशाला का निर्माण कराया। वर्तमान में धर्मशाला में 47 कमरे हैं। इनमें 13 एसी कमरे हैं। वे कल्याण महाराज की भक्त थी। ऐसे में धर्मशाला में ही कल्याण महाराज के मंदिर की स्थापना की। आज शहर में यह इकलौता मंदिर है।

महाराज की पारिवारिक डॉक्टर थी डॉ. सुगनाबाई : राजपरिवार के निजी सचिव नरेंद्र सिंह का कहना है कि डॉ. सुगनाबाई अलवर महाराज जयसिंह की पारिवारिक डॉक्टर थी। इलाज में महिलाओं को परेशानी आती थी ऐसे में महाराज ने उन्हें इंग्लैंड भेज डॉक्टरी की पढाई कराई। वे पहले नर्स थी।

रंग भरियों की गली स्थित हवेली में था निवास : डॉ.सुगनाबाई के बारे में इतिहास में हालांकि खास जानकारी नहीं हैं। ट्रस्ट पदाधिकारी का कहना है रंग भरियों की गली में हवेली थी।

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